लूका 13:35 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

देखो, तुम्हारा घर तुम्हारे लिये उजाड़ छोड़ा जाता है, और मैं तुम से कहता हूँ; जब तक तुम न कहोगे, ‘धन्य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है,’ तब तक तुम मुझे फिर कभी न देखोगे।” (भज. 118:26, यिर्म. 12:7)

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लूका 13:35 पद-दर-पद बाइबल टीका

लूका 13:35 पर हिन्दी-टीका (HINIRV)

सरल अर्थ: यह वाक्य कहता है कि यदि यह लोग अपनी आँखों से प्रभु को मानना नहीं चाहेंगे और “धन्य है वह” के संदेशन को स्वीकार नहीं करेंगे, तब वे ईश्वर की उपस्थिति को बार-बार नहीं देख पाएंगे। यीशु यहां तेरे-मेरे घर की दशा को प्रेरक रूप में प्रयोग करते हैं ताकि यह स्पष्ट हो कि अहंकारी अवमूल्यन और जिद स्वर्ग के राज्य की दृष्टि से असफलता का परिणाम बनती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

येशु के समय में यरूशलेम के प्रति यह शंका और मूर्तिपूजा का विरोध प्रबल था। “तुम्हारा घर तुम्हारे लिये उजाड़ छोड़ दिया जाता है” से उसका संकेत है कि ईश्वर का घर—येट को प्रतीक—लोक के उन लोगों के लिए एक चेतावनी बन जाएगा जो अपने हृदय से प्रभु को स्वीकार नहीं करते। भजन 118:26 और यिर्मयाह 12:7 जैसी सजगियों के साथ यह उद्धरण इस बात को जोड़ता है कि प्रभु के आने पर मन-स्थिति महत्त्वपूर्ण है।

व्याख्या के मुख्य बिंदु

  • अहंकार बनाम स्वीकार: जिस तरह लोग प्रभु के आगमन पर स्वागत की ध्वनि से वंचित रहते हैं, वैसा ही आंतरिक स्वागत यदि नहीं होता तो उद्धार की राह कठिन हो जाती है।
  • घर का प्रतीक: यहाँ “घर” बाहरी ढांचे के बजाय स्वीकार-हृदय का प्रतीक है—जहाँ प्रभु के नाम से आने की प्रतिक्रिया तय करती है कि वह कृपा बनी रहेगी या नहीं।
  • धन्य की अवस्था: “धन्य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है” एक उद्घोषणा है कि प्रभु की उपलब्धि को मानना ही वास्तविक आशीष है।

संक्षिप्त थीम-वाक्य

अनुसंधान-परिचर्चा (Cross-references)

1) भज 118:26 — यह वाक्य उद्धार को ग्रहण करने की सुखद उद्घोषणा है; यीशु के आने पर उसे “धन्य” कहकर स्वागत करने की प्रेरणा देता है।

2) यिर्म 12:7 — यह अन्तःस्थल में विश्वास तथा पश्चात्ताप की स्थिरता की मांग को दर्शाता है; प्रभु विनयपूर्वक निवेदन करता है कि जब भी घर उजाड़ होता है, तब भी वह अपनी भूमि-प्रतिष्ठा से मोहित नहीं होते।

3) यशायाह 52:7 / मत्ती 23:37 (संकेतित विचार) — प्रभु के स्वागत की अपेक्षा और नगर-धारणा के भीतर आर्तता बताती है कि शेष लोग कैसे बुलाए जाते हैं।

कथन-उद्धरण (Public-domain commentators)

एडम क्लार्क का संक्षेप निष्कर्ष: “प्रभु के आने पर उनके स्वीकार से ही घर की शोभा बनती है; अन्यथा यह उजाड़ पड़ सकता है।” (एडम क्लार्क के अनुसार विवरण)

मैथ्यू हेन्री का संक्षेप विचार: “यह संदेश स्पष्ट करता है कि यीशु का आना वास्तव में चेतावनी नहीं, वरदान है; किन्तु अस्वीकार से परिणाम होते हैं।” (मैथ्यू हेन्री के अनुसार सार)

एल्बर्ट बार्न्स का संक्षेप विचार: “स्वीकार-स्वर से आशीष मिलती है; अगर नकार दिया जाए तो सत्ता-बोध कम पड़ता है।” (एल्बर्ट बार्न्स के अनुसार सार)

व्यावहारिक takeaway

हमारे जीवन में प्रभु के प्रति खुले दिल से स्वीकृति और सम्मान बनाए रखें। चर्च-परिचय, दैनिक प्रार्थना, और भय से भरे हुए प्रश्नों के बीच भी प्रभु के नाम से आने की धारणा को छोड़ना नहीं चाहिए। अगर हमारा हृदय संतुलन में न हो, तो तंग रास्ते भी उजाड़ बन सकते हैं; परन्तु नम्रता से आने पर प्रभु का आंगन फिर से जीवित रहता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 13:35 समानांतर पद और संबंधित वचन

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भजन संहिता 118:26 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 118:26 (HINIRV) »
धन्य है वह जो यहोवा के नाम से आता है! हमने तुम को यहोवा के घर से आशीर्वाद दिया है। (मत्ती 23:39, लूका 13:35, मर. 11:9-10 लूका 19:38)

मरकुस 11:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मरकुस 11:9 (HINIRV) »
और जो उसके आगे-आगे जाते और पीछे-पीछे चले आते थे, पुकार-पुकारकर कहते जाते थे, “होशाना*; धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है। (भज. 118:26)

मत्ती 21:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 21:9 (HINIRV) »
और जो भीड़ आगे-आगे जाती और पीछे-पीछे चली आती थी, पुकार-पुकारकर कहती थी, “दाऊद के सन्तान को होशाना; धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है, आकाश में होशाना।”

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