Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 10:1 मरकुस 10:2 मरकुस 10:3 मरकुस 10:4 मरकुस 10:5 मरकुस 10:6 मरकुस 10:7 मरकुस 10:8 मरकुस 10:9 मरकुस 10:10 मरकुस 10:11 मरकुस 10:12 मरकुस 10:13 मरकुस 10:14 मरकुस 10:15 मरकुस 10:16 मरकुस 10:17 मरकुस 10:18 मरकुस 10:19 मरकुस 10:20 मरकुस 10:21 मरकुस 10:22 मरकुस 10:23 मरकुस 10:24 मरकुस 10:25 मरकुस 10:26 मरकुस 10:27 मरकुस 10:28 मरकुस 10:29 मरकुस 10:30 मरकुस 10:31 मरकुस 10:32 मरकुस 10:33 मरकुस 10:34 मरकुस 10:35 मरकुस 10:36 मरकुस 10:37 मरकुस 10:38 मरकुस 10:39 मरकुस 10:40 मरकुस 10:41 मरकुस 10:42 मरकुस 10:43 मरकुस 10:44 मरकुस 10:45 मरकुस 10:46 मरकुस 10:47 मरकुस 10:48 मरकुस 10:49 मरकुस 10:50 मरकुस 10:51 मरकुस 10:52



मरकुस 10:4 — त्याग-पत्र और वैवाहिक विवाद का पहली चर्चा
यह कमेंटARY बताता है कि यीशु के समय में विवाह-विच्छेद के बारे में क्या प्रचलन था और इसका आध्यात्मिक संकेत कैसे निकाला जाता है। मरकुस 10:4 में उद्धरित वाक्य, "मूसा ने त्याग-पत्र लिखने और त्यागने की आज्ञा दी है," परमेश्वर के नियमों के पुराने व्यवस्था-काल के जीवन-व्यवहार से जुड़ा एक कड़ा कानूनी चरण है, जो स्थायित्व और प्रतिबद्धता के महत्व को बताता है। इस कथन के पीछे न केवल कानून की कठोरता है बल्कि उसमें निहित मनुष्यों के हृदय के परिवर्तन की आवश्यकता है।
प्रखर संदर्भ और मूल संवेदना
सुत्रधारक संरचना में यह वाक्य दिखाता है कि मूसा ने तलाक की व्यवस्था स्पष्ट की ताकि विवाह-बंधन में अस्थिरता से बचा जा सके, परन्तु यह भी स्पष्ट है कि परमेश्वर की इच्छा प्रेम-सम्बन्ध की पवित्रता और एकजुटता है। वैवाहिक संबंध के कारण-कार्य में कानून का उद्देश्य सुरक्षा और दायित्व-निष्ठा है, न कि केवल प्रयोगशाला-सी नीति।
मुख्य संदेश
इस verse में प्रमुख संदेश यह है कि परमेश्वर का ढाँचा विवाह-बंधन को मान्यता देता है और तलाक एक अपूर्ण विकल्प है। यीशु के समर्थन के पीछे यीशु के शिक्षण का मूल सरल नियम है—जो लोग विवाह करते हैं उन्हें एक दूसरे के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए; त्याग-पत्र के द्वारा संबंधों को अस्थिर बनाना-यह मानवीय कठोरता का परिणाम है, न कि ईश्वरीय इच्छा।
अन्य विश्वास-आधार विचार
1) विवाह-बंधन की पवित्रता: पुस्तक-वृत्त में आम तौर पर कहा गया है कि विवाह एक दिव्य बन्धन है जो ईश्वर द्वारा जोड़ा गया है।
2) दयालुता और पुनःस्थापना: तलाक के विकल्प के साथ यह संकेत करता है कि ईश्वर हर विवाहित जोड़े के लिए पुनःस्थापना और परिवर्तन की राह खोलते हैं, जब दिल में संतोष नहीं रहता।
3) समुदाय की भूमिका: समाज और परिवार विवाह-बंधन की रक्षा करते हैं, ताकि बच्चों और अपेक्षित विश्वास के बीच स्थिरता बनी रहे।
महत्वपूर्ण क्रॉस-रेफरेंसे
• मत्ती 19:8 — यीशु ने विवाह-बंधन का मूल उद्देश्य पृथ्वी पर ईश्वर के नियम के अनुरूप जाना बताया।
• व्यवाद 24:1-3 — मूसा के कानून में तलाक-प्रथा का मूल स्रोत और उद्देश्य समझ में आता है।
• मलाकी 2:14-16 — विवाह की प्रतिष्ठा और विश्वास के साथ संगति पर बल देता है कि परमेश्वर विवाह के बन्धन को क्यों मानते हैं।
छोटे-से निष्कर्ष और शिक्षण
इस वचन के साथ हम सीखते हैं कि व्यवस्था-कथा में तलाक जैसी कड़वाहट कभी भी अंतिम उद्देश्य नहीं है; परमेश्वर की दृष्टि में प्रेम, निष्ठा और एकता सर्वोपरि है। यदि परिस्थितियाँ कठिन हों, तो भी ईश्वर के प्रेम को सक्रिय रखना चाहिए—ताकि रिश्ते पुनःजीवित हो सकें और हर व्यक्ति को सम्मान मिले।
संक्षिप्त देवotional prayer
परमेश्वर, तू हमारे विवाहों को अपनी पवित्रता से जोड़े रख; कठिन समय में भी प्रेम और क्षमा की राह दिखा और हमारी वाणी-व्यवहार को तेरे नियम के अनुरूप बनाला; Amen.
श्रोत-उद्धरण (उद्धरण-सार): मैथ्यू हेनरी, ऐलबर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-शैली से सम्मिलित संकेतन—उद्धरण के केवल छोटे अंश सन्निहित हैं, पूर्ण पंक्ति नहीं।