Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 13:1 लूका 13:2 लूका 13:3 लूका 13:4 लूका 13:5 लूका 13:6 लूका 13:7 लूका 13:8 लूका 13:9 लूका 13:10 लूका 13:11 लूका 13:12 लूका 13:13 लूका 13:14 लूका 13:15 लूका 13:16 लूका 13:17 लूका 13:18 लूका 13:19 लूका 13:20 लूका 13:21 लूका 13:22 लूका 13:23 लूका 13:24 लूका 13:25 लूका 13:26 लूका 13:27 लूका 13:28 लूका 13:29 लूका 13:30 लूका 13:31 लूका 13:32 लूका 13:33 लूका 13:34 लूका 13:35



मुख्य व्याख्या बिंदु
लूका 13:33 में यीशु अपने मिशन के निर्बाध क्रम को स्पष्ट करते हैं: उनके शब्दों में एक धारणात्मक प्रत्यक्षता है कि उनके जीवन-कार्य का निर्णायक समय अभी आया है। वे कहते हैं कि उन्हें “आज और कल और परसों” चलना अवश्य है, क्योंकि एक भविष्यद्वक्ता के रूप में उनका उद्देश्य यरूशलेम में मारा जाना नहीं रुका रह सकता। यह वक्तव्य सुरक्षा-भरे भाग नहीं, बल्कि निर्णायक चरण की सुरक्षा है—यही उनकी सेवकाई की यात्रा और परम-योजना का भाग है। इस वाक्य के भीतर, उद्धारकर्ता अपनी मृत्यु के इरादे को एक नियतकालिक क्रम के अंतर्गत देखते हैं और यह प्रशंसा-योग्य भरोसा व्यक्त करते हैं कि परमेश्वर के उद्देश्य पूरे होंगे, चाहे रास्ते कठिन ही क्यों न हों।
पठनीय साहित्यिक संदर्भ
इस पद में यीशु का मार्ग-निर्देशन जीवन के एक ठोस चरण पर केंद्रित है: वह जनता के बीच प्रचारित सत्य को समय-सीमा में बाँधते हैं और अपने शेर-कार्य की योजना को स्पष्ट करते हैं कि किस क्रम में घटनाएँ घटेंगी। यह बयान लूका के गहन प्रयोजन—यहोवा के राज्य-आह्वान के लिए ईश्वर की योजना का भाग—से मेल खाता है।
धार्मिक महत्व
यह शब्द विश्वास के लिए एक उद्धार-बल है कि मृत्यु-यात्रा उनके मिशन की आवश्यक पुष्टि है न कि एक असफलता का परिणाम। यह शिक्षित करता है कि दासत्व और प्रेम की उच्च राजधानी में, यीशु ने अपनी मृत्यु को पवित्र योजना के रूप में स्वीकृत किया ताकि बचाव और बलिदान संभव हो सके।
आध्यात्मिक संबंध (Cross-References)
इन संदर्भों में, उद्धारकर्ता का उद्देश्य स्पष्ट रहता है: मृत्यु और पुनर्जीवन से परमेश्वर के राज्य का उद्घाटन।
कुछ विचार करने योग्य प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
लूका 13:33 में यीशु अपने शिष्यों को बतला रहे हैं कि उनकी यात्रा एक निश्चित ईश्वरीय क्रम का हिस्सा है। मृत्यु के लिए वे नहीं भागते, बल्कि वह कल, आज और परसों की समग्र यात्रा में चलते हैं—यही उनकी सेवकाई की परम प्रमाणिता है। यह वाक्य हमें प्रेरित कराता है कि स्थिरता और विश्वास के साथ हम ईश्वर की योजना के समय-रेखा में चलें, भले रास्ते कठिन क्यों न हों।
उद्धरण संकेत: यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे छोटे उद्धरण चाहते हैं, तो उल्लेखित पंक्तियाँ नीचे दी जा सकती हैं—पर पाठ में हम संक्षेप में ही उनके विचारों के सार को समाहित करते हैं।