Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मरकुस 3:19 — पवित्र सूत्र की एक कड़ी
इस वाक्य में यीशु के चयन के बाद उनके साथ रहने वालों की सूची में यूदा इस्करियोती का नाम आता है, जिसने अंततः उन्हें पकड़वाने के लिए व्यवस्था की संलिप्तता में भाग लिया। यह पाठ मारकुस के प्रभावपूर्ण चित्त-चित्रण का हिस्सा है जिसमें प्रभु के प्रेरितों के विविध व्यक्तित्व और उनकी निष्ठा-परख सामने आती है। यह परिचय देता है कि प्रभु की योजना में चुनिंदा साथियों के पास भी मानव कमजोरियाँ और असफलताएँ थीं, फिर भी वे सेवक-उद्देश्य में शामिल रहे।
मुख्य भावार्थ
यह वाक्य उन घटनाओं की पंक्ति की एक कड़ी है जिसमें यीशु अपने बारह प्रेरितों को चुनते हैं और उनके साथ एक निष्ठा-केविन अभियान शुरू करते हैं। यूदा इस्करियोती का नाम बतौर प्रेरित जुड़ना दिखाता है कि चढ़ते-उठते कदमों के बीच गिरावट भी संभव है; परन्तु प्रभु की योजना में हर व्यक्ति के योगदान का एक उद्देश्य होता है।
दो मुख्य विषय
संबंधित पद
इस पाठ के साथ नीचे तीन संबद्ध संदर्भ विचारयोग्य हैं—
प्रयोजनात्मक विचार
यद्यपि यूदा ने प्रभु के साथ अपने सम्बन्ध में दूरी बना ली, तथ्य यह है कि यीशु ने उन्हें भी चुना, ताकि भविष्य की घटनाओं में उनका योगदान सिद्ध हो सके। हमारे जीवन में भी ऐसा होता है कि हम गलतियों के बावजूद प्रभु की योजना में काम आते हैं, यदि हम तर्क-संरक्षण के बजाय ईमानदारी और बदलाव के लिए प्रेरित होते रहें।
संक्षिप्त समरी
मरकुस 3:19 प्रभु के चुने गए साथियों की सूची का एक भाग है, जिसमें यूदा इस्करियोती का उल्लेख है। यह पाठ स्पष्ट करता है कि प्रेरितों की यात्रा में मानव कमजोरियाँ भी चलती रहती हैं, परन्तु भगवान के उद्देश्य में परिवर्तन नहीं आता—हर शिक्षक, हर साथी, हर परिस्थिति उनके उद्देश्य को आगे बढ़ाने में एक भूमिका निभाते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) मत्ती 10:2-4 — प्रेरितों की सूची और यूदा का अंतर्भाव यह दर्शाता है कि चयन कितने प्रकार के व्यक्तित्वों के बीच हुआ।
2) यूहन्ना 6:70-71 — प्रभु ने कहा कि आप सभी को मैं ने नहीं चुना है; समय-समय पर यह विचार सामने आता है कि भीतर की निष्ठा कब मजबूत होती है।
3) लूका 22:3-6 — यूदा की योजना के अध्याय में क्रिया-प्रतिक्रियाओं का दृश्य प्रस्तुत होता है, जो कथा-निर्माण में निर्णायक मोड़ बनती है।