उत्पत्ति 30:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए उसने यह कहकर उसका नाम यूसुफ रखा, “परमेश्‍वर मुझे एक पुत्र और भी देगा।”

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उत्पत्ति 30:24 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 30:24 पर टिप्पणी

आख्यान का तात्कालिक सेटिंग

उत्पत्ति अध्याय 30 में याकूब के परिवारिक जीवन की कठिनाइयों और उसके पुत्रों के जन्म-जन्म से उत्पन्न जिरह-सेतु का वर्णन है। इसVERSE में सेवा-सम्बन्धी घटनाओं के बीच रवीन्द्र-सीधी संतान-प्राप्ति की आशा अंकित है। यह पाठ बताता है कि परमेश्वर के आशीर्वाद और दया से परिवार-जीवन में परिवर्तन आ सकता है, जब लोग विश्वास और धैर्यपूर्वक उसकी योजनाओं पर निर्भर रहते हैं।

पाठ से परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या साफ़ होता है

यह वचन बताता है कि परमेश्वर किसी की परिस्थिति से अनजान नहीं है और वह हमें एक‑एक कर के आशीर्वाद देता है, भले ही रास्ते कठिन क्यों न हों। याकूब द्वारा बेटियों के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर के उचित समय पर पुत्र-प्राप्ति की आशा का चित्रण है। परमेश्वर यहाँ पुत्र के रूप में यूसुफ के जन्म से पहले ही भविष्यवाणी नहीं करता, बल्कि जीवन के हर चरण में उसकी योजना में विश्वास रखने को प्रेरित करता है।

आयातित शब्दों व रूपकों की स्पष्टता

  • —यह नाम बताता है कि परमेश्वर ने उन्हें एक और पुत्र दिया, जीवन-यात्रा में नया उद्देश्य।
  • —आशा की घोषणा है कि ईश्वर अभी-अभी आगे के आशीर्वाद के संकेत दे रहा है; यह परिवार के लिए नई दिशा की अभिव्यक्ति है।

संबद्ध गवाही-उद्धृतियाँ (Cross-references)

1) भूमि-आशीष और पुत्र-प्राप्ति के संकेत: पुराने नियम के अन्य भागों में भी ईश्वर के दयालु आशीर्वाद का स्थायी महत्व दिखता है।

2) विश्वास और समय: कई उदाहरणों में परमेश्वर ने देर से आशीष दी है, जिससे विश्वास की परीक्षा और भविष्य की आशा बढ़ती है।

3) परिवार में प्रभु-योजनाओं का उद्देश्य: परमेश्वर परिवार के भीतर हर सदस्य के लिए योजना बनाता है, भले ही मानव दृष्टि से स्थिति कठिन क्यों न हो।

आज के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग

- कठिन समय में भी परमेश्वर की वाणी पर विश्वास बनाए रखें; वह हमारे जीवन के हर चरण में आशीर्वाद के रास्ते खोल सकता है।

- परिवार में बद[[संबंधों को]] मजबूत रखें, क्योंकि परमेश्वर परिवार-जीवन के हर हिस्से को इकचित तरीके से समन्वित करता है।

- प्रभु की योजना पर आशा रखें, भले ही भागीदारी सीमित लगे; उसकी योजनाएँ समय के साथ स्पष्ट होती हैं।

निष्कर्ष

यूसुफ के जन्म की दिशा में यह वचन यह संकेत देता है कि परमेश्वर जीवन के हर मोड़ पर नई आशाओं और आशीषों के द्वार खोलता है। यह हमारे विश्वास को प्रेरित करता है कि देवता के समय का भरोसा किया जाए और धैर्य से उसकी योजना को मानना चाहिए।

सूचना: यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes आदि से उद्धृत संक्षिप्त विचार चाहते हों, तो वे पंक्तियाँ यहाँ समाहित की जा सकती हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 30:24 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और राहेल के पुत्र ये थे; अर्थात् यूसुफ, और बिन्यामीन।

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यूसुफ बलवन्त लता की एक शाखा है, वह सोते के पास लगी हुई फलवन्त लता की एक शाखा है; उसकी डालियाँ दीवार पर से चढ़कर फैल जाती हैं।

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और याकूब के वंश का वृत्तान्त यह है: यूसुफ सत्रह वर्ष का होकर अपने भाइयों के संग भेड़-बकरियों को चराता था; और वह लड़का अपने पिता की पत्‍नी बिल्हा, और जिल्पा के पुत्रों के संग रहा करता था; और उनकी बुराइयों का समाचार अपने पिता के पास पहुँचाया करता था।

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