विलापगीत 3:32 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

चाहे वह दुःख भी दे, तो भी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है;

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विलापगीत 3:32 पद-दर-पद बाइबल टीका

विलापगीत 3:32 का संदर्भ और अभिप्राय

यह पद विलापगीत के एक अंश में परम करूणा और भरोसे की वास्तविकता को सामने रखता है। पूरी पुस्तक में कठोर विपत्तियों के बीच भी ईश्वर की दयालुता और करुणा की निरंतरता बनी रहती है। इस पंक्ति में कहा गया है कि भले ही दुःख आए, पर उनकी करुणा की बहुतायत के कारण वे दया भी करते हैं। यह दया कभी-भी समाप्त नहीं होती; 그것 दुःख की गहराई में भी आशा की एक रौशनी बनाए रखती है।

मुख्य अर्थ

कुल मिलाकर यह पद विश्वासयोग्य स्मरण है कि ईश्वर का करुणामय स्वभाव दुःख-व्यथा के बीच भी कार्य करता है। निष्ठुर घटनाओं के कारण हमारी अनुभूतियाँ अस्थिर हो सकतीं, पर ईश्वर की करुणा स्थिर रहती है। दया का यह प्रयोग-नयापन यह बताता है कि विपत्ति से बाहर निकलना संभव है क्योंकि ईश्वर का प्रेम निरंतर बना रहता है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • ईश्वर की करुणा की अपरिमितता: दया की मात्रा दुःख के सम्यक अनुभव के सामने भी कम नहीं होती।
  • विश्वास और आशा के साथ धैर्य: कठिन समय में भी दया की प्रतिज्ञा स्मरण दिलाती है कि वे सहायता पहुँचाते हैं।
  • कठिन स्थितियों में ईश्वर के सुव्यवस्थित न्याय का आश्वासन: करुणा के साथ न्याय का संतुलन बना रहता है।

संबंधित पाठ

• यह विचार क्रूर विपत्ति और दया के बीच संतुलन पर जोर देता है—यानी दुःख के साथ भी ईश्वर की सहायता का भरोसा।

• अन्य संदर्भ जो इस विचार को मजबूत करते हैं: संदर्भ 1: जोश के समय में भी ईश्वर की दया स्थिर रहती है; संदर्भ 2: में दिलीपों पर करुणा का नवीन अभ्यास; संदर्भ 3: नीतिवचनों में दया और विश्वास के साथ जीवन के नियम।

सूक्ष्म उद्धरण (पूर्व-प्रकाशित टिप्पणीकारों के संगत विचार)

Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समान संकेत इस प्रकार मिलते हैं: वे दया की सच्ची प्रकृति को उजागर करते हैं—कि दुःख के बीच भी परमेश्वर की दया सक्रिय रहती है और वही हमारी सहायता बनती है। यदि इन पुराने टिप्पणीकारों के शब्द सटीक हों, तो वे इस पंक्ति को करुणा-आधारित उत्तरदायित्व के रूप में देखते हैं—कि परमेश्वर की दया हमारी आशा है।

कैसे लागू करें (व्यावहारिक विचार)

  • अपनी स्थितियों में परमेश्वर की दया की पुष्टि करें: चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, उसकी करुणा अभी भी सीमित नहीं है।
  • धैर्य बनाए रखें: दुःख के बीच भी दया की गहराई पर भरोसा रखें कि वह साहस और राहत प्रदान करेगी।

कुल मिलाकर सार

यह पद दुःख के बावजूद ईश्वर की करुणा की निरंतरता का स्मरण कराता है। विपत्ति समय में भी उसकी दया हमें आशा और जीवन की नई रोशनी देती है, यह विश्वास देता है कि दया के ऊपर दया और प्रेम के अनुशासन से ही उद्धार संभव है।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)

1) अन्य जगहों पर भी ईश्वर की दया और कृपा को पुनःस्मरण कराया गया है ताकि व्यक्ति आशा से न घबराए. 2) कठिनाई के समय में परमेश्वर के अनुसार व्यवहार करने के निर्देश मिलते हैं. 3) नीतिशास्त्र के भीतर दया और सत्य के संयोजन पर बल दिया गया है.

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

विलापगीत 3:32 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“तब वह उठकर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा।

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