Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 39:1 निर्गमन 39:2 निर्गमन 39:3 निर्गमन 39:4 निर्गमन 39:5 निर्गमन 39:6 निर्गमन 39:7 निर्गमन 39:8 निर्गमन 39:9 निर्गमन 39:10 निर्गमन 39:11 निर्गमन 39:12 निर्गमन 39:13 निर्गमन 39:14 निर्गमन 39:15 निर्गमन 39:16 निर्गमन 39:17 निर्गमन 39:18 निर्गमन 39:19 निर्गमन 39:20 निर्गमन 39:21 निर्गमन 39:22 निर्गमन 39:23 निर्गमन 39:24 निर्गमन 39:25 निर्गमन 39:26 निर्गमन 39:27 निर्गमन 39:28 निर्गमन 39:29 निर्गमन 39:30 निर्गमन 39:31 निर्गमन 39:32 निर्गमन 39:33 निर्गमन 39:34 निर्गमन 39:35 निर्गमन 39:36 निर्गमन 39:37 निर्गमन 39:38 निर्गमन 39:39 निर्गमन 39:40 निर्गमन 39:41 निर्गमन 39:42 निर्गमन 39:43


परिचयात्मक अवलोकन
निर्गमन अध्याय 39 में भवन-निर्माण के निर्वाण-आचरण का विवरण है, जो ईश्वर की आज्ञाओं के अनुसार अराधना-काम में प्रयुक्त वस्त्रों और आभूषणों के निर्माण की प्रक्रियाओं को बनाता है। verse 39:18 विशेषकर उसी भाग का हिस्सा है जहाँ गढ़ी गई जंजीरों और अनुरूप बन्दनों की सुरक्षा और स्थिरता पर बल दिया गया है; यह दर्शाता है कि परमेश्वर के पवित्र भोजनों के साथ जुड़े औपचारिक उपाय कितने सावधानीपूर्वक बनाए गए थे। इस पाठ का लक्ष्य यह है कि हम जानें कि ईश्वर की महिमा के स्रोतप्रबन्ध किस प्रकार समुदाय के हर सदस्य के जीवन में संरक्षित रहते हैं।
पदे का पाठ और संदर्भ
यह पंक्ति बताती है कि “गूँथी हुई दोनों जंजीरों के दोनों बाकी सिरों को उन्होंने दोनों खानों में जड़ के, एपोद के सामने दोनों कंधों के बन्धनों पर लगाया।” यह विवरण उन औपचारिक बंधनों की यथार्थता दर्शाता है जिनसे पवित्रता और पहचान-संरक्षण सुनिश्चित किया गया। यह वही तंत्र है जो दायित्व, सेवा-संयम और पूजा-कार्य में क्रम बनाए रखता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस आयाम से हमें दो प्रमुख पाठ मिलते हैं:
पश्चात्ताप और तुलनात्मक संदर्भ
अन्यों अंगों में भी “आनुष्ठानिक वस्त्र” या “आभूषण” पर विभाजन-प्रावधान देखे जाते हैं, जैसे: - धार्मिक आचरण में संरचना का महत्त्व। - पवित्रता-अनुशासन का पालन।
उचित तुलनात्मक क्रॉस-रेफरेंस यह संकेत करते हैं कि पुराने नियम में वस्त्र-निर्माण और सजावट का क्रम भी ईश्वर-आदेश के अनुरूप है, ताकि पूजा के समय मानवीय उपस्थिति को भी देवत्व के साथ जोड़ा जा सके।
निष्कर्षात्मक अनुप्रयोग
इस पाठ से सीख मिलती है कि जिन चीजों को पवित्र रखा गया है, उनके साथ भी आत्मिक अनुशासन और समन्वय आवश्यक है। आज के विश्वासी जीवन में इसका नैतिक मर्म यही है: हमारे सोच-विचार, नीयत और कर्म ईश्वर की दी हुई व्यवस्था में संतुलित हों। जैसे चरित्र के निर्माण में क्रम और नियंत्रण आवश्यक है, उसी प्रकार सेवा के क्षेत्र में भी बंधन-उद्धार और जिम्मेदारी को समान समरूपता के साथ निभाना चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनके उद्देश्य
कथन-गुणों के लिए तीन प्राकृत संदर्भ जो इस पाठ को गहराई देते हैं:
इन क्रॉस-रेफरेंसेज़ से स्पष्ट होता है कि पवित्रता, पहचान, और क्रम का संयोजन ईश-आदेशों के अनुरूप चलने का प्रेरक तत्त्व है।
संक्षेप
निर्गमन 39:18 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की सेवा में हर वस्तु और हर कर्म एक सुव्यवस्थित ढांचे के भीतर आते हैं। यह ढांचा मानव-हृदय में पवित्रता, निष्ठा और क्रम-बोध को विकसित करने के लिए प्रेरित करता है।
व्याख्या-संयोजन: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के सार्वजनिक-डायम्भ धारणों से मिली प्रेरणा एकीकृत कर प्रस्तुत है; इनमें से किसी भी पंक्ति का हूबहू उद्धरण नीचे दिए गए विराम-चिह्नों के भीतर केवल उद्धृत-तत्व के रूप में प्रयुक्त है. परन्तु मूल विचार हर जगह नए सContext में समाहित किया गया है।