Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मरकुस 10:6 के संदर्भ में प्रारम्भिक संदर्भ और सार
यह पद मरकुस के Gospel का भाग है, जहाँ यीशु बच्चों के आचरण और विवाह-जीवन के बारे में स्पष्ट हिदायत दे रहे हैं। पाठ हिदायत देता है कि परमेश्वर की सृष्टि कभी भी बहुधीय या निष्क्रिय नहीं रही; आरम्भ से उसने मानव को पुरुष और स्त्री के रूप में बनाकर एक पवित्र व्यवस्था रची है।
पवित्र पाठ का गहरा अर्थ
“पर सृष्टि के आरम्भ से, परमेश्वर ने नर और नारी करके उनको बनाया है” का अर्थ यह है कि महिला और पुरुष दोनों प्रतिष्ठित हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं। परमेश्वर नेCreation के आरम्भ में उन्हें विशिष्ट दायित्वों और समान मान्यता के साथ बनाया है; इसलिए विवाह और पुरुष-स्त्री के रिश्ते में विविधता के बावजूद, दोनों एक ही मानव-आदर्श के भाग हैं। यह संकेत देता है कि सामाजिक निर्णयों या संस्कृति-परिवर्तनों के बावजूद परमेश्वर की योजना स्थायी है।
कुंजी शब्दों की व्याख्या
अन्य प्रचलित आयतों से सहानुभूति
उत्पत्ति 1:27 और उत्पत्ति 5:2 में भी वही तथ्य प्रकट होता है कि परमेश्वर ने मानव को पुरुष-स्त्री रूप में बनाया। यह विचार मरकुस के पाठ के सामाजिक-आचार पर जोर देता है: विवाह, प्रेम-पूर्वक सेवा और परिवार-निर्माण परमेश्वर की इच्छा के अनुसार हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका छोटा विवरण
- उत्पत्ति 1:27: पुरुष-स्त्री की रचना का मूल सिद्धांत देता है—दोनों भगवान की छवि के अनुसार बनाए गए।
- उत्पत्ति 5:2: विवाह और पुरुष-स्त्री के मिलन की पूर्व-निर्धारित मान्यता दिखाती है कि वे साथ-साथ जीवन निभाने के लिए बनाए गए हैं।
- मरकुस 9:47-48: रिश्तों में एक दूसरे के साथ ईमानदारी और सम्मान कैसे निभें, यह बात आगे बढ़ाई गई है।
आज के समय की व्यावहारिक दृष्टि
- हर जोड़ा, हर परिवार यह समझे कि दोनों सहभागी हैं और एक-दूसरे के सम्मान के बिना उन्नति संभव नहीं।
- सामाजिक भूमिका-निर्धारण में भी प्रभु की रचना के अनुसार, प्रेम, सम्मान, और पारस्परिक सहमति पर बल दें।
संहिताबद्ध निष्कर्ष
इस पंक्ति से स्मरण होता है कि परमेश्वर ने दुनिया की रचना पुरुष-स्त्री के संयुक्त सहयोग के लिए की है; यह सम्बन्ध स्थिर, पवित्र और एक-दूसरे के साथ जिम्मेदारी निभाने की उच्चतम प्रेरणा देता है।
सूचित उद्धरणों की पहचान
यदि उद्धरण की आवश्यकता हो तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट छोटे कथन का उल्लेख किया जा सकता है। किन्तु इस प्रस्तुति में उन उद्धरणों का पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है; स्थान-रूप में उनके सिद्धांतों का सार समाहित किया गया है।