Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 3:1 लूका 3:2 लूका 3:3 लूका 3:4 लूका 3:5 लूका 3:6 लूका 3:7 लूका 3:8 लूका 3:9 लूका 3:10 लूका 3:11 लूका 3:12 लूका 3:13 लूका 3:14 लूका 3:15 लूका 3:16 लूका 3:17 लूका 3:18 लूका 3:19 लूका 3:20 लूका 3:21 लूका 3:22 लूका 3:23 लूका 3:24 लूका 3:25 लूका 3:26 लूका 3:27 लूका 3:28 लूका 3:29 लूका 3:30 लूका 3:31 लूका 3:32 लूका 3:33 लूका 3:34 लूका 3:35 लूका 3:36 लूका 3:37 लूका 3:38


लूका 3:37 परिवर्तनशील पथ
इस आयत में पुराने तिथि-सूचियों के क्रम में रहने वाले पूर्वजों का उल्लेख आता है, जो यहूदियों की वंशावली और भविष्यिक उद्धार के लिए परमेश्वर के योजनाबद्ध कार्य के भाग के रूप में देखा जाता है। लूका पाँचवाँ अध्याय यीशु के प्रेरित जीवन के पहले भाग में मानवजाति की गवाही के लिए संदर्भ बनाते हैं—यह बताते हैं कि परमेश्वर ने इतिहास को किस प्रकार एक उद्देश्य के साथ गढ़ा है। यहाँ का वंश-उद्धरण विशेष रूप से यह दिखाता है कि यीशु का आगमन एक बड़े कल-पट्ट की कड़ी है, जिसमें से हर नाम परमेश्वर की शक्ति और विधान के अनुसार चलता है।
मुख्य विचार
इस व verse के केंद्र में यीशु के इतिहास-सम्बंधी संपूर्ण काल-वृत्त के साथ परमेश्वर के चक्र की पुष्टि है। लूका 3:37 में जो महापरिवार, महलों, पहचानों के नाम आते हैं—वे यह दर्शाते हैं कि ऊपरवाला योजना-निर्माता कैसे अनुवर्ती पीढ़ियों के माध्यम से चिरस्थाई उद्देश्य की पूर्ति करता है। यह आयत एक स्मरण-शक्ति जगाने वाला तथ्य देती है: प्रकृति की सृष्टि से लेकर उद्धार तक, एक क्रम और नाम-योजनाएं क्रमबद्ध रूप से हर कदम पर चलती हैं।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पदों की ठोस दिशा
यथार्थ संदर्भतः, ऊपर के क्रम से जुड़े क्रॉस-रेफरेंसेस इस प्रकार हैं: बार्न्स, हन्निंगी-आदि के हलफनामे में कुछ पहिले नामों के महत्व और धारणाओं के साथ उद्धृत हैं; एडल्वर्ड क्लार्क के टिप्पणी-उद्धरणों में भी इन नामों के क्रम और उद्देश्य का स्पष्टीकरण मिलता है। इन स्रोतों में सामान्यतः कहा गया है कि वंश-क्रम यीशु के मानव-जन्म और उद्धार की पुष्टि है, और हर नाम एक ऐतिहासिक दस्तावेज बनकर परमेश्वर के सन्निकट पहुँच बनाते हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षिप्त सम्यक स्पष्टीकरण
1) याकूब के पुत्रों की सूची के संदर्भ: यह दर्शाता है कि वंश षड़यंत्र नहीं, बल्कि आशीर्वाद के प्रवाह का भाग है।
2) इतिहास का क्रम और उद्धार की योजना: पुराने संदिग्ध नाम भी उद्धार की दिशा को पुष्ट करते हैं, जहां यीशु का जन्म लक्ष्य बनकर आता है।
3) प्रत्यक्ष उद्धरणों के अलावा, वंश-आधारित शिक्षाओं को समेकित कर यह बताता है कि परमेश्वर समयानुसार हर कदम सम्हालते हैं।
संक्षिप्त समरी
लूका 3:37 में दिखाया गया नाम-क्रम एक बड़े ईश्वर-कार्य की पुष्टि है: इतिहास के हर चरण में परमेश्वर की योजना स्पष्ट है, और यीशु मसीह के आगमन के साथ वह योजना पूर्णता पाती है। यह आयत हमें यह याद दिलाती है कि विश्वास और धैर्य के साथ अतीत के अनुभव भी उद्धार की रोशनी में जुड़ते हैं।
याद रखिए: यह commentary सार्वजनिक-डोमेन बाइबल-विश्लेषणों के आधार पर तैयार किया गया है, और Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के उद्धृत बिंदुओं को आवश्यकतानुसार समेकित किया गया है।