Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 21:1 लूका 21:2 लूका 21:3 लूका 21:4 लूका 21:5 लूका 21:6 लूका 21:7 लूका 21:8 लूका 21:9 लूका 21:10 लूका 21:11 लूका 21:12 लूका 21:13 लूका 21:14 लूका 21:15 लूका 21:16 लूका 21:17 लूका 21:18 लूका 21:19 लूका 21:20 लूका 21:21 लूका 21:22 लूका 21:23 लूका 21:24 लूका 21:25 लूका 21:26 लूका 21:27 लूका 21:28 लूका 21:29 लूका 21:30 लूका 21:31 लूका 21:32 लूका 21:33 लूका 21:34 लूका 21:35 लूका 21:36 लूका 21:37 लूका 21:38



लूका 21:34 का स्पष्टार्थ और संदर्भ
यूहन्नी ईसा मसीह अपने अंतिम समय के निर्देश दे रहे हैं जब वे चितायों, घटनाओं और भविष्यवाणियों के संकेत बता रहे हैं। इस प्रकरण में वे शिष्यों को सचेत करते हैं कि वे सतर्क रहें, ताकि उन्होंने जीवन की चिंताओं और सांसारिक सुख-सुविधाओं से अन्दर खुमार-मतवालेपन न पाले। उनके मन भीतर से स्थिर रहें, ताकि अचानक आए दिन के समय में वे तैयार हों और उनका आत्मिक अभ्यास न टूटे।
मुख्य अर्थ
इस वाक्य का मूल संदेश है—जीवन की चंचलता और सांसारिक चिंताओं के कारण हमारी आत्मा ढीली न हो जाए। यह चेतावनी एक आह्वान है कि भविष्य के संकटों की तैयारी अब से ही करें, न कि मुश्किल अवसर आने पर। ईश्वर की दृष्टि में, एक जागृत और सच्चे उत्साह के साथ जीना ही ईमानदारी का तरीका है।
तीन प्रमुख thèmes
अन्वयित अंश—अन्य पवित्र ग्रंथों से सम्बद्ध संदर्भ
• मत्यू 26:41: आत्मा willing पर शरीर निश्चल; जिम्मेदारी और प्रार्थना से स्थिरता।
• 1 पतरस 5:8: उकसाने वाले शात्रों के विरुद्ध सतर्क रहने की महत्ता।
• कुलुस्सियों 4:2: हर समय प्रार्थनामय बने रहना और आभार व्यक्त करना।
इन प्रेषणों से पता चलता है कि तत्परता, प्रार्थना और आत्म-नियंत्रण कैसे भय, चिंता और पतन से रक्षा करते हैं।
कई उपयोगी विचार और praktiक reflection
पवित्रता के प्रमुख संकेत
इस वचन के अनुसार, चरित्र की ताकत तब है जब हम क्रोध, चिंता या मत्तता में न उलझकर, धैर्य और आत्म-नियमन से जीते हैं। यह ईश्वर के राज्य के साथ हमारे संबंध की गहराई को बढ़ाता है और हमारे दैनिक निर्णयों में उजाले की तरह काम करता है।
संक्षिप्त समापन
यद्यपि जीवन की शोहरत और चिन्ताएँ रहते हैं, यीशु हमें स्मरण दिलाते हैं कि हमारी सुरक्षा आत्मा की सजगता में है। हमें अपने मन को शांति और सतर्कता के साथ बनाए रखना है ताकि वह दिन जब आये, हम निर्मलक रूप से तैयार ही रहें।
उद्धरण-संदर्भ (सारांश)
यहाँ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे उद्धरण लगभग संक्षेप में समाहित किए गए हैं; संपूर्ण पाठ के बजाय उनके तत्व प्रेरणाओं के संकेत हैं:
“सावधान रहो”—आत्मा की स्थिरता के लिए आवश्यक चेतावनी।
“मन खुमार और मतवालेपन से सुस्त हो जाएँ”—जीवन की चिंता कितनी भी बड़ी हो, आत्मा को प्रार्थना और विश्वास से बाँधे रखना चाहिए।
“और वह दिन तुम पर फंदे के समान अचानक आ पड़े”—तुरंत और अप्रत्याशित समय के लिए तैयार रहना आवश्यक है।