Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 28:2 का अर्थ और संदर्भ
सीधे शब्दों में कहें तो यह वचन कहता है: परमेश्वर ने मूसा को कहा कि वे आराधना-कार्य के लिए अपने भाई हारून के लिए वैभव और शोभा के पूर्ण, पवित्र वस्त्र बनवाएं। इसका आशय परमेश्वर की उच्च महिमा और पवित्रता को संस्थापित करने के लिए दुलार-युक्त, सुनियोजित आभूषणों की आवश्यकता पर है जिससे पवित्र एजाज-सेवा सुचारु रूप से चल सके।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
निर्गमन की किताब मध्यपूर्व के प्रस्थान के समय की कथा से जुड़ी है, जब ईश्वर ने इस्राइल समुदाय के लिए विचित्र और समानांतर व्यवस्था दी। पवित्र वस्त्र वह संकेतक बनते हैं जिनसे आराधनाकर्ता के भीतर और बाहर दोनों जगह पवित्रता का आभास होता रहे। हारून को मूर्ति-पूजा के विरुद्ध उचित संकल्पना से जोड़ा गया है: वह दाहर और भक्त-रक्षक दोनों भूमिका निभाता है, अतः उसकी पोशाकें भी वही वजन और सम्मान दिखाती हैं जो पवित्रता और जिम्मेदारी को दर्शाती हैं।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
संबन्धित ग्रंथीय विचार
गौण cross-reference की रोशनी में देखें:
सारक विचार
संकेत-पदार्थ (cross-references) के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण
यहाँ दिए गए संदर्भ मूल पाठ से संकेत लेते हैं और बताते हैं कि पवित्रता का बाह्य प्रदर्शन कैसे आंतरिक आस्था के साथ जुड़ा रहता है:
- यशायाह 3:18-23: बाहरी वेश-भंगिमा और आंतरिक विश्वास के बीच अंतर्संबंध है; सत्य यह है कि आंतरिक शुद्धि ही वास्तविक शोभा है.
- 1 प्रस्तावना 4:12: बाहरी व्यवहार और आंतरिक परिवर्तन एक दूसरे के साथ आगे पीछे चलते हैं; पवित्रता से भरी गरिमा प्रकट होती है।
- जोश 6:4-7: मंत्र-वार्ता के साथ कर्तव्य की पूर्ति में बाह्य संकेतों का महत्व दर्शाते हैं।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारी सेवा-जीवन में यह संदेश मेल खाता है: परमेश्वर की आराधना में प्रयोजन स्पष्ट हो—शोभा उसे योग्य रूप से प्रस्तुत करें, परन्तु आंतरिक निष्ठा और दया-भरे जीवन से समर्थ हों।