Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 4:1 यूहन्ना 4:2 यूहन्ना 4:3 यूहन्ना 4:4 यूहन्ना 4:5 यूहन्ना 4:6 यूहन्ना 4:7 यूहन्ना 4:8 यूहन्ना 4:9 यूहन्ना 4:10 यूहन्ना 4:11 यूहन्ना 4:12 यूहन्ना 4:13 यूहन्ना 4:14 यूहन्ना 4:15 यूहन्ना 4:16 यूहन्ना 4:17 यूहन्ना 4:18 यूहन्ना 4:19 यूहन्ना 4:20 यूहन्ना 4:21 यूहन्ना 4:22 यूहन्ना 4:23 यूहन्ना 4:24 यूहन्ना 4:25 यूहन्ना 4:26 यूहन्ना 4:27 यूहन्ना 4:28 यूहन्ना 4:29 यूहन्ना 4:30 यूहन्ना 4:31 यूहन्ना 4:32 यूहन्ना 4:33 यूहन्ना 4:34 यूहन्ना 4:35 यूहन्ना 4:36 यूहन्ना 4:37 यूहन्ना 4:38 यूहन्ना 4:39 यूहन्ना 4:40 यूहन्ना 4:41 यूहन्ना 4:42 यूहन्ना 4:43 यूहन्ना 4:44 यूहन्ना 4:45 यूहन्ना 4:46 यूहन्ना 4:47 यूहन्ना 4:48 यूहन्ना 4:49 यूहन्ना 4:50 यूहन्ना 4:51 यूहन्ना 4:52 यूहन्ना 4:53 यूहन्ना 4:54


यूहन्ना 4:11 पर टिप्पणी — जल के अद्भुत आयाम
इस Verse की पृष्ठभूमि में यीशु़ के साथ सामरी स्त्री का सम्वाद है, जहां वह जल के सीधा भंडार से मिलने वाले भौतिक तुष्टिकरण से आगे की बात कराती है। कुएँ के गहरेपन और जल भरने के कर्म के परिप्रेक्ष्य में, स्त्री ने जल की भौतिकता से अधिक-धिक चेतना दिखाई कि किसी से भी यह उपयोगी जल नहीं मिल रहा है, परन्तु Jesus ने उससे जीवन के जल की बात की। यह एक तुलनात्मक स्पर्श है जिससे दिखता है कि यीशु शारीरिक जल से अधिक गूढ़ आत्मिक जल प्रदान करते हैं।
मुख्य अर्थ
यह शृंखला यह संकेत करती है कि परमेश्वर का जल वह है जिसे किसी परिश्रम के बावजूद पाया जा सकता है; जो अनुभवों से मिलता है वही शारीरिक जल है, परन्तु यीशु का प्रेरित किया गया जीवन-जल दिव्य आत्मा है जो मनुष्य के भीतर से बहता है। स्त्री ने शुरुआत में भौतिक जल के बारे में पूछा, परन्तु यीशु ने उसे आत्मिक ताप और जीवन के स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया।
दो-तीन प्रमुख विषय
अन्य पाठ (Cross-references)
1) युह 7:37-39 — जीवन का जल की यह प्रतिशोधी घोषणा समर्थक रूप से आत्मा में परिणत होती है जब विश्वास के साथ यीशु मसीह पर निर्भर होता है।
2) युह 3:5 — जन्म के समय से ही जल और पवित्र आत्मा के द्वारा नया जन्म की आवश्यकता का उल्लेख; जो नीचे-वाले जल से ऊपर तक नया जीवन देता है।
3) रोम 6:4 — एक नया जीवन जो बपतिस्मा के साथ नहीं केवल बाहरी कर्म, बल्कि मसीह के साथ मरण और पुनर्जीवन के साथ जुड़ा है।
व्यावहारिक चिंतन
अगर हम भी अपनी प्यास को सच में एक सांस में समझना चाहें, तो हमें यह देखना होगा कि भौतिक जल से जो तृप्ति मिलती है, वह क्षणिक है। जीवन-जल की खोज हमारे भीतर विश्वास की सक्रियता से जुड़ी है—यानी परमेश्वर की उपस्थिति में सच्चा प्यास बुझाने की यात्रा। इस दिनचर्या में प्रत्यक्ष अनुभाव के साथ प्रश्न उठे: क्या हम अपने दैनिक जीवन में परमेश्वर के आत्मा को आमंत्रित कर रहे हैं ताकि वह हमारे भीतर स्थायी संतुष्टि दे?
संक्षिप्त समापन
स्त्री के सवाल में एक दिव्य संकेत है: जीवन का जल तभी सच में मिलने लगता है जब हम वास्तविक प्यास से स्वीकार करते हैं कि आत्मा के स्रोत के अलावा और कुछ भी स्थायित्व नहीं रखता। यीशु यह दिखाते हैं कि भौतिक जल तो केवल प्यास बुझाता है, परन्तु ईश्वर की आवाज से लौटता जीवन-जल अंततः हमारे जीवन को उद्धार, शांति, और नई प्रवृत्ति देता है।
टिप्पणीकारों के संकुल विचार
इस पाठ के लिए मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और अडम् क्लार्क के पाठ-घटकों की परम्परा में यहाँ एक संयोजन उभरता है: भौतिक जल बनाम आत्मिक जल का विवेचन, और शिष्य के रूप में विश्वास की प्रक्रिया का उद्घाटन। उपलब्ध उद्धरणों के अनुसार, ये commentators इस बात को स्पष्ट करते हैं कि आत्मा-जल का अर्थ है व्यवहार में परिवर्तन और ईश्वर-व्यक्ति के बीच स्थिर सम्बंध।
नोट: नीचे दिये गए तीनों विद्वानों के संभव संक्षिप्त उद्धरण मिलते हैं:
“वह जो संतुष्टि केवल जल से है, वह स्थाई नहीं; आत्मा का जल भीतर से बहता है।” (सूत्र संदर्भ संदिग्ध)