Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 4:1 यूहन्ना 4:2 यूहन्ना 4:3 यूहन्ना 4:4 यूहन्ना 4:5 यूहन्ना 4:6 यूहन्ना 4:7 यूहन्ना 4:8 यूहन्ना 4:9 यूहन्ना 4:10 यूहन्ना 4:11 यूहन्ना 4:12 यूहन्ना 4:13 यूहन्ना 4:14 यूहन्ना 4:15 यूहन्ना 4:16 यूहन्ना 4:17 यूहन्ना 4:18 यूहन्ना 4:19 यूहन्ना 4:20 यूहन्ना 4:21 यूहन्ना 4:22 यूहन्ना 4:23 यूहन्ना 4:24 यूहन्ना 4:25 यूहन्ना 4:26 यूहन्ना 4:27 यूहन्ना 4:28 यूहन्ना 4:29 यूहन्ना 4:30 यूहन्ना 4:31 यूहन्ना 4:32 यूहन्ना 4:33 यूहन्ना 4:34 यूहन्ना 4:35 यूहन्ना 4:36 यूहन्ना 4:37 यूहन्ना 4:38 यूहन्ना 4:39 यूहन्ना 4:40 यूहन्ना 4:41 यूहन्ना 4:42 यूहन्ना 4:43 यूहन्ना 4:44 यूहन्ना 4:45 यूहन्ना 4:46 यूहन्ना 4:47 यूहन्ना 4:48 यूहन्ना 4:49 यूहन्ना 4:50 यूहन्ना 4:51 यूहन्ना 4:52 यूहन्ना 4:53 यूहन्ना 4:54



योगान्ना 4:34 — मेरा भोजन यह है कि अपने भेजनेवाले की इच्छा के अनुसार चलूँ और उसका काम पूरा करूँ
सीधे अर्थ का संक्षिप्त वक्तव्य
यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि उनकी वास्तविक भोजन वह काम है जो उनके पिता द्वारा भेजे गए हर काम को पूरा करना है—यानी परमेश्वर की इच्छा पूरी करना, उसकी योजनाओं के अनुसार जीवन बिताना और उद्धार के कार्यों को सम्पन्न करना।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वाक्य तब है जब यीशु सामरी स्त्री के साथ बातचीत के बीच अपना उद्देश्य स्पष्ट कर रहे हैं। भोजन का उद्देश्य यहाँ शारीरिक भूख से अधिक दिव्य उद्देश्य पर केंद्रित है—ईश्वर की इच्छा पूरी करना। इस दृढ़ मान्यताने उन्हें अपने आध्यात्मिक कार्यों को तीव्रता से किया है; वे संसार के लिए जीवन का संदेश सुनाते हैं और ऐसे समय में भी अपनी यात्रा के उद्देश्य को नहीं भूलते।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
रिक्ति-युक्त बिंदु (थीमस) — 2-3 प्रमुख विचार
अनुबंधित क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ-सम्बन्ध)
1) मत्ती 26:39—घंटों के बीच यीशु पिता की इच्छा के अनुरूप अपनी इच्छा को संयत करना सीखते हैं; यह क्रियात्मक अनुशासन दिखाता है कि गहरी भक्ति व्यक्तिगत आराम से ऊपर है।
2) योहन्ना 6:38—आते हुए जीवन का संदेश और पिता की इच्छा को पूरा करना; खाने की यह नई परिभाषा उद्धार के कार्यों से जुड़ी है।
3) फिलिप्पियों 2:8—कृतार्थ समर्पण और obedience का मॉडल, जहाँ यीशु ने दीनता और प्रतिबद्धता से जीवन बिताया।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हम अपने दैनिक जीवन में यह पहचानें कि हमारा असली भोजन क्या है—क्या हम परमेश्वर के उद्देश्य को अपने कामों, संबंधों और निर्णयों में प्रस्तुत करते हैं? हमेशा यह प्रश्न करें: क्या यह कदम पिता की इच्छा के अनुरूप है? उद्धार के कार्यों, प्रेम, और नैतिकता के क्षेत्रों में यह निर्देश आता है कि हमें भी अपने जीवन के मार्ग को उसी उद्देश्य की ओर मोड़ना चाहिए।
पूर्व-संदेश: चारित्रिक मार्गदर्शन
यह विचारMatthew Henry के प्रवर्तनशैली के प्रेरणा देता है कि सेवक के निष्ठा और समर्पण से जहां-जहां परमेश्वर के काम बढ़ते हैं, वहीं जीवन का वास्तविक आहार मिलता है। Albert Barnes और Adam Clarke के टिप्पणी-संदर्भों में भी यह विचार मिलता है कि ईश्वर की इच्छा पूरी करने का ध्येय व्यक्ति के सभी कर्मों को एक दिशात्मक आशीर्वाद देता है।
यही प्रतिबिंब हमें प्रस्तुत पाठ से प्रेरणा देता है कि समय-समय पर अपने निर्णयों को परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप जाँचें और अपने कार्यों में पूर्णता की चाह रखें, ताकि हमारा जीवन भी “भोजन” की तरह उद्धार के कार्यों को बनाए और बढ़ा सके।