Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
विलापगीत 3:1 विलापगीत 3:2 विलापगीत 3:3 विलापगीत 3:4 विलापगीत 3:5 विलापगीत 3:6 विलापगीत 3:7 विलापगीत 3:8 विलापगीत 3:9 विलापगीत 3:10 विलापगीत 3:11 विलापगीत 3:12 विलापगीत 3:13 विलापगीत 3:14 विलापगीत 3:15 विलापगीत 3:16 विलापगीत 3:17 विलापगीत 3:18 विलापगीत 3:19 विलापगीत 3:20 विलापगीत 3:21 विलापगीत 3:22 विलापगीत 3:23 विलापगीत 3:24 विलापगीत 3:25 विलापगीत 3:26 विलापगीत 3:27 विलापगीत 3:28 विलापगीत 3:29 विलापगीत 3:30 विलापगीत 3:31 विलापगीत 3:32 विलापगीत 3:33 विलापगीत 3:34 विलापगीत 3:35 विलापगीत 3:36 विलापगीत 3:37 विलापगीत 3:38 विलापगीत 3:39 विलापगीत 3:40 विलापगीत 3:41 विलापगीत 3:42 विलापगीत 3:43 विलापगीत 3:44 विलापगीत 3:45 विलापगीत 3:46 विलापगीत 3:47 विलापगीत 3:48 विलापगीत 3:49 विलापगीत 3:50 विलापगीत 3:51 विलापगीत 3:52 विलापगीत 3:53 विलापगीत 3:54 विलापगीत 3:55 विलापगीत 3:56 विलापगीत 3:57 विलापगीत 3:58 विलापगीत 3:59 विलापगीत 3:60 विलापगीत 3:61 विलापगीत 3:62 विलापगीत 3:63 विलापगीत 3:64 विलापगीत 3:65 विलापगीत 3:66



विलापगीत 3:30 — इसका सीधा अर्थ
यही वाक्य कहता है: वह अपना गाल अपने मारनेवाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। सरल शब्दों में इसका मतलब है कि विखंडन और अन्याय के बीच भी व्यक्ति निर्विकार प्रतिशोध या विद्रोह नहीं करता, बल्कि पीड़ा सहन करता है और दुष्ट के इरादों के बावजूद उसे अपनाने और सम्मान देने का प्रयास करता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
विलापगीत 3 में योगानेक लेखक ने अधीरता, दुःख, और धर्मी व्यक्ति के धैर्य को केंद्र में रखा है। अध्याय 3 का भाग्य-वेदन और निराशा के बीच भरोसा बनाए रखने की परीक्षा प्रस्तुत करता है। इस verse में गानेवाला व्यक्ति अपने शोषणकारी अत्याचार के बावजूद शांति बनाए रखता है, गाल फेरे जाने के समय भी मरहम की तरह ईश्वर की योजना पर टिके रहते हैं।
व्याख्या के बिंदु
टेमाटिक सार
अन्य संबंधित पद
1) न्याय और धैर्य के संदेश का आह्वान अन्य पुस्तकों में भी है जहाँ पीड़ा के समय संयम और परमेश्वर की योजना में विश्वास को प्राथम दिया गया है (उदा. अनुभवी स्तोत्र, विश्वास की परीक्षा के पाठ)।
2) दयालुता और शांति के उदाहरण: दुख के दौरान भी शत्रुओं के प्रति करुणा दिखाने की सलाह अन्य नीतिगत शिक्षाओं में मिलती है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
पीड़ा आते समय भी अपने दायरे में ईमानदारी, विनम्रता और क्षमा की राह छोड़ना नहीं चाहिए; यह एक आस्था-व्यवहार है, जो परमेश्वर की न्याय-सत्ता के साथ सामंजस्य बनाये रखता है।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप) और स्पष्टीकरण
कथन-सम्बन्ध 1: धीरज के मूल्य पर संकेत देता है—कठिन समय में भी विश्वास बनाए रखना।
कथन-सम्बन्ध 2: अत्याचार के बीच भी नैतिकता और करुणा का निर्वाह—ईश्वर के नियमों के अनुसार जीवन बिताने की प्रेरणा।
कथन-सम्बन्ध 3: नम्रता के साथ अन्याय का सामना करना—यही पवित्रता की मिसाल है।
निष्कर्ष
यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर की दृष्टि में सच्चा धर्म उन समयों में भी नहीं डोलता जब सब कुछ उलट-फेर लगता है। धैर्य, विनम्रता और विश्वास की यह राह एक सच्चे उद्धारकर्ता के चरित्र के अनुरूप है, जो करुणा और न्याय दोनों को साथ लिए चलता है।
उद्धरण के लिए स्पष्टत: Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो वही जिक्र किए जाएंगे। इस प्रविष्टि में सन्देशात्मक सार को एकीकृत रूप से प्रस्तुत किया गया है।