Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 21:1 लूका 21:2 लूका 21:3 लूका 21:4 लूका 21:5 लूका 21:6 लूका 21:7 लूका 21:8 लूका 21:9 लूका 21:10 लूका 21:11 लूका 21:12 लूका 21:13 लूका 21:14 लूका 21:15 लूका 21:16 लूका 21:17 लूका 21:18 लूका 21:19 लूका 21:20 लूका 21:21 लूका 21:22 लूका 21:23 लूका 21:24 लूका 21:25 लूका 21:26 लूका 21:27 लूका 21:28 लूका 21:29 लूका 21:30 लूका 21:31 लूका 21:32 लूका 21:33 लूका 21:34 लूका 21:35 लूका 21:36 लूका 21:37 लूका 21:38


लूका 21:29— दृष्टान्त और अर्थ
व्याख्या का विषय: यीशु ने श्रोताओं से कहा कि वे अंजीर के पेड़ और बाकी पेड़ों को देखते रहें और उनकी अवस्था से संकेत लें कि समय के नजदीक कौन-सी घटनाएं होंगी। यह दृष्टान्त पूर्वसूचना है कि अधिष्ठानिक परिवर्तन, कठिनाइयों और अंत के समय के संकेत समझने के लिए प्रकृति के संकेत हमारे लिए शिक्षण हैं। श्रोताओं को चेतावनी है कि केवल बाहरी चिह्न देखकर न बदलें, बल्कि उनके पीछे के आध्यात्मिक संदेश को समझना आवश्यक है।
मुख्य अर्थ
यह पाठ एक पारिवारिक, दृश्य-आकलन शैली में है जो हमारे जीवन-यापन के लिए तीन महत्वपूर्ण संदेश देता है: (1) समय के संकेत स्पष्ट हैं, (2) विश्वसनीय दृष्टि के लिए सतर्कता और प्रार्थना आवश्यक है, (3) परमप्रभु के नियोजन में धैर्य और विश्वास चाहिए। जैसे पेड़ की पत्तियाँ लौटने लगती हैं जब गर्मी बदली होती है, वैसे ही घटनाओं के संकेत भी बतौर चेतावनी हमें अपने अस्तित्व और आशा की दिशा सुधारने के लिए देते हैं।
केंद्रीय विषय—तीन संकेतक तथ्य
महत्वपूर्ण पंक्तियाँ और cross-references
यहाँ कुछ संक्षिप्त सम्बद्ध पाठ दिए जाते हैं जिनसे पाठ के साथ गहराई मिलती है:
इन संदर्भों से प्रेरणा मिलती है कि अंतिम समय के संकेत सतर्कता, विश्वसनीयता और प्रार्थना के साथ देखने चाहिए, न कि भय या निष्क्रियता के साथ।
व्यावहारिक reflección
हम कैसे इस शिक्षा को अपने जीवन में उतारें? रोजमर्रा की प्रार्थना में समय-सीमा के बारे में अलर्ट रहें, परन्तु कुछ भीषण भविष्यवाणी होते ही नैतिक-आचरण में सुधार करें। अपनी आशा को केवल घटनाओं से नहीं जोड़े रखें, बल्कि ईश्वर की योजना पर भरोसा बनाएं ताकि जीवन के हर परिवर्तन में शांति मिले।
संक्षिप्त निष्कर्ष
लूका 21:29 हमारे लिए एक दृड़ संदेश देता है: दृश्य संकेत केवल एक मार्ग का संकेतक हैं; वास्तविक परिवर्तन और उद्धार के लिए हमारे हृदय की स्थिति और ईश्वर के प्रति भरोसा अधिक महत्वपूर्ण हैं। पेड़ के पत्ते जैसे संकेत हमें सतर्क बनाते हैं, पर अंतिम निर्णय परमेश्वर के हाथ में है।
कायदे-जोड़
यद्यपि यह पाठ भविष्य के बड़े घटनाओं की चेतावनी देता है, परंतु मूल शिक्षा यह है कि जीवन के हर मोड़ पर प्रभु के पक्ष में तैयारी और विश्वास बनाए रखना चाहिए।
नोट: इस पाठ के बारे में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की पुरानी टिप्पणी-धाराओं से संक्षिप्त प्रेरणाएं समाहित हैं; नीचे निर्धारित संक्षेप उद्धरण केवल उनमें से कुछ जगहों के संकेत हैं।