Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
एज्रा 8:1 एज्रा 8:2 एज्रा 8:3 एज्रा 8:4 एज्रा 8:5 एज्रा 8:6 एज्रा 8:7 एज्रा 8:8 एज्रा 8:9 एज्रा 8:10 एज्रा 8:11 एज्रा 8:12 एज्रा 8:13 एज्रा 8:14 एज्रा 8:15 एज्रा 8:16 एज्रा 8:17 एज्रा 8:18 एज्रा 8:19 एज्रा 8:20 एज्रा 8:21 एज्रा 8:22 एज्रा 8:23 एज्रा 8:24 एज्रा 8:25 एज्रा 8:26 एज्रा 8:27 एज्रा 8:28 एज्रा 8:29 एज्रा 8:30 एज्रा 8:31 एज्रा 8:32 एज्रा 8:33 एज्रा 8:34 एज्रा 8:35 एज्रा 8:36



अर्थ का सीधा शब्दार्थ
एज्रा 8:25 में कहा गया है कि राजा और उसके मंत्रियों, हाकिमों और सभा के सब सदस्योंने भवन के लिए भेंट दी है, जिसे तौलकर उन्हें वापस दे दिया गया। इसका आशय है कि प्रजा ने परमेश्वर के भवन के लिए दान देकर संस्था-कार्य की आधिकारिक पूर्ति में भागीदारी की और यह दान-संरचना मानक और सुसंगत व्यवस्था के अनुसार सही माप से वितरित की गई।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद एक यस्तो समय का है जब यहूदी लौटकर यरुशलेम में मंदिर के पुनर्निर्माण के क्रम में थे। जल्लूक के बाद जब मंदिर की एकता और पूजा-कार्य प्रारम्भ हुआ, राजा और अधिकारियों ने यह दिखाया कि वे कट्टर नहीं बल्कि आध्यात्मिक और नम्र सहयोगी हैं। दान देना यहाँ संस्था की स्थिरता और ईश्वर के लिए समर्पण की पुष्टि है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटे थीमैटिक बिंदु
अनुचित उद्धरण-आधारित संदर्भ (Cross-references)
1) भूमि-स्वामित्व और निधि का प्रयोग: पुराने नियम में भी मंदिर के लिए दान-परिश्रम का उल्लेख मिलता है, जिससे यह प्रवृत्ति समुदाय-सम्बद्धता की परंपरा है।
2) नेतृत्व और सहभागी भूमिका: नेताओं का दान देना नेतृत्व के व्यक्तिगत धर्मीपन को प्रकट करता है; साथ ही दान-प्रक्रिया में पूरा समुदाय भाग लेता है।
3) मंदिर-कार्य की स्थिरता: मंदिर-महत्वपूर्ण कार्यों के लिए धन-सहायता से पूजाकाल की निरंतरता बनी रहती है।
संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष
आज के विश्वासियों के लिए यह पद उम्मीद देता है कि शास्त्र-संगत नेतृत्व और सामुदायिक भागीदारी मंदिर के कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में कितनी अहम् भूमिका निभाती है। एक सत्य-संरचना के रूप में, दान देना केवल वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक एकता और साझे उद्देश्यों की अभिव्यक्ति है।
उद्धृत शैली-स्वर
यह अनुभाग मौलिक भाषा में है; नीचेMatthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण संभवतः शामिल हैं, परन्तु पूर्ण पाठ नहीं।
हर उद्धरण के साथ, यदि मौजूद हो, केवल त्रुटिहीन संक्षेप दिया गया है ताकि पाठक मूल विचार समझ सकें:
“...” (अनुमानित सार) — Matthew Henry
“...” (अनुमानित सार) — Albert Barnes
“...” (अनुमानित सार) — Adam Clarke