Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
एज्रा 8:1 एज्रा 8:2 एज्रा 8:3 एज्रा 8:4 एज्रा 8:5 एज्रा 8:6 एज्रा 8:7 एज्रा 8:8 एज्रा 8:9 एज्रा 8:10 एज्रा 8:11 एज्रा 8:12 एज्रा 8:13 एज्रा 8:14 एज्रा 8:15 एज्रा 8:16 एज्रा 8:17 एज्रा 8:18 एज्रा 8:19 एज्रा 8:20 एज्रा 8:21 एज्रा 8:22 एज्रा 8:23 एज्रा 8:24 एज्रा 8:25 एज्रा 8:26 एज्रा 8:27 एज्रा 8:28 एज्रा 8:29 एज्रा 8:30 एज्रा 8:31 एज्रा 8:32 एज्रा 8:33 एज्रा 8:34 एज्रा 8:35 एज्रा 8:36


एज्रा 8:13 — तत्काल संदर्भ और अर्थ
यह पद उन मंत्रियों और याजकों के समूह के पीछे पड़ने की स्थिति दिखाता है जो लौट रहे इस्राएली जन से अलग रहे थे। विशिष्ट नाम वही हैं जो लौटकर उन्नत धार्मिक प्रवास में भागीदारी नहीं कर पाए थे, तथा उनके साथ अस्थायी रूप से साठ पुरुष भी थे। यह दृश्य स्पष्ट करता है कि परमेश्वर का काम सीमाओं के भीतर होता है और हर हाल में His sovereign plan के अनुसार चलता है, चाहे कुछ लोग पीछे रह जाएँ।
ईश्वर और विश्वास का पाठ
इस पाठ से एक महत्वपूर्ण बात उभरती है: परमेश्वर अपने लोगों को लौटने और फिर से मंदिर–यात्रा में एकजुट होने के लिए प्रेरित करते हैं, और साथ ही यह दिखाते हैं कि असफलताओं के बावजूद भी उनकी योजना स्थिर रहती है। पीछे रहने वाले लोगों के बावजूद, लौटने वाले समुदाय में दया, कर्तव्य और एकता का महत्व बना रहता है। यह हमारे जीवन में भी स्मरण दिलाता है कि जो पीछे छूट जाते हैं, वे भी उच्च उद्देश्य के साथ जुड़ सकते हैं, बशर्ते वे पुनः लौटकर परमेश्वर के कल्याणकारी मार्ग पर चलें।
शब्दों के अर्थ और प्रतीक
अन्य प्रासंगिक पठन
– मत्ती मारिया मार्गदर्शन से जुड़ा संदेश: परमेश्वर अपने लोगों के साथ स्थिर रहता है भले ही कुछ पीछे रह जाएँ; पुनः प्रेरित होकर वह सक्रिय भागीदारी की पुकार देता है।
– बॉर्न्स/क्लार्क के टिप्पणियाँ: क्या पीछे रहने वाले लोगों के लिए भी स्थान है; क्या उनके आंतरिक परिवर्तन और ईश्वर-निर्णय में विश्वास की गति समझ में आती है?
– अन्य पदों में लौटने, फिर से मिलने और पवित्र कार्य में सहभागिता के संकेत मिलते हैं; यह एक समुदायिक ध्येय की तरफ नेतृत्व करते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षेप
• एज्रा 8:11–12 — लौटने की प्रक्रिया और आस्था के साथ पुनर्गठन का सार: विश्वास की यात्रा में हर सदस्य का योगदान গুরুত্বপূর্ণ है।
• न हुफे 9–10 के अध्याय — पौराणिक दोषों के बावजूद पुनरुत्थान और पवित्रता के लिए समुदाय-समन्वय।
• हबक्कुक 2:4 — विश्वास की पराकाष्ठाओं में एक विश्वसनीय जीवन-यात्रा की प्रेरणा।
आज के संदर्भ में उपयोगी अनुप्रयोग
1) समुदाय में सभी की भागीदारी: चाहे स्थिति कैसी भी हो, हर व्यक्ति का योगदान मूल्यवान है; कठिन समय में भी संयुक्त प्रयास से ही उसकी पुष्टि होती है।
2) प्रार्थना और मार्गदर्शन: पीछे रहने वाले भी अभी भी परमेश्वर की योजना के अंग हो सकते हैं; आत्म-परिवर्तन और विश्वास की गति बढ़ाने के लिए प्रार्थना ज़रूरी है।
3) एकता और व्यवस्था: सही क्रम में लौटना—आस्था, व्यवस्था, और सेवा—यह आज के चर्चावासियों के लिए मार्गदर्शक हो सकता है।
संक्षिप्त टिप्पणी
एज्रा 8:13 एक छोटे-से विवरण के भीतर भी बड़ी सीख देता है— परमेश्वर के योजना के भीतर विविध स्थिति के लोग हैं और उनका उचित समायोजन उसी समुदाय की संभावनाओं को बढ़ाता है। यह पाठ हमारे लिए यह स्मरण कराता है कि पुराने संबंधों का मूल्य सहजो बनाये रखना चाहिए और भविष्य की पुनर्निर्माण यात्रा के मिलजुलकर चलते रहने में ही सच्ची आस्था की पुष्टि है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (ऐतिहासिक टिप्पणीकारों से):
– मैथ्यू हेनरी से संक्षिप्त प्रकाशनित टिप्पणी का अभिग्रहण: “Faith always looks to the end of God’s work, even when men fail” (नोट: संक्षेप सार)।
– अलबर्ट बार्न्स से संबद्ध संकेत: “God orders His people gently, though some may linger behind” (नोट: संक्षेप सार)।
– एडम क्लार्क से मिलती-जुलती पंक्ति: “The remnant and the returning portion must walk in faith, though in number they be few” (नोट: संक्षेप सार).