Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 21:1 लूका 21:2 लूका 21:3 लूका 21:4 लूका 21:5 लूका 21:6 लूका 21:7 लूका 21:8 लूका 21:9 लूका 21:10 लूका 21:11 लूका 21:12 लूका 21:13 लूका 21:14 लूका 21:15 लूका 21:16 लूका 21:17 लूका 21:18 लूका 21:19 लूका 21:20 लूका 21:21 लूका 21:22 लूका 21:23 लूका 21:24 लूका 21:25 लूका 21:26 लूका 21:27 लूका 21:28 लूका 21:29 लूका 21:30 लूका 21:31 लूका 21:32 लूका 21:33 लूका 21:34 लूका 21:35 लूका 21:36 लूका 21:37 लूका 21:38

पाठ का परिचय
लूका Chapter 21 में यीशु का अंतिम शिक्षण-संदेश प्रकाशित होता है, जिसमें प्रभु के पुनः आगमन और वह समय-सारिणी के संकेत बताए जाते हैं।Verse 38 शब्दों में भीड़ की निरंतर रुचि का चित्र मिलता है—भोर के समय मंदिर में वे सब उसकी बात सुनने आते हैं। यह स्पष्ट करता है कि यीशु के शब्दों के प्रति जनता की जिज्ञासा और उनके प्रभाव की तीव्रता किस प्रकार बढ़ रही थी।
पद का पाठ और उसका पार्श्व
“और भोर को तड़के सब लोग उसकी सुनने के लिये मन्दिर में उसके पास आया करते थे।”
यह पंक्ति चिह्नित करती है कि प्रभु की शिक्षाओं का आकर्षण भोर के पहले चरण में भी कम नहीं हुआ था। लोग एक बार फिर मंदिर पहुँचकर उसके प्रभाव को अनुभव करना चाहते थे—यह दर्शाता है कि विश्वास और शिक्षा के लिए उनकी उत्साह कितना स्थिर था, जबकि विरोध और कठिनाईयां भी बढ़ रही थीं।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
अन्य पवित्र ग्रंथ से तुलनात्मक संकेत
– अन्य स्थानों में भी प्रकट होता है कि लोग दिन-रात परमेश्वर के वचन को खोजते थे (उदा., मरुस-बार-बार बुलावा; प्रेरितों के कार्यों मेंdued).
– प्रेरणा के लिए प्रार्थना और तब तक सीखना जब तक समझ न आये: यह हमारे लिए भी एक संकेत है कि शिक्षण-समुदाय में निरंतर उपस्थित रहने से ज्ञान गहराता है।
मौलिक पाठ से सीखने योग्य बातें
1) यीशु की शिक्षा के प्रति जनता की आदर-सम्मान और उत्साह कभी-कभी अवधि-पर निर्भर नहीं होता; वे हर सुबह नए अवसर को पकड़ना चाहते थे।
2) मंदिर का संदर्भ बताता है कि पवित्र स्थानों में भी सीखना जीवन के मूल से जुड़ा है; जहाँ प्रभु की बात सुनने की इच्छा हो, वहाँ भेंट-भाव से भागीदारी होनी चाहिए।
अनुप्रयोग
हम भी अपनी दिनचर्या में सुबह के समय परमेश्वर के वचन की एकाग्रता बनाएं। भोर की शांति में दिखे संकेत हमें याद दिलाते हैं कि प्रभु हर दिन नए सन्नाटे के साथ आता है—हमें उसकी उपस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। अपनी स्मृतियों में चारों ओर की सुगंध-सी भोर की ताजा अनुभूति को ग्रहण करें और दैनंदिन जीवन में उसके उपदेशों को लागू करें।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षेप:
– प्रेरितों के कार्य 5:15-16: शहर के बीचों-बीच सेवक-सेविका कैसे प्रभु के लिए खुलती है; बार-बार साथ आने का संदेश।
– मत्ती 7:7: सतत आर्धी-आह्वान से ईश्वर के पास जाना; खोज करने की प्रेरणा।
– योहेशुवा 1:8: प्रतिदिन नियमपूर्वक पवित्र वचन का पठन-प्रयास, मनन और अनुप्रयोग।
संक्षेप
भोर के समय मंदिर में लोगों का आना इस बात की पुष्टि करता है कि यीशु का शिक्षण उनके हृदय पर प्रभाव डाल रहा है, और उनके जीवन की सुबह-सी ताजगी से खड़ी हो रही है। यह पाठ हमें यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर के वचन के प्रति हमारे समर्पण और नियमित पठन-पाठन से आत्मिक जीवन अधिक पवित्र और सुदृढ़ होता है।
एंट्री नोट: इस पंक्ति के विश्लेषण में जॉन-हेन्री, अॅल्बर्ट बर्नेस, आडम क्लार्क के प्रकाशन-उद्धरण के छोटे-छोटे अंश यदि उपलब्ध हों, वे आवश्यक रूप से उद्धृत किए गए हैं।