Old Testament
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न्यायियों 12:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यह देखकर कि तुम मुझे नहीं बचाते मैं अपने प्राणों को हथेली पर रखकर* अम्मोनियों के विरुद्ध चला, और यहोवा ने उनको मेरे हाथ में कर दिया; फिर तुम अब मुझसे लड़ने को क्यों चढ़ आए हो?”
न्यायियों 12:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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न्यायियों 12:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 19:5 (HINIRV) »
उसने अपने प्राण पर खेलकर उस पलिश्ती को मार डाला, और यहोवा ने समस्त इस्राएलियों की बड़ी जय कराई। इसे देखकर तू आनन्दित हुआ था; और तू दाऊद को अकारण मारकर निर्दोष के खून का पापी क्यों बने?”

1 शमूएल 28:21 (HINIRV) »
तब वह स्त्री शाऊल के पास गई, और उसको अति व्याकुल देखकर उससे कहा, “सुन, तेरी दासी ने तो तेरी बात मानी; और मैंने अपने प्राण पर खेलकर तेरे वचनों को सुन लिया जो तूने मुझसे कहा।

अय्यूब 13:14 (HINIRV) »
मैं क्यों अपना माँस अपने दाँतों से चबाऊँ? और क्यों अपना प्राण हथेली पर रखूँ?
न्यायियों 12:3 पर तात्त्विक नज़र
सीधे तौर पर अर्थ: तब उम्दा लेखकाने कहा कि क्योंकि उन्हें भरोसा नहीं मिला कि ये लोग मुझे बचाएंगे, इसलिए मैं अपने प्राणों को हथेली पर रखते हुए अम्मोनियों के विरुद्ध चला; और यहोवा ने उन्हें मेरे हाथ में कर दिया; फिर तुम मुझसे लड़ने को क्यों चढ़ आए हो?
पृष्ठभूमि और संदर्भ
न्यायियों की पुस्तक में इजराइल के न्यायबंधनों की कमी और जातीय संघर्षों का दौर दिखता है। यह अध्याय मुख्यतः इजरायली नेताओं के आत्म-निर्भर दावे और परमेश्वर की सहायता पर निर्भर रहने की आवश्यकता को उजागर करता है। गैडन, ॥फूट के युद्ध के बाद, इज़राइल के विभिन्न समूह स्वयं की रक्षा के लिए उठा लेते हैं; परन्तु असल सुरक्षा परमेश्वर के वचन और सहायता पर निर्भर रहती है। इस पाठ में योशवा/गिदोन जैसे निर्णायक पलों की तरह, एक नेता अपने सैनिकों को भरोसे में लेकर आगे बढ़ता है, जबकि सैनिक आमने-सामने आने पर भी प्रभु के मार्गदर्शन पर टिके रहते हैं।
अन्वेषण (Interpretive observations)
मुख्य विचार (Themes)
अनुसार-अनुदेश (Cross-references)
1) अन्याय-समय में(User) दृढ़ता के लिए विचार: प्रतिबन्धित सुरक्षा के स्थान पर परमेश्वर की सहायता को प्राथमिक मानना।
2) नेतृत्व और विश्वास: एक नेता के साहस से समुदाय की धारणा प्रभावित होती है, परन्तु साहस का अंतिम स्रोत परमेश्वर ही है।
3) भय बनाम विश्वास: भय की स्थिति में भी विश्वास के मार्ग पर चलना चाहिए ताकि परमेश्वर की योजना पूरी हो सके।
संक्षेप निष्कर्ष
इस अध्याय में व्यक्ति की मानवीय धारणाओं के बीच परमेश्वर की सहायता की अपेक्षा स्थिर रहती है। किसी भी कदम से पहले परमेश्वर की पुष्टि और समुदाय की एकता आवश्यक है। हल्की-सी धारणाओं से सक्रिय कदम उठाने चाहिए, परन्तु वह कदम तब तक सुरक्षित नहीं माने जाते जब तक परमेश्वर को समर्पित विश्वास बना रहे।
छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष
कहने योग्य टिप्पणी: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि यहाँ साहस परमेश्वर के आशीर्वाद पर टिका है, न कि राजनीतिक लाभ पर। Henry ने कहा होगा कि दृढ़ निश्चय बिना परमेश्वर के हाथ से विजय नहीं मिलती, Barnes ने यह दिखाया है कि निस्संदेह विश्वास के साथ ही वास्तविक सुरक्षा मिलती है, और Clarke ने विस्तार से यह समझाने की कोशिश की होगी कि मानव-योजना से अधिक परमेश्वर की योजना सर्वोपरि रहती है।