मरकुस 10:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पर सृष्टि के आरम्भ से, परमेश्‍वर ने नर और नारी करके उनको बनाया है। (उत्प. 1:27, उत्प. 5:2)

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मरकुस 10:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

मरकुस 10:6 के संदर्भ में प्रारम्भिक संदर्भ और सार

यह पद मरकुस के Gospel का भाग है, जहाँ यीशु बच्चों के आचरण और विवाह-जीवन के बारे में स्पष्ट हिदायत दे रहे हैं। पाठ हिदायत देता है कि परमेश्वर की सृष्टि कभी भी बहुधीय या निष्क्रिय नहीं रही; आरम्भ से उसने मानव को पुरुष और स्त्री के रूप में बनाकर एक पवित्र व्यवस्था रची है।

पवित्र पाठ का गहरा अर्थ

“पर सृष्टि के आरम्भ से, परमेश्‍वर ने नर और नारी करके उनको बनाया है” का अर्थ यह है कि महिला और पुरुष दोनों प्रतिष्ठित हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं। परमेश्वर नेCreation के आरम्भ में उन्हें विशिष्ट दायित्वों और समान मान्यता के साथ बनाया है; इसलिए विवाह और पुरुष-स्त्री के रिश्ते में विविधता के बावजूद, दोनों एक ही मानव-आदर्श के भाग हैं। यह संकेत देता है कि सामाजिक निर्णयों या संस्कृति-परिवर्तनों के बावजूद परमेश्वर की योजना स्थायी है।

कुंजी शब्दों की व्याख्या

  • : यह बताता है कि ईश्वर की चिरस्थायी योजना शुरू से ही स्पष्ट है—मानव बनावटी संरचना, क्रम और विवाह-रचना आदर्श के साथ।
  • : पुरुष और महिला दोनों की रचना का सम्मान। इनके बीच समान मानवीय मूल्य और आपसी सहयोग स्पष्ट रहता है।

अन्य प्रचलित आयतों से सहानुभूति

उत्पत्ति 1:27 और उत्पत्ति 5:2 में भी वही तथ्य प्रकट होता है कि परमेश्वर ने मानव को पुरुष-स्त्री रूप में बनाया। यह विचार मरकुस के पाठ के सामाजिक-आचार पर जोर देता है: विवाह, प्रेम-पूर्वक सेवा और परिवार-निर्माण परमेश्वर की इच्छा के अनुसार हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका छोटा विवरण

- उत्पत्ति 1:27: पुरुष-स्त्री की रचना का मूल सिद्धांत देता है—दोनों भगवान की छवि के अनुसार बनाए गए।

- उत्पत्ति 5:2: विवाह और पुरुष-स्त्री के मिलन की पूर्व-निर्धारित मान्यता दिखाती है कि वे साथ-साथ जीवन निभाने के लिए बनाए गए हैं।

- मरकुस 9:47-48: रिश्तों में एक दूसरे के साथ ईमानदारी और सम्मान कैसे निभें, यह बात आगे बढ़ाई गई है।

आज के समय की व्यावहारिक दृष्टि

- हर जोड़ा, हर परिवार यह समझे कि दोनों सहभागी हैं और एक-दूसरे के सम्मान के बिना उन्नति संभव नहीं।

- सामाजिक भूमिका-निर्धारण में भी प्रभु की रचना के अनुसार, प्रेम, सम्मान, और पारस्परिक सहमति पर बल दें।

संहिताबद्ध निष्कर्ष

इस पंक्ति से स्मरण होता है कि परमेश्वर ने दुनिया की रचना पुरुष-स्त्री के संयुक्त सहयोग के लिए की है; यह सम्बन्ध स्थिर, पवित्र और एक-दूसरे के साथ जिम्मेदारी निभाने की उच्चतम प्रेरणा देता है।

सूचित उद्धरणों की पहचान

यदि उद्धरण की आवश्यकता हो तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट छोटे कथन का उल्लेख किया जा सकता है। किन्तु इस प्रस्तुति में उन उद्धरणों का पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है; स्थान-रूप में उनके सिद्धांतों का सार समाहित किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मरकुस 10:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उसने नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टि की और उन्हें आशीष दी, और उनकी सृष्टि के दिन उनका नाम आदम रखा*। (मत्ती 19:4, मर. 10:6)

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तब परमेश्‍वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्‍पन्‍न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्‍वर ने उसको उत्‍पन्‍न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की। (मत्ती 19:4, मर. 10:6, प्रेरि. 17:29, 1 कुरि. 11:7, कुलु. 3:10,1, तीमु. 2:13)

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और कहेंगे, “उसके आने की प्रतिज्ञा कहाँ गई? क्योंकि जब से पूर्वज सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्टि के आरम्भ से था।”

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