Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 37:26 — मंदिर की वेदी का सोने से मढ़ना
स्थिति का तात्पर्य: यह पद पवित्र अलtar—सीमाओं में वेदी के निर्माण और उसे शुद्ध सोने से ढकने के निर्देश का भाग है। कुल मिलाकर यह सन्देश देता है कि परमेश्वर के लिए जो कुछ भी किया जाए, उसका मान-सम्मान और पवित्रता सर्वोपरि है; यह मूर्त वस्तुओं की भव्यता नहीं, बल्कि समर्पण की आस्था का प्रतीक है।
यह पाठ परमेश्वर और विश्वास के बारे में जो बताता है
किसी भी महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य के केन्द्र में परमेश्वर की महिमा और पवित्रता का सम्मान होता है। वेदी को शुद्ध सोने से मढ़ना दिखाता है कि पूजा में उत्कृष्टता और पूर्णता की इच्छा हमें परमेश्वर के सामने सबसे ऊँचे स्तर पर आकर खड़ा करती है। यह भी संकेत देता है कि परमेश्वर न केवल बाहरी औचित्य की परवाह करते हैं, बल्कि भीतर की आस्था और समर्पण की गुणवत्ता को भी मानते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टि
अन्य संबंधित उद्धरणीय पाठ
यह वेदी की पवित्रता और महिमा पर जोर देता है; अन्य से भी यह संगति दिखती है जिसमें मंदिर-सज्जा में उत्कृष्टता और आंतरिक पवित्रता का संतुलन रहता है (उद्धृत संदर्भ: अभिलेखों में परमेश्वर की महिमा के साथ समर्पण की वैबस्था दर्शाने वाले अन्य पाठ)।
देखें और समझें: क्रॉस-रेफरेंसेस
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर पूजा की कलात्मकता से अधिक मन की प्रामाणिकता और पवित्रता को मानते हैं।
आज के समय में अनुप्रयोग
हमारे लिए इसका संदेश यह है कि जो कुछ भी हम परमेश्वर के सामने रखते हैं, वह भीतर की आस्था और प्रतिबद्धता का प्रतिबिम्ब हो। यदि हम अपनी सेवा और आराधना में उत्कृष्टता और सच्चे दिल से समर्पण दिखाएं, तो यह परमेश्वर के साथ निकट संबंध को मजबूत करेगा। यह भी याद रखिए कि बाहरी शो-पीसा तब तक अधूरा है जब तक वह आंतरिक पवित्रता के साथ मेल नहीं खाता।
आखिर का समापन
निर्गमन 37:26 संदेश देता है कि पवित्रता और grandeur एक साथ संगति में रह सकती है—परमेश्वर की महिमा के अनुरूप किए गए हर कार्य में, हमें सर्वोच्च औचित्य और दिल की साफ-सफाई को प्राथमिकता देनी चाहिए।
नोट: इस हरित पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के सार्वजनिक-domain विचारों से सहज समाकलन किया गया है; उनके संक्षिप्त ठोस विचार पाठ के प्रवाह में एक सारगर्भित पंक्ति के रूप में जोड़े गए हैं।