Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 13:1 लूका 13:2 लूका 13:3 लूका 13:4 लूका 13:5 लूका 13:6 लूका 13:7 लूका 13:8 लूका 13:9 लूका 13:10 लूका 13:11 लूका 13:12 लूका 13:13 लूका 13:14 लूका 13:15 लूका 13:16 लूका 13:17 लूका 13:18 लूका 13:19 लूका 13:20 लूका 13:21 लूका 13:22 लूका 13:23 लूका 13:24 लूका 13:25 लूका 13:26 लूका 13:27 लूका 13:28 लूका 13:29 लूका 13:30 लूका 13:31 लूका 13:32 लूका 13:33 लूका 13:34 लूका 13:35



लूका 13:21 का सरल अर्थ
यह उद्धरण यह बताता है कि परमेश्वर का राज कैसे धीरे-धीरे फैलकर समस्त जीवन को प्रभावित कर देता है—जैसे खमीर जो आटे के हर हिस्से में फैलकर उसमें असर डाल देता है।
प्रसंगीय पृष्ठभूमि
यूहन्नी-आख्यानों के क्रम में यीशु ने चापलूसी या बहुधा अशांति के समय भी परम राज्य की वास्तविक प्रकृति को सरल उपमाओं के जरिये समझाया। यहाँ खमीर की उपमा से यह दर्शाया गया है कि परमेश्वर का राज एक गतिशील परिवर्तन है जो विश्व के अलग-अलग हिस्सों में चुपचाप और प्रभावशালী तरीके से फैलता है।
interpretive observations
संक्षिप्त विषय-वस्तु
अन्य संबंधित वचनों से संक्षिप्त सम्बद्धता
1) मत्ती 13:33 — राज्यमण्डल की उपमा में खमीर का उपमान एक ही विचार को बार-बार दोहराता है: छोटा आरम्भ विश्व-परिवर्तन के लिए पर्याप्त है।
2) योहन 3:8 — परमात्मा की क्रिया सांसारिक रूप से अदृश्य लेकिन प्रभावी होती है, जैसे श्वास के साथ उड़ा हुआ पवन।
3) मरकुस 4:26-29 — क्षेत्र-व्याप्ति का क्रम और आंतरिक उर्वरता का विचार, जो सीमाओं के पार फैलता है।
पवित्रता और व्यवहार पर उपयोगी निष्कर्ष
खंड-सम्बन्धी स्पष्ट उद्धरण
इस पाठ के साथ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सहारे निष्कर्ष आत्मसात करने योग्य हैं। जहां आवश्यक हो, मैं उनके संक्षिप्त सत्य-वाक्यों को उद्धृत कर रहा हूँ:
— “राज्य का फैलाव धीरे-धीरे लेकिन निश्चित होता है; छोटा आरम्भ महान परिणाम बनता है।” (अनुकूलित सार)
— “छोटे प्रारम्भों में भी परमेश्वर का काम रहता है, और यह मानव-उत्तरदायित्व से अधिक बन सकता है।” (अनुवादित सार)
टेकअवे
खमीर की उपमा से सीख यह है कि परम राज की वास्तविक शक्ति विनम्र आरम्भ में निहित है: जो स्वयं परिवर्तन के लिए तैयार है, वह पूरे संसार को प्रभावित कर सकता है।