Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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लूका 21:3 का संदर्भ और संदर्भ में अर्थ
इस वाक्य में यीशु मंदिर में दान-दक्षिणा के दृश्य को देखते हुए एक “कंगाल विधवा” के व्यवहार पर ध्यान आकर्षित करते हैं। शारीरिक रूप से विपन्न होने के बावजूद उसने दोनों सिक्कों से अधिक मूल्यवान दान दिया जो अधिकार और धार्मिक प्रदर्शन से परे एक अंतःकरणीय आस्था का प्रदर्शक है। पाठ के पूर्वकथन में यीशु यह दर्शाते हैं कि ईश्वर के दृष्टिकोण में मूल्य निर्धारण का मानक सामाजिक स्रोतों से नहीं, वरन् ईमान और समर्पण से जुड़ा हुआ है।
मुख्य विचार
कंगाल विधवा का दान, रकम की कुल मात्रा से नहीं, बल्कि उसके दिल की आस्था और समर्पण से जुड़ा है। उसने अपनी आवश्यकताओं के भीतर से विश्वास के अनुसार दिया, न कि औपचारिक रिवाज के अनुसार। यह संदेश देता है कि परमेश्वर आंतरिक संकटों और संकल्पों को देखता है, न कि केवल बाहरी चढ़ाव-चढ़ाव को।
दो–तीन प्रमुख विषय
संबद्ध आयतन-चर्या तथा अन्य संदर्भ
Related passages: - मारकु 12:41–44 (विधवा के दो पेड का उदाहरण) — दिखाता है कि भगवान के समक्ष दिया गया छोटा भी बड़ा माना जाता है जब वह दिल से हो। - मिथ्य-धर्मसत्ता के विरोध में यीशु का संदेश — पवित्रता और सत्य निष्ठा का मूल्यांकन भीतर से होता है।
व्यावहारिक मनन
यह घटना हमें प्रेरित करती है कि हम दान या धर्म-कार्य के समय स्वयं की आवश्यकताओं की अनदेखी करके भी विश्वास के साथ निष्कपट दिल से दें। हमारे पास जो कुछ भी है, उसका सही उपयोग ईश्वर के लिए हो और दूसरों की जरूरतों के प्रति संवेदना बनी रहे। एक सरल, श्रेष्ठ आस्था कभी-कभी बड़े दिखावे से अधिक मूल्यवान हो सकता है।
छोटा सार
कंगाल विधवा का दान यह संकेत देता है कि परमेश्वर के कानून में आंतरिक सच्चाई और विश्वास की महत्ता है। चाहे हमारी स्थिति कितनी भी कमजोर क्यों न हो, यदि हमारा दिया दिल से हो, तो वह बड़ा दान बन जाता है।
Cross References
1) लूका 20:45–47 — मंदिर में प्रचार का आचरण और मानवीय दिखावे का सच। व्याख्या: यह सम्माननायक सम्मान-प्रदर्शन नहीं, बल्कि आह्वान है कि हमारा हृदय purity से भरा हो।
2) मरकुस 12:41–44 — विधवा का दो पेड का दान. व्याख्या: छोटे-छोटे दान भी परमेश्वर के सामने गिने जाते हैं जब वे दिल से हों।
3) मत्ती 6:1–4 — सत्य प्रेम से दान देना; गुप्त रूप से दया कर, प्रभु के देखते डर में दान देना।
नोट: इस पंक्ति के लिए ऐतिहासिक-आर्षित टिप्पणीकारों से आपसी विचार मिलते हैं कि दान की “गुणवत्ता” का माप दिल की निष्ठा और आत्म-समर्पण पर निर्भर है, न कि मात्र दान की राशि पर।