Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 3:1 लूका 3:2 लूका 3:3 लूका 3:4 लूका 3:5 लूका 3:6 लूका 3:7 लूका 3:8 लूका 3:9 लूका 3:10 लूका 3:11 लूका 3:12 लूका 3:13 लूका 3:14 लूका 3:15 लूका 3:16 लूका 3:17 लूका 3:18 लूका 3:19 लूका 3:20 लूका 3:21 लूका 3:22 लूका 3:23 लूका 3:24 लूका 3:25 लूका 3:26 लूका 3:27 लूका 3:28 लूका 3:29 लूका 3:30 लूका 3:31 लूका 3:32 लूका 3:33 लूका 3:34 लूका 3:35 लूका 3:36 लूका 3:37 लूका 3:38



मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु
लूका 3:36 वंशावली में यह दर्शाता है कि यीशु का जन्म केवल ऐतिहासिक घटना नहीं बल्कि परमेश्वर के विश्वासयोग्य प्रतिज्ञाओं की पूर्ति है—वह मानव इतिहास की अर्थिका धारा के भीतर उपस्थित है और नूह से लेकर अब्राहम तक के वादों से जुड़ा हुआ है।
साहित्यिक संदर्भ
लूका अध्याय 3 में यीशु की सजीव वंशावली दी गई है। यहाँ 36वाँ पदु वंशावली की मद्धिम कड़ी बताकर यह रेखांकित करता है कि यीशु मानव जाति के इतिहास में गहरे जड़ें रखते हैं। लूका की सूची विशेष रूप से योग्यता और कानूनी संबंध को उजागर करती है—यह वंशावली अवलंबी ऐतिहासिक परंपराओं के अनुरूप है और लूका के व्यापक लक्ष्य से मेल खाती है: सुसमाचार का ऐतिहासिक और सार्वभौमिक दायरा दिखाना।
धार्मिक-शिक्षात्मक महत्व
यह पदु पाठ तीन रूपों में महत्वपूर्ण है:
पवित्र शास्त्र से संबंध
कुछ उपयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनका संबंध:
मनन के प्रश्न
पढ़ने के बाद विचार करने योग्य कुछ प्रश्न:
मिथकीय और पारम्परिक टिप्पणियाँ (संक्षेप)
मैथ्यू हेन्री का जोर सामान्यतः शक्ति और परम्परा के आध्यात्मिक परिणामों पर रहता है; अल्बर्ट बार्न्स ऐतिहासिक और व्याख्यात्मक सटीकता पर ध्यान देते हैं; एडम क्लार्क वंशावली के भाष्य और बाइबिल की प्राचीन परंपराओं के संबंधों को जोड़ते हैं। अल्बर्ट बार्न्स के समान विचारों में यह पाया जाता है कि लूका इतिहास को प्रमाणित करना चाहता है, और मैथ्यू हेन्री के रुख में यह उल्लेखनीय है कि वंशावली परमेश्वर की निरन्तरता का सबूत है। (इस अनुच्छेद में सीधे उद्धरण नहीं दिए गए हैं।)
संक्षेप निष्कर्ष
लूका 3:36 वंशावली की छोटी पंक्ति न केवल एक शाब्दिक सूची है, बल्कि यह विश्वास को जड़ें देती है: मसीह इतिहास का फल है और परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ पीढ़ियों में साकार हुईं। इस पदु से सीख यह है कि परमेश्वर के उद्धार के काम में मानव इतिहास की साधारण और असाधारण दोनों धाराएँ एक साथ चलती हैं।