एज्रा 2:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अदोनीकाम की सन्तान छः सौ छियासठ,

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एज्रा 2:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

एज्रा 2:13 पर टिप्पणी (HINIRV)

सीधे अर्थ की घोषणा: अदोनीकाम की सन्तान सैर्ं छह सौ छियासठ है। यह संख्या यह दर्शाती है कि लौटे हुओं की गणना और निवास के लिए आबादी निर्धारित की जा रही है, ताकि समुदाय की संरचना, संसाधन और विरासत स्पष्ट हो सके।

प्रासंगिक संदर्भ और पृष्ठभूमि

यहोशू के नेतृत्व में लौटकर बर्बոնի निर्वासन के बाद यहूदी समुदाय यरूशलेम और उसके आस-पास के क्षेत्रों में पुनर्स्थापित हो रहा था। एज्रा-नीत ग्रंथों में यह जनगणना पुराने वचन के सन्दर्भ में यहूदियों की धार्मिक-समाजिक जिम्मेदारियों की संदर्शक है—कहाँ किन्हीं परिवारों के प्रमुख, नाती-नाती और विभिन्न परिवारों की स्थिति की जानकारी दी जाती है ताकि पूजास्थल और दुनिया के नागरिक-कार्य सुचारु रूप से चल सके। इस आयाम में यह संख्या बताती है कि समुदाय की संरचना कैसे विकसित हो रही है।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • यह संख्या न केवल जनसंख्या है, बल्कि सामाजिक-धार्मिक व्यवस्था की एक सूचक है—कौन कहाँ बस रहा है, किन परिवारों का पुनर्संयोजन हुआ है, और कौन-कौन सेवाभार के लिये तैयार हैं।
  • परंपरागत रीति-रिवाज़ और मंदिर-प्रार्थना में भागीदारी के लिए उपयुक्त परिवारों और बिरादरी की गिनती जरूरी थी।
  • अन्य पदों के साथ तुलना करने पर यह संख्या समुदाय की विविधता और एकता दोनों को दिखाती है—जो लौटे हुए लोग एक नए आरम्भ के लिये योजना बनाते हैं।

कथात्मक स्रोतों से प्रेरित संकेत

एज्रा के और अध्यायों में लौटे हुओं की गिनती और भूमि-आवंटन का क्रम दोहराव का संकेत देता है कि परमेश्वर के अनुयायियों के बीच व्यवस्था कैसे बनती है। धर्मगुरुओं की सूची से यह स्पष्ट होता है कि हर जिलों में परिवारों के केन्द्र बने रहने चाहिये थे ताकि पूजास्थल का अनुशासन बना रहे।

छोटे थीमैटिक सूची

  • गणना एकता-निर्माण का साधन है;
  • परिवार और समाज की संरचना का प्रमाण है;
  • धार्मिक-यात्रा में भागीदारी की पहचान है।

संबद्ध पवित्र शास्त्र और संकेत

1) ताकीद-परक संदर्भ: यह प्रकार की गिनती जहां-जहां होती है, वहां समुदाय की निष्ठा और कर्तव्य स्पष्ट होते हैं—यद्वा पुनर्संशोधन और पूजास्थल की व्यवस्थाओं पर बल।

2) समकक्ष संदर्भ: इज़राइलियों की सत्ता-निर्धारण और बंटवारे के पहलुओं में संख्या का उल्लेख यह दर्शाता है कि हर परिवार के पास अपने हिस्से की जिम्मेदारी है।

3) प्रेरक उद्देश्य: समुदाय की नयी शुरुआत में एक दूसरे के साथ सहयोग और पारिवारिक-सम्पर्क बनाए रखना आवश्यक है।

क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेपार्थ)

• अन्य प्रवचनों में जनगणना और निवास-योजना से जुड़ी व्यवस्था का उल्लेख मिलता है—यहूदी समुदाय की संरचना में एकता और व्यवस्था के महत्त्व को उजागर करता है।

• पुराने-वचनों में निवास और पैतृक अधिकारों की पहचान भी मनुष्यों के समुदाय-सम्बन्धों के लिये आवश्यक मानती है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

यह संख्या हमें सीख देती है कि समुदाय के परिचालन के लिए स्पष्ट, व्यवस्थित गणना और पहचान जरूरी है ताकि साझा प्रयास सफल हों। व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ मिलकर ही एक नया आरम्भ स्थिर और दायित्वपूर्ण बन सकता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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अदोनीकाम की सन्तान छः सौ सड़सठ।

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