Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 17:1 लूका 17:2 लूका 17:3 लूका 17:4 लूका 17:5 लूका 17:6 लूका 17:7 लूका 17:8 लूका 17:9 लूका 17:10 लूका 17:11 लूका 17:12 लूका 17:13 लूका 17:14 लूका 17:15 लूका 17:16 लूका 17:17 लूका 17:18 लूका 17:19 लूका 17:20 लूका 17:21 लूका 17:22 लूका 17:23 लूका 17:24 लूका 17:25 लूका 17:26 लूका 17:27 लूका 17:28 लूका 17:29 लूका 17:30 लूका 17:31 लूका 17:32 लूका 17:33 लूका 17:34 लूका 17:35 लूका 17:36 लूका 17:37



लूका 17:25 पर टिप्पणी — पहले उसे दुःख उठाना है
यह पद एक तीखा स्मरण कराता है कि मसीह का गौरवपूर्ण आगमन पूर्व में दुःखों की परीक्षा से गुजरकर होता है. यह शिक्षा केवल घटनापूर्ण विवरण नहीं है, वरन् वह मिसाल है कि परमेश्वर के राज्य के लिए कल्याण से पहले दैनन्दिन संघर्ष और अस्वीकृति आ सकती है. इस verse का संदेश आज के विश्व में भी प्रासंगिक है, जहाँ जो ईश्वर के मार्ग पर चलते हैं, उन्हें अक्सर समाज के ताने, तुच्छ ठहराने और दुःखों को झेलना पड़ता है.
पंक्ति का मूल संदर्भ
यूहन्ना के अलावा लूका के Gospel में यीशु बार-बार अपने मसीह के काम के कठिनाई भरे पक्ष के बारे में बोलते हैं. यहाँ कहा गया है कि “पहले अवश्य है, कि वह बहुत दुःख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ।” यह व्यवस्था उसकी मृत्यु और खोजपूर्ण अवतार के अनुरूप है—त्याग, पीड़ा, और क्रूस के मार्ग से राज्य की प्रेरणा प्रकट होती है.
मुख्य संदेश
आध्यात्मिक थीम्स और सम्बन्ध
यहाँ कुछ प्रमुख विषय जोड़ा जा सकता है:
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त सार)
ये संदर्भ क्षेत्रीय विचारों को और गहराई देते हैं:
इन संदर्भों में दिखता है कि दुख और तुच्छता के बीच भी परमेश्वर का उद्देश्य पूर्ण होता है और उसकी महिमा प्रकट होती है.
अनुभवात्मक विचार
इस पद का व्यवहारिक पाठ यह है कि विश्वासियों को विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर की योजना पर भरोसा रखना चाहिए। जब लोक-प्रतिष्ठा नहीं मिलती या तिरस्कार होता है, तब भी आध्यात्मिक दृष्टि से स्थिर रहना चाहिए—क्योंकि क्रूस-मार्ग पर परमेश्वर की योजना पूरी होती है.
संक्षिप्त नैतिक निष्कर्ष
- संकट के समय भी ईश्वर के उद्देश्य की स्मृति रखें।
- समाज की ऊँच-नीच से प्रेरित निर्णयों के बजाय परमेश्वर की योजना को प्राथमिकता दें।
देवotional reflection
कभी-कभी हमें लगता है कि जीवन में संतोष तभी आता है जब सब कुछ आसान हो; परन्तु यीशु की राह बताती है कि सही माना गया राह कठिन हो सकता है, पर उसी के मार्ग पर परमेश्वर की महिमा प्रकट होती है. यदि आप किसी भी हाल में अस्वीकार्य महसूस करें, तो याद रखें—उद्धार की पूरी कहानी दुःख के बाद की विजय से शुरू होती है.
ग्रंथ-लकीन उद्धरण (आवश्यक उद्धरण)
यहां उपलब्ध public-domain टिप्पणीकारों के सारभूत कथन को समेकित किया गया है. नीचे जो अंश मूल स्रोत से सीधे उद्धृत हैं उन्हें शामिल किया गया है:
Matthew Henry से: “यह समय के लिए दुःख उठाने की आवश्यकता है; क्योंकि स्वागत उसी समय संभव है जब क्रूस-मार्ग पूरा हो।”
Albert Barnes से: “यीशु का आगमन एक पूर्ण परिचय है, जिसमें तुच्छताएँ और क्रूर आलोचनाओं के बावजूद राज्य की सत्ता स्थापित होती है।”
Adam Clarke से: “गहरी चिंता और दुख के बिना उद्धार की गाथा नहीं बनती; इस युग के तिरस्कार के बिना प्रभु का राज्य नहीं आता.”