Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 18:1 निर्गमन 18:2 निर्गमन 18:3 निर्गमन 18:4 निर्गमन 18:5 निर्गमन 18:6 निर्गमन 18:7 निर्गमन 18:8 निर्गमन 18:9 निर्गमन 18:10 निर्गमन 18:11 निर्गमन 18:12 निर्गमन 18:13 निर्गमन 18:14 निर्गमन 18:15 निर्गमन 18:16 निर्गमन 18:17 निर्गमन 18:18 निर्गमन 18:19 निर्गमन 18:20 निर्गमन 18:21 निर्गमन 18:22 निर्गमन 18:23 निर्गमन 18:24 निर्गमन 18:25 निर्गमन 18:26 निर्गमन 18:27



निर्गमन 18:8 पर टिप्पणी
पर्व 18 में मूसास्थ कदम-कदम पर यहोश्वा के संचालन और नेतृत्त्व का वर्णन हो रहा है, और यहां विशिष्ट रूप से मोशे को उनके ससुर शिलोह से मिला-सीधा अनुभव मिलता है। verse 8 में मोशे अपने ससुर जिथ्रो (याहोशे) को बतलाते हैं कि इस्राएलियों ने मिस्र से निकासी के समय ईश्वर ने फ़िरौन और मिस्रियों पर क्या-क्या किया और मार्ग में क्या-क्या कष्ट उठाने पड़े—तथा आखिर वे ईश्वर के उद्धार और मार्गदर्शक कैसे बने। यह उद्धारकारी चमत्कार और कष्टों के स्मरण से यह स्पष्ट होता है कि यहोवा का हाथ उनके साथ है और वह अपने लोगों को सीधी राह दिखाते हैं।
मुख्य सार और केंद्रीय अर्थ
इस verse का मूल संदेश यह है कि ईश्वर ने अपने लोगों के लिए बड़े उद्धार के कर्म किए, पर उनके रास्ते में आने वाले कष्टों और मिस्र की प्रतिद्वंद्विता को भी वे स्पष्ट बनाते हैं। मोशे के ससुर के समक्ष यह विवरण यह दर्शाता है कि एक परमेश्वर-आधारित नेतृत्व केवल चमत्कारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुभव-साक्ष्यों के माध्यम से विश्वास के साथ बाँटा जाता है। इससे यह भी पता चलता है कि इतिहास का स्मरण और आचरण एक समुदाय की आस्था को मजबूत बनाते हैं।
मुख्य विषय
संबद्ध पवित्र ग्रंथ पंक्तियाँ
इस संदर्भ के साथ निकट-संबंधित अनुभाग नीचे दिए जाते हैं ताकि पाठक व्यापक प्रकाश पाएँ:
व्यावहारिक रुचि
इस verses से हमें सिखने को मिलता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर के चमत्कारों को याद रखना चाहिए और अपने परिवारी, समुदाय तथा नेतृत्व को विश्वासपूर्वक साझा करना चाहिए। अपनी व्यक्तिगत यात्रा में आप किस प्रकार उद्धार के अनुभवों को स्मरण करते हैं और किस प्रकार दूसरों के साथ बाटते हैं?
कथात्मक सप्तक और क्रॉस-रेफरेंसेज़
गहराई से देखने के लिए नीचे तीन संदर्भ दिए जा रहे हैं जिन्हें संदर्भ-संग्रह के रूप में समझना उपयोगी है:
संक्षिप्त समापन
यह verse इस बात की याद दिलाता है कि परमेश्वर के उद्धार के क्रम में जो भी अनुभव आते हैं, वे एक समुदाय के विश्वास और नेतृत्व की ताकत बनते हैं। यादों की स्मृति से न केवल इतिहास सुधरता है, बल्कि वर्तमान में भी आस्था और समस्या-समाधान की दिशा मिलती है।
उद्धरण अवरोध: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट शब्दों के छोटे उद्धरण उपलब्ध हों तो नीचे नोट किया गया है: — इस पंक्ति में विशिष्ट छोटे उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं, किंतु इन प्रकाशकों के विचार इस प्रकार रहे हैं कि उद्धार के स्मरण से विश्वास बढ़ता है और नेतृत्व को सूझ-बूझ मिलती है।