लूका 13:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यह सुन कर प्रभु ने उत्तर देकर कहा, “हे कपटियों, क्या सब्त के दिन तुम में से हर एक अपने बैल या गदहे को थान से खोलकर पानी पिलाने नहीं ले जाता?

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लूका 13:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

लूका 13:15 का अर्थ और संदर्भ

इस योनि दृश्य में प्रभु यीशु का जवाब उस दिन के धार्मिक नेताओं के ठहराव भरे उपायों के कारण आता है जब उन्होंने सार्थक धर्म को नियमों के कठोर पालन से जोड़ा हुआ देखा। मनुष्य के उद्धारकर्ता इस बात पर उजागर करते हैं कि सब्त का दिन मनुष्य के लिए है, न कि मनुष्य सब्त के लिए। इस तथ्य की पुष्टि करते हुए वे कपट की ओर संकेत करते हैं जो धार्मिक नेताओं ने अपने नियम-निर्माण में घोल दिया था।

इस पाठ का संदेश: ईश्वर बनाम मानव-नियम

यहाँ Jesus पूछते हैं कि क्या सब्त के दिन किसी के पशु को पानी पिलाने की सहज, दयालु क्रिया को ओढ़ना चाहिए? वे दिखाते हैं कि परमेश्वर का धैर्य और दया प्रकृति अब भी खुले हाथों से दिखाई देती है। अपने नियमों के तर्क से परे जाकर वे कहते हैं कि धार्मिक कर्म केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि जीवन को संरक्षित और तृप्त करने के लिए होना चाहिए।

महत्त्वपूर्ण शब्द और चित्र

  • सब्त: परमादेश के अनुसार विश्राम और भक्ति का समय, परन्तु यहाँ इसे मनुष्य के लाभ और करुणा के लिए प्रयोग करने की बात कही गई है।
  • कपटियों: यहाँ वे नेता हैं जो नियम के भीतर निष्ठा के बजाय परहेज और कठोरता रखते हैं, लोगों के लिए नहीं।
  • अपने बैल या गदहे को ताल से पानी पिलाना: एक सहज, दैनिक दया का उदाहरण जो आवश्यक दया के नियम के अनुरूप है।

अन्य सम्बन्धी शास्त्री-व्याख्याएँ (संक्षेप)

Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सामान्य नोट्स से ये तर्क निकलते हैं: केवल धार्मिक क्रिया sufficient नहीं; प्रकट होने वाला मनुष्य के जीवन-कल्याण के लिए धर्म का उद्देश्य है। इनमें से कुछ बिंदु इस प्रकार मिलते हैं:

— यहूदियों की स्वीकृति के भीतर भी दया की मांग है; केवल मर्यादा कानून नहीं, बल्कि करुणा की पुष्टि भी आवश्यक है।

— नियमों पर अटकना धार्मिक दिखावा हो सकता है यदि वह दूसरों के लाभ को रोक दे।

क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त, 2-3 अवसर)

1) मत्ती 12:11-12: यीशु ने कहा कि मनुष्य के पुत्र सब दिन में भी किस प्रकार कर्म कर सकता है, जो आवश्यक हो। यह दर्शाता है कि कर्म-आधारित धर्म का मूल अब भी compassion है।

2) मरकुस 2:27-28: सब्त मानव के लिए बना है, न कि मानव सब्त के लिए। यह पाठ समान आत्मा की पुष्टि करता है कि धर्म का उद्देश्य जीवित पहुँच और दया है।

आज के जीवन में लागू कैसे करें

हम सब उन परिस्थितियों में आते हैं जहाँ नियमों की जकड़न बन सकती है। परंतु इस पाठ से सीख मिलती है कि सही धार्मिक जीवन में दया, करुणा और आवश्यकताओं का तात्कालिक समाधान प्रमुख है। यदि हम दूसरों की सहायता करना चाहते हैं—भले ही वह छोटे-से काम के रूप में क्यों न हो—तो हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार आचरण कर रहे हैं।

कथा-छवि का सार

परमेश्वर अपने नियमों में स्थिर रहते हैं, परन्तु वे करुणा और प्रेम के कारण नियमों को मानवीय जीवन के लिए सरल बनाते हैं। Jesus का यह उत्तर दर्शाता है कि ईश्वर की दृष्टि में सब्त का सार यह है कि जीवन को उन्नत किया जाए, न कि उसे रोककर दिखावा किया जाए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 13:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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