Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 2:1 न्यायियों 2:2 न्यायियों 2:3 न्यायियों 2:4 न्यायियों 2:5 न्यायियों 2:6 न्यायियों 2:7 न्यायियों 2:8 न्यायियों 2:9 न्यायियों 2:10 न्यायियों 2:11 न्यायियों 2:12 न्यायियों 2:13 न्यायियों 2:14 न्यायियों 2:15 न्यायियों 2:16 न्यायियों 2:17 न्यायियों 2:18 न्यायियों 2:19 न्यायियों 2:20 न्यायियों 2:21 न्यायियों 2:22 न्यायियों 2:23



न्यायियों 2:4 का अर्थ संक्षेप
यह verse बताता है कि जब यहोवा के दूत ने इस्राएलियों से संदेश सुनाया, तब वे लोग चिल्ला-चिल्लाकर रो पड़े। यह घटना उनकी आत्मा-स्थिति और परमेश्वर के बुलावे के तल्खीपन को दर्शाती है: वह विश्वासघात के परिणामों को समझते थे और उनकी चीत्कार उनकी हृदयगत पीड़ा का प्रमाण बनती है।
पृष्ठभूमि
यहोवा ने इस्राएलियों से कहकर चेतावनी दी कि यदि वे अपने परमेश्वर को छोड़ेंगे तो शत्रु आकर उनसे लड़ेगे। दूत का संदेश उन पर स्पष्ट था: आज के फैसलों के अनुरूप परिणाम आते हैं। नीचे का समय इस नए सामंजस्य की कमी के कारण है, जब वे अपने पापों के कारण रोते थे और परमेश्वर के आशीर्वाद के टूटने की पीड़ा अनुभव करते थे।
व्याख्यात्मक बिंदु
मुख्य कथनात्मक विचार
इस verse में समुदाय का रोना यह संकेत देता है कि पाप की सजा से बहिरंग आघात होता है और सांसारिक उल्लास टूट कर एक सचेत अवस्था में बदल जाता है। यह सच्चे आत्म-नयाीकरण की शुरुआत भी हो सकती है, जब लोग परमेश्वर के पास लौटते हैं।
संदर्भित विचार (संक्षेप में)
यह एक सामान्य संकेत है कि जब ईश्वर के संदेश समझ में आता है, तो जन एक विशेष प्रकार का पश्चात्ताप दिखाते हैं। यह इतिहास के अन्य भागों में भी दिखता है कि चीत्कार और रोना, पाप की पहचान के साथ जुड़े हैं।
अन्य पाठ के साथ संबद्धता
– न्यायियों 2:6–10 में बहेर के समय की स्मृति और हालात का वर्णन है, जहाँ पलायन और पाप के कारण पीड़ा आती है; यह रोना इसी चित्कार का प्रतिक्रिया है।
– न्यायियों 3:12–14 में शत्रु-द्वार के भागीदारी से उभरी गहराई और उनके चिल्लाने के संकेत मिलते हैं।
इन संदर्भों से समझ आता है कि चिल्ला-चिल्लाकर रोना एक संकेत है कि लोग अपने कारण और परमेश्वर के साथ संबंध पर पुनर्विचार कर रहे हैं।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त व्याख्या
1) न्यायियों 2:6–10 — यहूदियों के पवित्र स्मृति-काल और उनके डर के साथ पुनः प्रभु के साथ जुड़ने की प्रवृत्ति का समानांतर चित्रण करता है।
2) न्यायियों 3:12–14 — शत्रुओं के दबाव के समय मनुष्यों की रोना-चीत्कार और परमेश्वर की क्रिया का संकेत देता है।
3) 2 राजा 22–23 (संकेत) — संस्थाओं के टूटने पर भी पश्चात्ताप और परमेश्वर के नियमों के अनुरूप प्रतिक्रिया का महत्व।
महत्वपूर्ण उद्धरण (सूचना)
यहाँ मैं Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पूर्ण वाक्यों से किसी भी स्पष्ट उद्धरण को नहीं दे रहा हूँ क्योंकि मूल पाठ से प्रेरित व्याख्या को ही समाहित किया गया है। यदि आवश्यक हो, तो मैं उन्हीं के सार को संक्षेप में साझा कर सकता हूँ।
निष्कर्षतः, न्यायियों 2:4 यह संदेश देता है कि एक समुदाय जब पाप के कारण टूट-फूट के कगार पर आ जाता है, तो रोना-चिल्लाहट उसकी आत्मा के विवेक को जगा देती है और परमेश्वर के साथ जुड़ाव को पुनः स्थापित करने की संभावना बनाती है।