Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 13:1 लूका 13:2 लूका 13:3 लूका 13:4 लूका 13:5 लूका 13:6 लूका 13:7 लूका 13:8 लूका 13:9 लूका 13:10 लूका 13:11 लूका 13:12 लूका 13:13 लूका 13:14 लूका 13:15 लूका 13:16 लूका 13:17 लूका 13:18 लूका 13:19 लूका 13:20 लूका 13:21 लूका 13:22 लूका 13:23 लूका 13:24 लूका 13:25 लूका 13:26 लूका 13:27 लूका 13:28 लूका 13:29 लूका 13:30 लूका 13:31 लूका 13:32 लूका 13:33 लूका 13:34 लूका 13:35



सीधा अर्थ: अगर तुम मन नहीं फेरोगे, तो तुम सभी इसी रीति से नाश होंगे
लूका 13:3 में यीशु सुनाकर हमें चेतावनी देता है कि पाप से मुक्ति के लिए एक नयी दिशा-निर्देश की आवश्यकता है। यह कथन प्रत्यक्ष तौर पर बताता है कि केवल बाहरी आचरण से नहीं, वरन आंतरिक परिवर्तन से ही जीवन का ढाँचा बदलेगा। यदि व्यक्ति अपने विचार, अपनी योजनाएं और अपने दिल की निगरानी नहीं करेगा, तो वह भी अन्य अजेंडों के समान नष्ट हो सकता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ लूका के Gospel में उन घटनाओं के संदर्भ से जुड़ा है जहाँ यीशु ने श्रोताओं को शास्त्रीय चेतावनियाँ दीं कि शांति और उन्नति पाने के लिए repent या पाप से पलटाव आवश्यक है। यहाँ ‘नाश’ का शब्द विशेषकर नैतिक और आत्मिक क्षति के अर्थ में है, जो जीवन के मार्ग से हटकर आता है।
विश्लेषणात्मक बिंदु
कथन-आउटलाइन (संक्षिप्त थीम)
संदर्भ-उद्धरण और क्रमशः व्याख्या
मैथ्यू Henry की टिप्पणी में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि यहाँ ईश्वर की करुणा और न्याय दोनों एक साथ चलते हैं; मन फेरना वही है जिसमें आंतरिक पुनरावृत्ति और जीवन-परिवर्तन संभव है।
Albert Barnes ने इस वाक्य को व्यक्त किया कि केवल बाहरी धार्मिकता से नहीं, बल्कि हृदय परिवर्तन से ही संकट से मुक्ति मिलती है।
Adam Clarke के शब्दों में यह कहा गया है कि “नाश” का तात्पर्य लोक के नाश नहीं, बल्कि आत्मिक विफलता और ईश्वरीय अवसरों के खो जाने से है, जब व्यक्ति repentance को अस्वीकार कर देता है।
संयुक्त निष्कर्ष
इस पद को पढ़ते समय मुख्य संदेश यही है: अपने दिल को सचेत बनाएं, क्योंकि आत्म-परिवर्तन के बिना जीवन का रास्ता खतरे में रहता है। इसे आप ने व्यक्तिगत-विश्वास में कैसे लागू करेंगे, यह आपके धार्मिक-सामुदायिक जीवन में निर्णायक भूमिका निभाता है।
थीसिस-आधारित क्रॉस-रेफरेंसे
Cross-references (संक्षेप):
इन संदर्भों के साथ, पाठ में प्रस्तुत चेतावनी—मन फेरना और पथ पर लौटना—धर्मयात्रा के एक व्यवस्थित कदम के रूप में देखी जाए।
व्यावहारिक निष्कर्ष
오늘 अपने जीवन में यह प्रश्न पूछिए: क्या मैं अपने विचारों और योजनाओं में ईश्वर की इच्छा को पहले स्थान दे रहा हूँ? अगर उत्तर हाँ नहीं है, तो रोके मत: छोटे-छोटे कदमों से ही परिवर्तन आरम्भ करें—हमदर्दी, नम्रता, और प्रार्थना के साथ repentance को अपनाएं।