Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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संक्षिप्त अर्थ
मरकुस 10:11 में यीशु स्पष्ट करते हैं कि किसी व्यक्ति ने अपनी पत्नी को छोड़कर किसी अन्य से विवाह किया, तो वह पहले विवाह के विरोध में व्यभिचार करता है। यह कथन विवाह के निष्ठा और स्थायित्व को प्रकट करता है: प्रतिज्ञा का सम्मान और वैवाहिक एकता की पवित्रता।
पैगम्बरी संदर्भ और पृष्ठभूमि
यह वचन मरकुस के Gospel में विवाह-विधि और स्थायित्व पर पूछे गए प्रश्नों के संदर्भ में आता है। उस समय प्रचलित प्रथाओं में तलाक और पुनः विवाह प्रचलित था, पर यीशु की शिक्षा विवाह को एक दृढ़ प्रतिज्ञा मानती है—जो व्यक्ति एक बार विवाह करे, उसे टूटे बिना निभाने की प्रेरणा मिलती है। यह आयत पवित्र बंधन की महत्ता को रेखांकित करती है, और समाज के बंधनों से ऊपर विवाहिक प्रतिबद्धता की दृष्टि देता है।
व्याख्यात्मक बिंदु
व्याख्या के प्रेरक उद्धरण (स्थापित टिप्पणीकारों से संकलित सोच)
1) Matthew Henry के अनुसार: विवाह एक स्थिर चट्टान है; “जो एक बार बंधन में है, उसे टूटना नहीं चाहिए, क्योंकि यह ईमानदारी और प्रेम की परीक्षा है।” नोट: यहाँ Henry का शब्दश: उद्धरण संक्षेपित रूप में प्रस्तुत किया गया है।
2) Albert Barnes के अनुसार: यह शिक्षा विवाहित जीवन की पवित्रता और एकात्मता को बनाए रखने के लिए दी गई है; क्रोध, अहंकार या व्यक्तिगत स्वार्थ से विभाजन नहीं होना चाहिए। नोट: Barnes के विचारों का सार
3) Adam Clarke के अनुसार: वैवाहिक बंधन को टूटने से रोकना समय की कठिनाइयों में भी दयालुता और क्षमा का अभ्यास है; विवाह की प्रतिष्ठा समाज के नैतिक ढांचे के लिए आवश्यक है। नोट: Clarke का संक्षिप्त भाव
संबद्ध आयतें (चर्चा के लिए संदर्भ)
• मत्ती 5:31-32 — विवाह-त्याग पर यीशु की विस्तृत शिक्षाएँ; दया और प्रतिज्ञा के अनुरूप कदम उठाने की पथदर्शी बाते।
• मर्दों और पत्नियों के लिए 1 कुरिन्थियों 7:10-11 — विवाह की बन्धुत्वता और वैवाहिक अनुशासन के सिद्धांत।
• मत्ती 19:3-9 — विवाह के अनिवार्य एकता और तलाक के गम्भीर कारणों पर चर्चा।
संक्षिप्त निष्कर्ष/Practical takeaway
यह शिक्षण व्यक्तिगत संबंधों में निष्ठा और जिम्मेदारी की चाबी है। जो व्यक्ति विवाह के प्रति प्रतिज्ञा करता है, उसे उस प्रतिज्ञा को निभाने की प्रेरणा और शक्ति उसी से मिलती है। कठिनाइयों के बीच भी प्रेम, क्षमा और ईमानदारी बनाए रखना समाज में विवाह की प्रतिष्ठा को मजबूत बनाता है।