Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
विलापगीत 3:1 विलापगीत 3:2 विलापगीत 3:3 विलापगीत 3:4 विलापगीत 3:5 विलापगीत 3:6 विलापगीत 3:7 विलापगीत 3:8 विलापगीत 3:9 विलापगीत 3:10 विलापगीत 3:11 विलापगीत 3:12 विलापगीत 3:13 विलापगीत 3:14 विलापगीत 3:15 विलापगीत 3:16 विलापगीत 3:17 विलापगीत 3:18 विलापगीत 3:19 विलापगीत 3:20 विलापगीत 3:21 विलापगीत 3:22 विलापगीत 3:23 विलापगीत 3:24 विलापगीत 3:25 विलापगीत 3:26 विलापगीत 3:27 विलापगीत 3:28 विलापगीत 3:29 विलापगीत 3:30 विलापगीत 3:31 विलापगीत 3:32 विलापगीत 3:33 विलापगीत 3:34 विलापगीत 3:35 विलापगीत 3:36 विलापगीत 3:37 विलापगीत 3:38 विलापगीत 3:39 विलापगीत 3:40 विलापगीत 3:41 विलापगीत 3:42 विलापगीत 3:43 विलापगीत 3:44 विलापगीत 3:45 विलापगीत 3:46 विलापगीत 3:47 विलापगीत 3:48 विलापगीत 3:49 विलापगीत 3:50 विलापगीत 3:51 विलापगीत 3:52 विलापगीत 3:53 विलापगीत 3:54 विलापगीत 3:55 विलापगीत 3:56 विलापगीत 3:57 विलापगीत 3:58 विलापगीत 3:59 विलापगीत 3:60 विलापगीत 3:61 विलापगीत 3:62 विलापगीत 3:63 विलापगीत 3:64 विलापगीत 3:65 विलापगीत 3:66



विलापगीत 3:21 का मूल संदेश: स्मरण से बनी आशा
मुख्य व्याख्या बिंदु: जब जीवन में दु:ख अधिक गहरा महसूस होता है, तब स्मरण और आशा की रोशनी हमारे विश्वास को फिर से जगा देती है। विलापगीत के इस अंश में अनाथता और वेदना के बीच भी आशा का रोना सुनाई देता है; यह स्पष्ट करता है कि आस्था तब मजबूत होती है जब स्मरण से भविष्य की उम्मीद पनपती है।
साहित्यिक संदर्भ
यह पद विलापगीत का एक हिस्सा है जहाँ कवि अतीत के उन दृश्यों को याद करता है जिनमें ईश्वर की कृपा और चमत्कार दिखाई देते थे। स्मरण का शब्द आहत मन को भी तसल्ली देता है और वर्तमान दर्द को एक दायरे में बाँध देता है। लेखक अपनी स्थिति से ऊपर उठकर ईश्वर के स्थिर प्रायश्चर्यों को याद करता है, जिससे उसे भविष्य की राह दिखती है।
धार्मिक-गोल और थियोलॉजिकल महत्व
यह đoạn हमें वह शिक्षा देता है कि बीमारी, दुख और निराशा के बीच भी ईश्वर की साक्षी स्मृतियाँ हमारे पथ को प्रकाशित कर सकती हैं। स्मरण से आशा उगती है—हाँ, यह एक धीर–धारित घोषणात्मक विश्वास है जो वर्तमान के साथ नहीं, बल्कि ईश्वर के पिछले कर्मों के कारण भविष्य के लिए समर्थ बनाता है।
पवित्रशास्त्र के साथ कड़ियाँ
अगर आप यह स्मरण करें, तो यह समझना होगा कि स्मृतियाँ एक प्रकार की आत्मा-उत्साह हैं जो वर्तमान के आँसू को भी एक मार्ग दिखाती हैं।
परीक्षित प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद हमें याद दिलाता है कि आस्तिक जीवन में दर्द के दौर में भी स्मृतियाँ आशा का स्रोत बनती हैं। ईश्वर के पुराने कर्मों, उसकी दयालुता और सचित प्रतिज्ञा को याद करके हम भविष्य की ओर दृढ़ कदम बढ़ाते हैं। यह न सिर्फ कठिनाई से जूझने की रणनीति है, बल्कि भरोसे और विश्वास की एक नई शुरुआत भी है।
अनुवाद-कथन (उद्धृत विचार)
कई प्राचीन टिप्पणीकारों ने स्मरण-आशा का यही ताने-बाने समझाया है। संबद्ध विचारधाराओं के अनुसार, स्मृति से उभरती आशा ईश्वर की स्थिरता पर आधारित रहती है और यह अंधकार में प्रकाश का संकेत है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
यीशु के जीवन-चरित्र के संदर्भ में स्मरण और आशा का प्रेम-प्रेरक संयोजन दिखती है; परमेश्वर के चरित्र की पुष्टि ऐसी स्मृतियों से होती है जो विश्वास को बढ़ाती हैं।