Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 17:1 लूका 17:2 लूका 17:3 लूका 17:4 लूका 17:5 लूका 17:6 लूका 17:7 लूका 17:8 लूका 17:9 लूका 17:10 लूका 17:11 लूका 17:12 लूका 17:13 लूका 17:14 लूका 17:15 लूका 17:16 लूका 17:17 लूका 17:18 लूका 17:19 लूका 17:20 लूका 17:21 लूका 17:22 लूका 17:23 लूका 17:24 लूका 17:25 लूका 17:26 लूका 17:27 लूका 17:28 लूका 17:29 लूका 17:30 लूका 17:31 लूका 17:32 लूका 17:33 लूका 17:34 लूका 17:35 लूका 17:36 लूका 17:37



मुख्य व्याख्या बिंदु
लूका 17:4 में यीशु पाठक को क्षमा के नये और बढ़ते मानक से परिचित कराते हैं: बार-बार अपराध करने वाले व्यक्ति की फिर भी क्षमा पाने की संभावना उसी सतत प्रार्थना और पश्चात्ताप की इच्छा पर टिकी है। यदि कोई व्यक्ति दिन भर में सात बार अपराध करे और हर बार लौटकर कहे कि मैं पछताता हूँ, तो उसे क्षमा कर देना चाहिए। यह पद पारस्परिक क्षमा, धैर्य और चिरस्थायी प्रेम की महत्त्वपूर्ण शिक्षणावली को स्पष्ट करता है: ईश्वर का अनुग्रह विविध रूपों में बारम्बार आता है, जब आत्म-स्वीकार और फिरौती की निष्ठा प्रकट हो।
पाठ्य-संदर्भ ( literary context )
येशु के समय के यीशुशिष्य एक ऐसी मिसाल देना चाहते थे जो धार्मिक दिखावट से परे हो और वास्तविक पश्चात्ताप की गतिशीलता दिखाए। इस परिप्रेक्ष्य में शुद्धता-आधारित व्यवहार नहीं, बल्कि नम्रता, माफी चाहना और पुनः प्रयास की निरंतरता महत्त्वपूर्ण है। यह वचन लूका के अनुवाद में विशेष रूप से सामुदायिक क्षमा और परमेश्वर के दयालु स्वभाव की चर्चा करता है—खासतौर पर तब जब लोग बारम्बार असफल हों।
धार्मिक और स्त्रोतगत प्रभाव (theological significance)
- क्षमा की बारम्बारता: यहूदियों के मानक से अधिक, परमेश्वर का अनंत और अटूट सहनशील प्रेम दर्शाती है।
- पश्चात्ताप की सच्ची पुनरावृत्ति: जिस प्रकार अपराधी लौटकर स्वीकार करता है, वैसा ही जीवन-चरितांत जो तपस्या और परिवर्तन को दर्शाता है।
- मानवीय और दयालुता का संयोजन: समुदाय में दोषी के पुनः स्वीकार और बहाली की इच्छा परमधर्म के साथ मेल खाती है।
पूर्व-तुलनात्मक पूँजी (cross-references) और संक्षिप्त विवेचन
इन संदर्भों में दिखता है कि क्षमा एक प्रशासनिक फॉर्म नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन और समुदाय की भलाई से जुड़ा दायित्व है।
जीवंत चिंतन के प्रश्न (reflection questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वचन सिखाता है कि परमेश्वर की क्षमा और साथ ही समुदाय की क्षमा एक सतत, ईमानदार पश्चात्ताप पर निर्भर है। चाहे बार-बार असफल हों, परमेश्वर के प्रेम में लौटना और क्षमा की मांग करना वास्तविक आशीष है। यीशु का उद्देश्य यह है कि प्रार्थनात्मक, दयालु और सतत विश्वास से जीवन बदले जाएं।
कथन-संदर्भ (quotations from famous commentators)
मथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायमंड टिप्पणीकारों के त्वरित सार-रेखा के अनुसार, इस verses में क्षमा का राष्ट्रीय मूल्य और आत्म-परिवर्तन का मार्ग प्रमुख है। केशरी शब्दों में: यह क्षमा प्रक्रिया का निरन्तर प्रावाह है—जो व्यक्ति बार-बार लौटकर बताता है कि मैं पछताता हूँ, उसका कभी प्रतिद्वंद्वी नहीं बनना चाहिए।
नोट: यदि आप चाहें तो मैं ऊपर के पाठ के भीतर से सीधे उद्धरणों के छोटे-बड़े अंश भी समाहित कर सकता हूँ; फिलहाल आवश्यकतानुसार पाठ-आकृति बनाए रखी गई है।