Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 21:1 लूका 21:2 लूका 21:3 लूका 21:4 लूका 21:5 लूका 21:6 लूका 21:7 लूका 21:8 लूका 21:9 लूका 21:10 लूका 21:11 लूका 21:12 लूका 21:13 लूका 21:14 लूका 21:15 लूका 21:16 लूका 21:17 लूका 21:18 लूका 21:19 लूका 21:20 लूका 21:21 लूका 21:22 लूका 21:23 लूका 21:24 लूका 21:25 लूका 21:26 लूका 21:27 लूका 21:28 लूका 21:29 लूका 21:30 लूका 21:31 लूका 21:32 लूका 21:33 लूका 21:34 लूका 21:35 लूका 21:36 लूका 21:37 लूका 21:38



शब्द का महत्व: लूका 21:27 और उद्धार की महिमा
यह वाक्य ऐसे समय की प्रतीक्षा की पुष्टि करता है जब परमेश्वर के पुत्र के आगमन का दृश्य पूरी दुनिया के सामने होगा। यह केवल भविष्यवाणी की बात नहीं है, बल्कि जीवित विश्वासियों को आश्वस्त करने वाला संदेश है कि दुःखों के बीच भी ईश्वर की सत्ता और महिमा स्थिर है। जब लोग दिखेंगे कि वे प्रभु के आगमन के समय उसे बादलों पर आते देखेंगे, तो यह निर्णायक न्याय और उद्धार की दिशा में एक नया अध्याय खोल देगा।
परिप्रेक्ष्य और मूल आशय
ईसा मसीह के शिक्षण में यह दृढ़ता है कि मानव इतिहास एक दृढ़ क्रम में आगे बढ़ रहा है: पीड़ा, प्रतीक्षा, फिर महिमा-युक्त वापसी। इस वाक्य में “मनुष्य के पुत्र” के साथ “बादल पर आना” की छवि बाइबल के ऐतिहासिक दर्शनों से जुड़ती है—प्रकटन का अन्तिम निर्णयन। प्रकाशितवाक्य(प्रका. 1:7) और दानि. 7:13 की संदर्भित टिप्पणियाँ इसे समर्थ बनाती हैं कि यह आगमन सार्वभौमिक और निर्णायक होगा, न कि केवल आंतरिक परिवर्तन का संकेत।
मुख्य संदेश
पवित्रशास्त्रीयों के दृष्टिकोण (संक्षेप)
एडम क्लार्क और जोसेफ मथ्यू हेनरी के विचारों से संबद्ध संकेत मिलते हैं कि इस आगमन में ग्लोरियस पर्सन और महिमावान शक्ति देखने को मिलती है। यह दृश्य पृथ्वी पर जो व्यापक परिवर्तन लाएगा, उसे समझाते हुए वे याद दिलाते हैं कि प्रभु का लौटना पाप के प्रभावों को समाप्त कर देगा और सत्य के साथ नये आशीर्वाद स्थापित करेगा।
बंधुत्वपूर्ण विषय-समर्थन
इस पदक में तीन समाहार-निर्देश प्रमुख रूप से उभरते हैं:
क्रॉस-रेफरेन्सेस (संक्षेप) और उनके लिंक
1) मत्ती 24:30— वाक्य की प्रस्तुति में आगमन की भव्यता और चिन्हों का उल्लेख, जो इस पाठ को उस दायरे से जोड़ता है where प्रभु की महिमा स्पष्ट दिखती है।
2) दानी 7:13— “मानव-संतान” की अत्यंत महिमा और सत्तात्मक अधिकार की प्रतीकात्मक उपस्थिति; यह वही शक्ति है जिसे यहाँ बादलों पर देखा जाएगा।
3) प्रकाशितवाक्य 1:7— अंत-युग की नई दृष्टि—हर एक ने इसे देखा होगा; यह पद भी उसी महिमा की वापसी का उद्घोष करता है।
व्यावहारिक ध्यान और आवेदन
हम कैसे इस दृष्टि से प्रेरणा पाते हैं? यह आवश्यक है कि हम अपनी व्यक्तिगत यात्रा में तैयार रहें—पाप से बचना, ईश्वर के साथ प्रार्थना-जीवन को दृढ़ करना और प्रतिदिन की आशा को बनाए रखना। यह वाक्य हमें स्मरित कराता है कि जीवन के कठिन क्षणों में भी ईश्वर की महिमा स्थिर है, और हमें प्रत्यक्ष विश्वास से जीना है ताकि अंतिम मिलन सुगमता से पाया जा सके।
संक्षिप्त विभागीय संदर्भ
कुल मिलाकर, यह वाक्य परमेश्वर की महिमा के अगम्य उद्देश्य और मानव इतिहास में उद्धार की योजना की पुष्टि करता है।