Old Testament
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यूहन्ना 4:1 यूहन्ना 4:2 यूहन्ना 4:3 यूहन्ना 4:4 यूहन्ना 4:5 यूहन्ना 4:6 यूहन्ना 4:7 यूहन्ना 4:8 यूहन्ना 4:9 यूहन्ना 4:10 यूहन्ना 4:11 यूहन्ना 4:12 यूहन्ना 4:13 यूहन्ना 4:14 यूहन्ना 4:15 यूहन्ना 4:16 यूहन्ना 4:17 यूहन्ना 4:18 यूहन्ना 4:19 यूहन्ना 4:20 यूहन्ना 4:21 यूहन्ना 4:22 यूहन्ना 4:23 यूहन्ना 4:24 यूहन्ना 4:25 यूहन्ना 4:26 यूहन्ना 4:27 यूहन्ना 4:28 यूहन्ना 4:29 यूहन्ना 4:30 यूहन्ना 4:31 यूहन्ना 4:32 यूहन्ना 4:33 यूहन्ना 4:34 यूहन्ना 4:35 यूहन्ना 4:36 यूहन्ना 4:37 यूहन्ना 4:38 यूहन्ना 4:39 यूहन्ना 4:40 यूहन्ना 4:41 यूहन्ना 4:42 यूहन्ना 4:43 यूहन्ना 4:44 यूहन्ना 4:45 यूहन्ना 4:46 यूहन्ना 4:47 यूहन्ना 4:48 यूहन्ना 4:49 यूहन्ना 4:50 यूहन्ना 4:51 यूहन्ना 4:52 यूहन्ना 4:53 यूहन्ना 4:54



यूहीन्ना 4:13 — प्यास बुझाने का वास्तविक स्रोत
यह पाठ यूहन्ना 4 में samaritan महिला के साथ यीशु की बातचीत के दृश्य के भीतर आता है। यीशु ने जल के बारे में बात करते हुए कहा कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा, पर जो व्यक्ति उससे मिलने पाएगा वह जीवन का बदला-बदला जल पाएगा। इस संवाद का केंद्र पानी के भौतिक मैदान से ऊपर उठकर आध्यात्मिक सत्य की ओर मुड़ना है: परमेश्वर की कृपा से मिलने वाला जीवन-संतोष केवल वही जल है, जो आत्मा से जुड़कर हमारे भीतर जीवन डाल दे।
इसे देखने की कहानी: तुरंत सेटिंग
यह संदर्भ तब है जब यीशु अपने मार्ग पर जेरूसलम से उत्तर की तरफ जाते हुए जाक़ारे के कस्बे सिकरह (सामरिया) के निकट एक कुएँ पर resting थे। उसी समय एक सामरी महिला पानी लेने के लिए आई। यीशु ने उससेWI बात शुरू की, और यहाँ तक पहुँचे कि पानी के बजाय वह जीवन-संतोष के जल की चर्चा करते हैं।
पवित्र चेतना और विश्वास के बारे में जो दिखता है
पहचान: यीशु अपने शरीर के पानी से नहीं, बल्कि आत्मा से मिलने वाले जल का प्रस्ताव रखते हैं। यह_predicament_ बताता है कि परमेश्वर के साथ वास्तविक संबंध वही देता है जो शारीरिक प्यास से ऊपर उठकर मन के आंतरिक संतोष को भर दे। इस जल के पीने के तीन गूढ़ संकेत हैं: निरंतरता (यह प्यास कभी न बुझे), जीवन की परिवर्तनकारी शक्ति, और आत्मा के साथ न मिलने पर भी सतत प्रेरणा।
महत्वपूर्ण शब्दों और प्रतीकों की व्याख्या
अन्य प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के प्रेरक संकेत
मारथाएन Henry के विचार से, यह जल वह शक्ति है जो मन को परमेश्वर की उपस्थिति के साथ स्थिर करती है; Barnes इसे नवीनीकरण और आत्मा के कार्य के रूप में देखते हैं; Clarke इसे चेतावनी के रूप में प्रस्तुत करते हैं कि पृथ्वी-जल की शांति क्षणिक है, पर परमेश्वर का जल वह गंगा है जो स्थायी जीवन देता है।
सिद्धांतों के साथ सम्बन्धित क्रॉस-रेफरेंस
1) याकूब 4:8 — परमेश्वर के साथ समीप रहने पर हम पवित्र रहते हैं; आध्यात्मिक जल के लिए आस्थावान संबंध है।
2) रोम 6:4 — हम बपतिस्मा से जुड़कर मरे हुए हैं और नए जीवन में पैदा होते हैं; यह जीवन-जगत जल का प्रभाव है।
3) यूहन्ना 7:37-39 — पवित्र आत्मा के जल का वितरण, जो विश्वास रखने वालों में प्रवाहित होगा।
आज के समय में प्रयोग
- अपनी प्यास समझें: संतोष और शांति सिर्फ धन, स्थिति, या पुरुषार्थ से नहीं मिलती; यह केवल परमेश्वर के Presence से आती है।
- प्रतिदिन की दैनिक प्रार्थना में आत्मा-जल को मान्यता दें—यानी ईश्वर के साथ निजता-bond और भरोसे को बनाए रखना।
- दूसरों के साथ बकाया प्रेम और जीवन-बख्शी शक्ति फैलाने का प्रयास करें, ताकि उनके जीवन में भी वह जल प्रभाव कर सके।
संक्षेप: यूहन्ना 4:13 में यीशु एक आध्यात्मिक जल की बात करते हैं जो शारीरिक प्यास को नहीं, बल्कि ईश्वर के साथ जीवन-सम्पर्क को भरता है। यह ज्ञान, विश्वास, और जीवन-परिवर्तन का स्रोत है—जो हर उस व्यक्ति के लिए नये जीवन की शुरुआत कर सकता है जो उसे अपनाता है।
नोट: इस पंक्ति पर Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के तात्त्विक संकेताक्षर उपलब्ध हैं; उद्धरण के लिए नीचे उल्लेखित विवेक-रेखा देखिए:
संक्षिप्त उद्धरण संकेत (यदि मौजूद): "यीशु ने जल नहीं, बल्कि जीवन के जल की बात की" — सामान्यत: इन्हीं टिप्पणीकारों के समरूप विचारार्थ।