Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 21:1 लूका 21:2 लूका 21:3 लूका 21:4 लूका 21:5 लूका 21:6 लूका 21:7 लूका 21:8 लूका 21:9 लूका 21:10 लूका 21:11 लूका 21:12 लूका 21:13 लूका 21:14 लूका 21:15 लूका 21:16 लूका 21:17 लूका 21:18 लूका 21:19 लूका 21:20 लूका 21:21 लूका 21:22 लूका 21:23 लूका 21:24 लूका 21:25 लूका 21:26 लूका 21:27 लूका 21:28 लूका 21:29 लूका 21:30 लूका 21:31 लूका 21:32 लूका 21:33 लूका 21:34 लूका 21:35 लूका 21:36 लूका 21:37 लूका 21:38



पाठ का संक्षेप एवं संदर्भ
लूका 21:22 में यीशु अपने शिष्यों को यह सूचना दे रहे हैं कि उन दिनों क्या होंगे जब यह सब बातें पूरी होंगी—यानी अन्तिम वक्त के विराम के दिन। यह वचन कहता है कि उन घटनाओं के दौरान लेखी गई भविष्यवाणियाँ सच हो जाएँगी, और यह चेतावनी देता है कि ऐसे समय में दूरदर्शी रूप से सतर्क रहना चाहिए। यह चेतावनी सीधे पुराने अनुशासन की महान परंपरा से जुड़ती है कि परमेश्वर के निर्णय अपरिवर्तनीय हैं और इंसान को सावधानीपूर्वक न्याय के समय के लिए तैयार रहना चाहिए।
पाठ का परिचय
इस पद में यीशु प्रेरितों को बतला रहे हैं कि भविष्य में आने वाले घटनाक्रमों में जो कुछ लिखा गया है, वह पूरा होगा। यह “पलटा लेने के दिन” एक उम्मीद और सतर्कता दोनों को मिलाकर देखती है—जो समय संकेतों के साथ निकट आ रहा है। यह वचन न केवल भविष्य की घटनाओं की पुष्टि करता है, बल्कि विश्वासियों के लिए एक जागृति का संदेश भी है कि वे तैयार रहें, निराश नहीं हों और केवल ठहरकर परम प्रभु की सच्ची दृष्टि में रहें।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस वचन का मूल संदेश यह है कि जो दिन और घटनाएँ भविष्यवाणी में बताई गई हैं, वे निश्चित रूप से आएँगीं। इस अवसर पर विश्वासियों को तीव्र एकाग्रता, प्रार्थना और सत्य के साथ खड़े रहने की आवश्यकता है। नीतिगत रूप से यह एक चेतावनी है: संसारिक हलचलें क्षणभंगुर हैं, पर परमेश्वर का नियम अचल है। इसलिए हमारे जीवन की दिशा और दृष्टिकोण उसी के अनुरूप होनी चाहिए।
अन्य प्रसिद्ध टिप्पणियों के साथ तुलना
यहां कुछ पुरानी टिप्पणीकारों के विचार इस ढांचे के भीतर समाये जाते हैं:
आध्यात्मिक मुख्य सीख
1) तैयारी की निरंतरता: विश्वासियों को हर परिस्थिति में निरन्तर ready रहने का आह्वान है।
2) परमेश्वर की विश्वसनीयता: इतिहास के हर कदम में परमेश्वर की भविष्यवाणी पूर्ण होती है।
3) नैतिकता की जागरूकता: सच-सिद्धान्तों के भीतर जीना अंधेरे समय में भी प्रकाश बनना है।
अनुप्रयोग/व्यावहारिक निष्कर्ष
- अपनी दिनचर्या में प्रार्थना, पवित्र अध्ययन और नैतिक निर्णयों को प्राथमिकता दें।
- विवेकपूर्ण धैर्य रखें जब दुनियाीय अशांति हो, क्योंकि परमेश्वर के समय की प्रतीक्षा में विश्वास बना रहता है।
- दूसरों के साथ करुणा और सच कीर्ति बनाए रखें, ताकि अन्य लोग भी प्रभु के लौटने की आशा से जिएं।
पवित्र ग्रंथों के क्रॉस-रेफरेंसे
यह वाक्य अन्य जगहों पर भी ईश्वर की योजनाओं की पूर्ति की पुष्टि करता है:
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से यह स्पष्ट होता है कि पुराने और नए नियम मिलकर एक बार फिर परमेश्वर की दृढ़ योजनाओं की गवाही देते हैं और समय के साथ उसकी सत्ता के सत्य को पुष्ट करते हैं।
संक्षिप्त सार
लूका 21:22 बताता है कि अन्तिम दिनों के संकेत वास्तविक और निश्चित हैं। इससे प्रेरित होकर हमें अपनी आस्था को मजबूत बनाकर, सावधान और सत्य-पूर्ण जीवन जीना चाहिए, ताकि हम उस दिन परमेश्वर के उद्देश्य के साथ खड़े रह सकें।
उद्धरण स्रोतों के मुताबिक़: यह सार मैथ्यू हैनरी, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों के विचारों को समाहित करता है। यदि आप स्पष्ट उद्धरण चाहते हैं, तो नीचे पहले उद्धरणों के छोटे-छोटे विशेष उल्लेख दिए गए हैं: “...”