लूका 13:34 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“हे यरूशलेम! हे यरूशलेम! तू जो भविष्यद्वक्ताओं को मार डालता है, और जो तेरे पास भेजे गए उन्हें पत्थराव करता है; कितनी ही बार मैंने यह चाहा, कि जैसे मुर्गी अपने बच्चों को अपने पंखों के नीचे इकट्ठे करती है, वैसे ही मैं भी तेरे बालकों को इकट्ठे करूँ, पर तुम ने यह न चाहा।

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लूका 13:34 पद-दर-पद बाइबल टीका

लूका 13:34 का संदर्भ और परिचय

येशु ने यरूशलेम के प्रति करुणा भरी ध्वनि में यह अभिवक्ति प्रकट की कि वह नगर के शासित मानव-जाति के बावजूद उसे अपनी दृष्टि से बाहर नहीं रखना चाहता। यह वाक्य अचानक भावनात्मक है—येरूशलेम की आत्म-घटना, नास्तिकता और पथभ्रष्टता पर गहरी करुणा और क्षमा की खोज दोनों को साथ रखती है। context में यह Jesus केजीवन के अंतिम चरण के पूर्व का है, जब वह भविष्यद्वक्ताओं के प्रति अपमान और अवमानना देखकर दुखी होते हैं।”

केंद्रीय अर्थ

येशु यरूशलेम को एक नगर के तौर पर नहीं, बल्कि उन लोगों के समूह के रूप में देखते हैं जो ईश्वरीय भेजे गए संदेश को अस्वीकार कर देते हैं—यह नगर के नेताओं से लेकर जनता तक की मानसिकता का प्रतीक है। “जैसे मुर्गी अपने बच्चों को अपने पंखों के नीचे इकट्ठे करती है”—यह शब्द करुणा और सुरक्षा का दृश्य प्रस्तुत करते हैं; परन्तु इन्सान ने उस सुरक्षा को स्वीकार नहीं किया। Jésus का यह दुख उनकी नगर-नुकसान, रीती-रिवाज और उसकी प्रकृत आत्मीय आराधना के बीच की दूरी को दर्शाता है।

मुख्य विचारधाराएं (कई प्रमुख विषय)

  • करुणा बनाम अवहेलना: यीशु की करुणा हर नागरिक के लिए है, परन्तु अवहेलना उसे सुरक्षित नहीं कर पाती।
  • ईश्वर की प्राथनात्मक इच्छा: परमेश्वर चाहता है कि लोग सुरक्षा के पंखों के नीचे आ जाएँ, पर स्वेच्छा से नहीं आना उनका चुनाव है।
  • नया और पुराना जवाब: दया और पहचान के बीच नगर में बदलाव लाने की चुनौती बनी रहती है—कौन ईश्वर के संदेश को स्वीकारता है और कौन नहीं।

संबद्ध पवित्र पाठ (cross-references)

1) मत्ती 23:37—येशु का यरूशलेम के प्रति 반복 बयान: वहाँ की प्रतिक्रिया में समान निराशा मिलती है; यह नगर के आध्यात्मिक अवसादन को दर्शाता है।

2) लूका 19:41-44—युकेदृष्टि से शहर के विरुद्ध रोना: एक विस्तृत विस्तार जिसमें नगर की अस्वीकृति के परिणाम दिखाई देते हैं।

3) योहन्ना 1:11—स्वीकार न करना और अवहेलना, परमेश्वर के संदेश की मान्यता में बाधा बनती है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

हम में से हर एक को यह विचारना चाहिए कि क्या हम ईश्वर के पंखों के नीचे सुरक्षित रहने के लिए तैयार हैं? क्या हम करुणा से भरे रहते हुए दूसरों के साथ सच्ची शांति और प्रेरणा बाँटते हैं? यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि ईश्वर की इच्छा पूरी करने में हमारी इच्छा और उत्तरदायित्व भी अहम होते हैं—हमें स्थितियों के बीच भी दयालु कदमों से आगे बढ़ना चाहिए।

संक्षिप्त समापन

येशु की दृष्टि यरूशलेम पर एक आह्वान है—करुणा के साथ सुरक्षा-प्राप्ति की इच्छा और मानव-स्वतंत्र विकल्प के बीच की कड़ी। यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की दया विशाल है, किन्तु अवहेलना से उसका इतिहास प्रभावित होता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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मत्ती 23:37 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 23:37 (HINIRV) »
“हे यरूशलेम, हे यरूशलेम! तू जो भविष्यद्वक्ताओं को मार डालता है, और जो तेरे पास भेजे गए, उन्हें पत्थराव करता है, कितनी ही बार मैंने चाहा कि जैसे मुर्गी अपने बच्चों को अपने पंखों के नीचे इकट्ठा करती है, वैसे ही मैं भी तेरे बालकों को इकट्ठा कर लूँ, परन्तु तुम ने न चाहा।

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व्यवस्थाविवरण 32:11 (HINIRV) »
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