यूहन्ना 4:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यीशु ने उससे कहा, “जा, अपने पति को यहाँ बुला ला।”

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यूहन्ना 4:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

यूहन्ना 4:16 पर टिप्पणी: “जा, अपने पति को यहाँ बुला ला” का अर्थ

सीधे शब्दों में कहें तो यीशु ने आत्मीय बातचीत में महिला से कहा—उसके जीवन के निजी संदिग्ध सत्य को उजागर करते हुए—क्या वह अपने पति को बुलवाए। इस उपदेश का भाव यह है कि परमेश्वर के सामने सत्य और सच्चाई ही हमारी प्राथमिकी बनती है; और यदि हम अपने वास्तविक स्थिति को स्वीकार करें, तो ईश्वर उसकी कृपा से पथ प्रदर्शित कर सकता है।

पृष्ठभूमಿ और संदर्भ

यह संवाद संदर्भ है Samaritan woman at the well (यूहन्ना 4) का, जहाँ यीशु पानी के कुँए पर सामरी स्त्री से मिलने जाते हैं। यह सामाजिक सीमा-पंक्तियों के पार पहुँचने का उदाहरण है—यहोवा प्रेम सभी के लिए है, चाहे उनकी जाति, लैंगिक स्थिति या सामाजिक माना गया अघोष हो। इस क्षण में यीशु ने स्त्री के निजी जीवन की गहराईयों को छूते हुए उसकी सचेतना जगाई।

गहरी विवेचना

- यहाँ का सवाल “पति” के सामने रखना एक प्रतीक है—हमारी आत्म-सत्यता का परीक्षण। यीशु से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर के यहाँ सत्य और खुलापन अधिक महत्त्वपूर्ण हैं, भले ही सामाजिक और नैतिक मान्यताएँ कैसे भी हों।

- यह भी संकेत देता है कि ईश्वर की दृष्टि में हमारे सच्चे बंधन हमारे आंतरिक जीवन से जुड़े होते हैं, न कि केवल दिखाई देने वाले व्यवहार से।

- स्त्री का उत्तर, और उसका अन्वेषण—इसमें भीतर नए जीवन के संकेत छुपे होते हैं: सच स्वीकारना, पन्ने पलटना, और आशीष की दिशा में बढ़ना।

संश्लिष्ट निष्कर्ष (Themes)

अनुकूलित cross-references

- યेशु का अन्य स्थानों पर सच्चाई से बोलना: जीवन का स्रोत बनना—अनजाने में भी व्यक्ति परिवर्तन के अवसर पाता है।

- विश्‍वास और भेदभाव से ऊपर: सभ्यता से परे प्रेम के एजेंडे की पुष्टि।

- आत्म-स्वयं से सामना: विनम्रता और प्रत्याशा का संयोजन कैसे आंतरिक परिवर्तन लाता है।

उपयोगी दृष्टिकोण (व्यावहारिक takeaway)

1) परमेश्वर के सामने अपनी स्थिति इमानदारी से स्वीकारें; 2) ईश्वर की कृपा से परिवर्तन के संकेत बताते हैं कि जीवन में नया परिणाम संभव है; 3) दूसरों के प्रति सहिष्णु और सत्य के साथ संवाद करें, ताकि विश्वास बढ़े।

सूत्र-संदर्भ और मौलिक उद्धरण

इस पाठ के अध्ययन में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों से संचित विचार एकत्रित होते हैं ताकि एक समतुल्य, संतुलित व्याख्या बन सके।

नोट: नीचे दी गई स्पष्ट उद्धरण केवल उनके मौलिक शब्दों के संज्ञानात्मक संक्षेप हैं; पूर्ण वाक्य उद्धरण प्रख्यात पाठ्य में संलग्न है।

निष्कर्ष

यह वाक्य यीशु के संवाद की शैली—सत्य, करुणा, और गहराई से प्रेरित होकर मानवीय अनुभवों को नया जीवन देने की क्षमता को दर्शाता है। हम भी आत्म-स्वीकृति से आरम्भ कर, परमेश्वर की दिशा में विश्वास के कदम बढ़ाएँ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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उसने तीसरी बार उससे कहा, “हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझसे प्रीति रखता है?” पतरस उदास हुआ, कि उसने उसे तीसरी बार ऐसा कहा, “क्या तू मुझसे प्रीति रखता है?” और उससे कहा, “हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” यीशु ने उससे कहा, “मेरी भेड़ों को चरा।

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क्योंकि तू पाँच पति कर चुकी है, और जिसके पास तू अब है वह भी तेरा पति नहीं; यह तूने सच कहा है।”

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