Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 26:1 निर्गमन 26:2 निर्गमन 26:3 निर्गमन 26:4 निर्गमन 26:5 निर्गमन 26:6 निर्गमन 26:7 निर्गमन 26:8 निर्गमन 26:9 निर्गमन 26:10 निर्गमन 26:11 निर्गमन 26:12 निर्गमन 26:13 निर्गमन 26:14 निर्गमन 26:15 निर्गमन 26:16 निर्गमन 26:17 निर्गमन 26:18 निर्गमन 26:19 निर्गमन 26:20 निर्गमन 26:21 निर्गमन 26:22 निर्गमन 26:23 निर्गमन 26:24 निर्गमन 26:25 निर्गमन 26:26 निर्गमन 26:27 निर्गमन 26:28 निर्गमन 26:29 निर्गमन 26:30 निर्गमन 26:31 निर्गमन 26:32 निर्गमन 26:33 निर्गमन 26:34 निर्गमन 26:35 निर्गमन 26:36 निर्गमन 26:37

सीधे अर्थ का उद्घाटन
निर्गमन 26:29 में कहा गया है कि तख्तों को सोने से मढ़वाया जाए और उनके कड़े—जो बेंड़ों के घरों के काम देंगे—उन्हें भी सोने के बनवाने चाहिए; साथ ही बेंड़ों को भी सोने से मढ़वाना चाहिए। इसका प्रमुख संदेश परमेश्वर के उस के अभिषिक्त और पवित्र वस्त्र-प्रावधान में धन और शोभा की महत्ता नहीं, बल्कि समर्पण और संस्थागत सजावट के माध्यम से परमावश्यक पवित्रता और व्यवस्था का साक्षात्कार है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वाक्य पालना-यात्रा के दौरान आयोजना के भाग के रूप में दिया गया है जब इज़राइलियों ने मिस्त्र से निकलकर ईश्वर-निर्दिष्ट tabernacle (मंदिर-स्थापना) की संरचना बनानी शुरू की। यह भाग सुंदर सजावट, समान चढ़ावे और उपकरणों के शुद्ध धातु (सोना) से मढ़वाने की निर्देशिका को दर्शाता है, ताकि आराधना की जगह में पवित्रता और grandeur दोनों बनी रहें।
व्याख्यात्मक अवलोकन
2–3 उपयोगी क्रॉस-रेफरेंसे
- प्रभावशाली पूजा-संरचना में प्रकाश डालने वाले पुराने टिप्पणीकार कहते हैं कि विशिष्ट धातु चयन परमेश्वर-केन्द्रितता और सामुदायिक प्रतिबद्धता को दिखाते हैं। संकेत के तौर पर यह बताता है कि पवित्रता बाहरी सजावट से नहीं, बल्कि आंतरिक समर्पण से बनी रहती है। - अन्य संदर्भों में जैसे कि शास्त्र में आभूषण और उपकरणों की शुद्धता, आराधना के समय की पवित्रता और समाज से मूल्य-प्रत्यय का संकेत मिलता है।
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
अन्य संदर्भ के साथ संक्षिप्त व्याख्या
सम्बन्ध 1: प्रेरित-पथ के ऊपर की वस्तुएँ—आराधनास्थल की सजावट से जहां प्रायः भिन्न-भिन्न सामग्री का चयन किया गया, वहाँ समर्पण और क्रम की महत्ता दिखती है। यह बताता है कि पवित्रता एक समग्रता है जिसमें सामग्री, कार्य, और मन की स्थिति शामिल है।
सम्बन्ध 2: पवित्रता के लिए सरलीकरण नहीं, बल्कि उचित व्यवस्था और मानक का पालन आवश्यक है; इसलिए अन्य कार्यों में भी क्रमबद्धता और उच्च मानक बनाए रखना चाहिए।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम इस निर्देश से सीखते हैं कि परमेश्वर के समीपता का अनुभव तब गहरा होता है जब हमारी पूजा-स्थल और उपकरण एकदम सुव्यवस्थित, पवित्र और समर्पित होते हैं। यह बाहरी दिखावे से अधिक भी है—यह आंतरिक प्रतिबद्धता और समुदाय की एकजुटता का संकेत है।