Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50Verse
उत्पत्ति 17:1 उत्पत्ति 17:2 उत्पत्ति 17:3 उत्पत्ति 17:4 उत्पत्ति 17:5 उत्पत्ति 17:6 उत्पत्ति 17:7 उत्पत्ति 17:8 उत्पत्ति 17:9 उत्पत्ति 17:10 उत्पत्ति 17:11 उत्पत्ति 17:12 उत्पत्ति 17:13 उत्पत्ति 17:14 उत्पत्ति 17:15 उत्पत्ति 17:16 उत्पत्ति 17:17 उत्पत्ति 17:18 उत्पत्ति 17:19 उत्पत्ति 17:20 उत्पत्ति 17:21 उत्पत्ति 17:22 उत्पत्ति 17:23 उत्पत्ति 17:24 उत्पत्ति 17:25 उत्पत्ति 17:26 उत्पत्ति 17:27



उत्पत्ति 17:17 का महत्व और संदर्भ
यह verses महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अविश्वसनीय पन्नों में भी ईश्वर के वादों की स्पष्टता दिखाता है। अभी तक एब्राहम के साथ परमेश्वर ने वादा किया था कि उसका वंश_REV होगा, परन्तु उनकी शारीरिक अवस्था और मानव-सीमा के कारण आकाशीय योजना की संभावना पर सहज संदेह उठ खड़ा होता है। इस आयु में पुत्र की कल्पना एक बड़ी बाधा लगती है, परन्तु यह आयत ईश्वर के वचन की शक्ति की और संकेत करती है कि ईश्वर के वचन समय-सीमा नहीं देखते। हंसी और संदेह के बीच भी ईश्वर अपने उद्देश्य को पूरा करने की तैयारी में रहता है।
परिप्रेक्ष्य और मूल संदेश
उत्पत्ति 17 अध्याय में परमेश्वर ने अब्राहम से अपने पुत्र के नामकरण, वचनों के अनुरोध और चिह्न-स्वीकृतियों के बारे में बात की। 17:17 में अब्राहम ने मुँह के बल गिरकर हँसा और मन ही मन विचार किया कि क्या एक सौ वर्ष के व्यक्ति की संतान संभव है। यह प्रतिक्रिया मानव संदेह को दर्शाती है, पर ईश्वर का उत्तर और भविष्यवाणी इस संदेह से आगे बढ़कर आता है—ईश्वर के वचनों में निश्चय और संयम है। यह आयत बताती है कि ईश्वर कभी भी हमारे मानवीय सीमाओं को नहीं मानता; वह हमारे असंभव को भी संभव बना सकता है।
मुख्य विचार
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
यहाँ कुछ संबंधी आयतें जो इस विचार को मजबूत करती हैं:
पूर्वपूरी टिप्पणी से संकेत
हेल्लेमी पंक्तियों में Matthew Henry, Albert Barnes तथा Adam Clarke की दृष्टि स्पष्ट मिलती है: वे दिखाते हैं कि मानव-विश्वास की भंगुरता के बावजूद ईश्वर के वादे अचल रहते हैं; उनका आकलन यह है कि आत्म-विश्वास और पवित्रता के रास्ते पर चलना ही परमेश्वर के साथ गहरा सम्बन्ध स्थापित करता है। यदि कोई शब्द-युक्त व्याकुलता हो, तो भी ईश्वर की योजना अविचल रहती है।
अनुवादक-धारणा और पाठ-प्रेरणा
यहाँ HINIRV जैसी हिंदी संवेदनशील पंक्तियाँ हमें बताती हैं कि परमेश्वर अपने वचनों की शक्ति से ही इतिहास को दिशा देता है। अगर हम भी मंज़ूर हों, तो हमारा विश्वास भी उसी दिशा में विकसित होता है जो ईश्वर ने निर्धारित की है।
DEVOTIONAL विचार
हर कठिन परिस्थिति जो हमें असमंजस में डालती है, उसे ईश्वर के वचन की रोशनी में देखें। वह व्यक्ति जो उम्र के पार भी संतान का वादा रखने के लिए तैयार है, वह हमारे हर स्वयं-निर्मित बाधाओं को भी कम कर सकता है। आज की स्थिति में यदि आप किसी लक्ष्य पर संदेह करें, तो स्मरण रखें: ईश्वर के वचन में शक्ति है; वह हमारे हृदय से संदेह हटा सकता है और पुरानी आशा को नवीन आशा में बदल सकता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
उत्पत्ति 17:17 हमें सिखाता है कि ईश्वर के वचन पर विश्वास मानव अनुभव से ऊपर है। हाँ, हमारी प्रतिक्रियाएं प्राकृतिक हैं, पर परमेश्वर अपने वादों को पूरा करने के लिए प्रियजन के रूप में काम करता है। जैसे-जैसे आप अपने जीवन में विश्वास के स्तम्भ स्थापित करें, वैसे-वैसे ईश्वर की संपूर्ण योजना आपके सामर्थ्य के अनुरूप खुलती है।