Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
एज्रा 2:1 एज्रा 2:2 एज्रा 2:3 एज्रा 2:4 एज्रा 2:5 एज्रा 2:6 एज्रा 2:7 एज्रा 2:8 एज्रा 2:9 एज्रा 2:10 एज्रा 2:11 एज्रा 2:12 एज्रा 2:13 एज्रा 2:14 एज्रा 2:15 एज्रा 2:16 एज्रा 2:17 एज्रा 2:18 एज्रा 2:19 एज्रा 2:20 एज्रा 2:21 एज्रा 2:22 एज्रा 2:23 एज्रा 2:24 एज्रा 2:25 एज्रा 2:26 एज्रा 2:27 एज्रा 2:28 एज्रा 2:29 एज्रा 2:30 एज्रा 2:31 एज्रा 2:32 एज्रा 2:33 एज्रा 2:34 एज्रा 2:35 एज्रा 2:36 एज्रा 2:37 एज्रा 2:38 एज्रा 2:39 एज्रा 2:40 एज्रा 2:41 एज्रा 2:42 एज्रा 2:43 एज्रा 2:44 एज्रा 2:45 एज्रा 2:46 एज्रा 2:47 एज्रा 2:48 एज्रा 2:49 एज्रा 2:50 एज्रा 2:51 एज्रा 2:52 एज्रा 2:53 एज्रा 2:54 एज्रा 2:55 एज्रा 2:56 एज्रा 2:57 एज्रा 2:58 एज्रा 2:59 एज्रा 2:60 एज्रा 2:61 एज्रा 2:62 एज्रा 2:63 एज्रा 2:64 एज्रा 2:65 एज्रा 2:66 एज्रा 2:67 एज्रा 2:68 एज्रा 2:69 एज्रा 2:70


एज्रा 2:5 — आरह की सन्तान सात सौ पचहत्तर
मुख्य interpretive बिंदु: यह verse न सिर्फ एक सूची देता है, बल्कि यह परमेश्वर के अपने समुदाय को पुनः संगठित करने की योजना का भाग है। लौटे हुए यहूदी लोग परमेश्वर के चयनित समूह के सदस्य हैं, और उनकी संख्या बताती है कि वही जोheme का पुनर्निर्माण आरम्भ कर रहा है, वह प्रत्येक व्यक्ति की महत्ता को मान देता है। 775 का उल्लेख उन प्रविष्टियों में एक ठोस संख्या के रूप में है जो यह दर्शाती है कि परमेश्वर ने उत्साहपूर्वक उनके लौटने और मंदिर-कार्य के पुनरुद्धार के लिए आवश्यक आधार प्रदान किया।
पाठ-वाचन का साहित्यिक संदर्भ
यहाँ सूचीबद्ध आरह की सन्तान एक ऐसे पारिभाषिक समूह का प्रतिनिधित्व है जिसे लौटकर भागीदारी के लिए मौके दिए गए। एज्रा-नों में यह विवरण समुदाय के प्रशासनिक और धार्मिक पुनर्गठन के हिस्से के तौर पर प्रस्तुत किया गया है, ताकि यहूदियों के पूर्व-निर्धारण के अनुसार परमेश्वर के वादा-कार्य के अनुरूप एक संरचना बने। यह सूचियाँ प्रायः लौटे हुए राज्यों के निवासियों के रेकार्ड के रूप में दी जाती हैं; संख्या बताती है कि कितने लोग मंदिर-कार्य के लिए उपलब्ध थे और पुर्नस्थापना के लिए जिम्मेदार ठहराए गए थे।
धार्मिक-सार और सिद्धांत
इस verse के भीतर सबसे स्पष्ट विचार यह है कि परमेश्वर की योजना में हर व्यक्तित्व की भूमिका है। समुदाय बनाने के लिए केवल बड़ा समूह नहीं, बल्कि छोटे-छोटे समूहों की सहभागिता आवश्यक है। यह दर्शाता है कि आस्था और पवित्रता के कामों के लिए हर एक सदस्य की सहभागिता अनिवार्य है—चाहे संख्या कम हो या अधिक। परिणामस्वरूप, धार्मिक जीवन की पुनःस्थापना में एक सुव्यवस्थित और सम्मानित क्रम बनता है, जहां प्रत्येक सदस्य अपनी-अपनी भूमिका अदा करता है।
अन्य पवित्र शास्त्रीय सम्बन्ध
संदर्भ: ये क्रॉस-रेफरेंसेस बताती हैं कि पुनर्गठन में क्रम, स्मरण और समुदाय के एकीकरण के विचार एक साथ चलते हैं, ताकि हर सदस्य की सहभागिता से परमेश्वर का कार्यक्रम आगे बढ़े।
आत्मिक विचार (चिंतन के प्रश्न)
संक्षिप्त निष्कर्ष
एज्रा 2:5 यह स्मरण दिलाता है कि पुनःस्थापना के समय परमेश्वर हर एक सदस्य को एक जिम्मेदारी के साथ जोड़ता है। बड़ी तस्वीर में यह समुदाय के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया है—जहाँ संख्या चाहे कम हो या अधिक, हर व्यक्ति का भाग अनिवार्य है ताकि विश्वास, व्यवस्था और आराधना एक सम्मिलित रूप से आगे बढ़ें।
पौरुष उद्धरण (दलतः घोषणाएं)
नोट: नीचे प्रयुक्त Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण यदि उपलब्ध हों, लेकिन पाठ के संगीतमय संरचना के अनुरूप बिंदुवार संक्षेप में ही शामिल हैं:
“The number of families that returned, and the persons of those families, were preserved.”
“The returns of the people, small as they were, still signified a revival of religion.”
टकराव के रास्ते का संक्षेप
समुदाय-निर्माण में छोटे-छोटे भागीदारी प्रयास ही बड़े उद्देश्य को साकार करते हैं। यह verse स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के कार्यक्रम में हर लौटे व्यक्ति की गिनती होती है, ताकि मंदिर-कार्य और धार्मिक जीवन के पुनरुद्धार संगठित और स्थिर रहे।