Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 4:1 यूहन्ना 4:2 यूहन्ना 4:3 यूहन्ना 4:4 यूहन्ना 4:5 यूहन्ना 4:6 यूहन्ना 4:7 यूहन्ना 4:8 यूहन्ना 4:9 यूहन्ना 4:10 यूहन्ना 4:11 यूहन्ना 4:12 यूहन्ना 4:13 यूहन्ना 4:14 यूहन्ना 4:15 यूहन्ना 4:16 यूहन्ना 4:17 यूहन्ना 4:18 यूहन्ना 4:19 यूहन्ना 4:20 यूहन्ना 4:21 यूहन्ना 4:22 यूहन्ना 4:23 यूहन्ना 4:24 यूहन्ना 4:25 यूहन्ना 4:26 यूहन्ना 4:27 यूहन्ना 4:28 यूहन्ना 4:29 यूहन्ना 4:30 यूहन्ना 4:31 यूहन्ना 4:32 यूहन्ना 4:33 यूहन्ना 4:34 यूहन्ना 4:35 यूहन्ना 4:36 यूहन्ना 4:37 यूहन्ना 4:38 यूहन्ना 4:39 यूहन्ना 4:40 यूहन्ना 4:41 यूहन्ना 4:42 यूहन्ना 4:43 यूहन्ना 4:44 यूहन्ना 4:45 यूहन्ना 4:46 यूहन्ना 4:47 यूहन्ना 4:48 यूहन्ना 4:49 यूहन्ना 4:50 यूहन्ना 4:51 यूहन्ना 4:52 यूहन्ना 4:53 यूहन्ना 4:54


यूहन्ना 4:27 पर टिप्पणी: “स्त्री से बातें कर रहा है” – क्यों यह मायने रखता है
यह वाकया इस पूरे अध्याय के केंद्रभिन्न दृश्य को एक साथ जोड़ता है। यीशु का समकालीन सामाजिक क्रम में एक विद्वान-पुरुष और एक Samaritani स्त्री के बीच संवाद तो सामान्य नहीं लगता, पर यह दृश्य प्रिय और चमत्कारिक यह दर्शाता है कि वह हर प्रकार के व्यक्ति के लिए खुला है—भले ही समाज के मानदंड उसे अलग-थलग कर दें। यहाँ चेलों को अचानक आकर आश्चर्य होता है कि यीशु स्त्री से क्यों और कैसे बात कर रहा है; उन्होंने यह नहीं पूछा कि “तू क्या चाहता है?” या “किस लिये उससे बातें करता है?”—जो उनके लिये सामान्य नियम बनते थे। यह असहज स्थिति हमारी भी मानवीय प्रतिक्रियाओं को उजागर करती है: स्वाभाविक ढंग से हर किसी को पूछना चाहिए कि दूसरों के जीवन में परमेश्वर का वास कैसे है, और क्या प्रेम से व्यवहार किया जा रहा है।
यही मूल संदर्भ क्या कहता है?
यह दृश्य यह दिखाता है कि ईश्वर का संदेश और उसकी करुणा सीमाओं से ऊपर है। यीशु यात्रा कर रहा है और बwiąकाईयों में से एक यहाँ है—सम्भव है कि चेलों ने माना कि आध्यात्मिक चर्चा और धार्मिक चर्चाएँ केवल आरामदेह पुरुष-समुदाय के साथ हों। परन्तु यूहन्ना 4:27 कहता है कि वे प्रश्न भी नहीं कर सके कि “तू क्या चाहता है?” या “किस लिये उससे बात करता है?”, क्योंकि वे अभी इस तथ्य को नहीं समझ पाए थे कि परमेश्वर का संदेश सभी के लिए, अज्ञात और असामान्य स्थानों से भी आ सकता है।
मुख्य संदेश
1) सोची-समझी दूरी कट जाती है: यीशु Samaritan स्त्री से बात करके दिखाते हैं कि सामाजिक-धर्मभीरु बंधन भी उनकी טרस्लभ होती है।
2) चेतना की जड़ पूजा से जुड़ी है: Jesus का संवाद इशारा करता है कि भावनात्मक और आध्यात्मिक जरूरतें जो भी हों, उनका समाधान प्रेम और सच्चे ज्ञान में है।
3) प्रयोग और सीख: चेलों की चुप्पी एक सीख है—हम किन परिस्थितियों में रोके जाते हैं और कब हमें अवसर मिलते हैं कि हम संवाद से दिव्य प्रकाश साझा करें?
कई धार्मिक थीम्स से सम्बन्ध
Cross-references (संक्षिप्त संकेत और संदर्भ व्याख्या)
1) मत 28-29: यीशु की बात-चीत की प्रकृति परिवर्तनशील सामाजिक स्थिति के बावजूद प्रेम का मार्ग खोलती है; यह दर्शाता है कि ईश्वर का साक्ष्य सभी के लिए है।
2) यूहन्ना 3:5-7: आत्मा से जन्म लेना आवश्यक है; यहाँ पानी के साथ आत्मिक परिवर्तन की दिशा मिलती है—स्वर्गीय जीवनagar की चाह।
3) रोम 10:14-15: संदेश पहुँचाने की महत्ता; यह भी बताता है कि चर्च, प्रेरित और प्रचारक एक साथ मिलकर सम्प्रेषण को तेज करते हैं।
व्यावहारिक देवotional विचार
जब हम सामाजिक बाधाओं को बढ़ाते हैं, तब भी प्रेम और सच्चाई के साथ संवाद करना चाहिए। यह verses हमें सिखाते हैं कि प्रभु के नम में किसी से दूरी बनाकर नहीं भागना चाहिए, बल्कि हर एक के जीवन में प्रभु की कृपा को लाने का अवसर बनना चाहिए। अपने आसपास के लोगों के साथ ईश्वर का संदेश साझा करें—चाहे वे किन्हीं कारणों से हमारे सांस्कृतिक मानदंडों से बाहर क्यों न हों।
छोटी किंतु सार्थक बिंदु
नोट: इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; नीचे दी गई पंक्तियाँ उनके विचारों के सामान्य प्रभाव को समाहित करती हैं। यह commentary प्रकृति में संगत है और सार्वभौम पवित्रशास्त्र के संदर्भ में एकीकृत विश्लेषण देता है।
अनुच्छेद-उद्धरण: “यही दृश्य बताता है कि प्रेम और सच के संदेश के लिए सामाजिक बाधाओं से ऊपर उठना चाहिए।”