Old Testament
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यूहन्ना 4:1 यूहन्ना 4:2 यूहन्ना 4:3 यूहन्ना 4:4 यूहन्ना 4:5 यूहन्ना 4:6 यूहन्ना 4:7 यूहन्ना 4:8 यूहन्ना 4:9 यूहन्ना 4:10 यूहन्ना 4:11 यूहन्ना 4:12 यूहन्ना 4:13 यूहन्ना 4:14 यूहन्ना 4:15 यूहन्ना 4:16 यूहन्ना 4:17 यूहन्ना 4:18 यूहन्ना 4:19 यूहन्ना 4:20 यूहन्ना 4:21 यूहन्ना 4:22 यूहन्ना 4:23 यूहन्ना 4:24 यूहन्ना 4:25 यूहन्ना 4:26 यूहन्ना 4:27 यूहन्ना 4:28 यूहन्ना 4:29 यूहन्ना 4:30 यूहन्ना 4:31 यूहन्ना 4:32 यूहन्ना 4:33 यूहन्ना 4:34 यूहन्ना 4:35 यूहन्ना 4:36 यूहन्ना 4:37 यूहन्ना 4:38 यूहन्ना 4:39 यूहन्ना 4:40 यूहन्ना 4:41 यूहन्ना 4:42 यूहन्ना 4:43 यूहन्ना 4:44 यूहन्ना 4:45 यूहन्ना 4:46 यूहन्ना 4:47 यूहन्ना 4:48 यूहन्ना 4:49 यूहन्ना 4:50 यूहन्ना 4:51 यूहन्ना 4:52 यूहन्ना 4:53 यूहन्ना 4:54



यूहन्ना 4:23 का पाठ-संदर्भ और उसकी व्याख्या
परन्तु वह समय आता है, वरन् अब भी है, जिसमें सच्चे भक्त पिता परमेश्वर की आराधना आत्मा और सच्चाई से करेंगे, क्योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही आराधकों को ढूँढ़ता है।
प्यारे पाठ की प्रारम्भिक स्थिति
यह वही प्रसंग है जहाँ यीशु समोर-समक्ष एक स्त्री से सामरी नगर के बारे में चर्चा कर रहे हैं और वह उसे सही आराधना के स्थान के पीछे के महत्त्व को समझाते हैं। आराधना का स्थान भले ही एक पहचाने जाने वाले भू-भाग से जुड़ा हो, पर वास्तविक परमात्मा से आराधना अब भी दिल और सत्य के मेल से होती है। यह संदेश यह स्पष्ट कर देता है कि आराधना में समय और स्थान से अधिक, आंतरिक हालत और उद्देश्य महत्त्वपूर्ण है।
देवता, विश्वास और आराधना की यह शिक्षा
क्योंकि पिता ऐसे ही आराधकों को ढूँढ़ता है—जो आत्मा से आराधना करें और सत्य के साथ स्वीकृति दें। परमेश्वर चैतन्य हो और उसकी निजता के अनुरूप आराधना होने के लिए मन की ईमानदारी चाहिए। इस वाक्य में परमेश्वर के साथ मानवीय श्रद्धा की शर्तें स्पष्ट हैं: आत्मा से, और परमेश्वर के सामने सत्य के साथ—यानी वास्तविकता, ईमानदारी, और विश्वास की स्पष्टता के साथ।
शब्दों की सरल व्याख्या
संबंधित आयतें
यह कथन अन्य समझ में भी प्रकाश डालता है:
पक्का-पहुंचने योग्य क्रॉस-रेफरेंस
1) रोम 8:26—आत्मा हमारे लिए मदद करता है जब हम आत्मा से आराधना कर रहे हों।
2) मत्ती 15:8–9—कहते हैं कि बाह्य रीति-रिवाज नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता परमेश्वर को आकर्षित करती है।
3) 1 यूहन्ना 3:24—परमेश्वर के साथ सहभागिता और विश्वास का प्रमाण जीवन-चर्या में दिखता है।
आज की प्रेरणा
यह वचन हमें एक स्पष्ट दिशा देता है: आराधना में स्थान या रीति से पहले आत्मा की गहराई और सत्य की प्रामाणिकता की जरूरत है। अपने दिनचर्या में ऐसी आराधना का अभ्यास करें जो: - ईमानदारी से परमेश्वर के सामने प्रस्तुत हो, - प्रेम, दया और विश्वास के साथ जीवन शैली को प्रस्तुत करे, - और परमेश्वर के वचनों और यीशु मसीह के शिक्षण के अनुरूप हो।
संक्षेप में, परमेश्वर अपने प्रकार के आराधकों को ढूँढ़ रहा है—जो आंतरिक संकल्प, सत्यप्रियता और ईश्वर-केन्द्रित जीवन से आराधना करें।
कथन के स्रोत के रूप में पारंगत टिप्पणीकारों के संकेतों को समेकित करते हुए, यह निष्कर्ष निकलता है कि आराधना का नया मानक आत्मा और सत्य का संगम है, जो प्रेषितों के अनुभव और प्रभु यीशु के उपदेशों के अनुरूप है।
नोट: नीचे उद्धृत प्रसिद्ध विचारों में से कुछ छोटे वाक्य जो सीधे उद्धृत हो सकते हैं—“आत्मा से आराधना” तथा “सत्य के साथ”—इनके मूल शब्द-रूप संदर्भित टिप्पणीकारों में छोटे-छोटे शब्द-समय के साथ प्रचलित रहे हैं।