Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 3:1 मरकुस 3:2 मरकुस 3:3 मरकुस 3:4 मरकुस 3:5 मरकुस 3:6 मरकुस 3:7 मरकुस 3:8 मरकुस 3:9 मरकुस 3:10 मरकुस 3:11 मरकुस 3:12 मरकुस 3:13 मरकुस 3:14 मरकुस 3:15 मरकुस 3:16 मरकुस 3:17 मरकुस 3:18 मरकुस 3:19 मरकुस 3:20 मरकुस 3:21 मरकुस 3:22 मरकुस 3:23 मरकुस 3:24 मरकुस 3:25 मरकुस 3:26 मरकुस 3:27 मरकुस 3:28 मरकुस 3:29 मरकुस 3:30 मरकुस 3:31 मरकुस 3:32 मरकुस 3:33 मरकुस 3:34 मरकुस 3:35



मरकुस 3:34 — संदर्भित सेटिंग और संदेश
यह पद मरकुस के Gospel में Jesus के प्रचार-कार्य के बीच का दृश्य है, जब लोग उसे घेरे हुए हैं और उसमें से एक परिवार बनाम समाज के अन्य संबंधों के प्रश्न उभरते हैं। verses 20–35 के contexto में Jesus अपने उपदेशों और चिह्नों के साथ लोगों के बीच मौजूद मान्यताओं और रिश्तों की समझ को चुनौती देता है; इस पंक्ति में Jésus कहते हैं कि उनके आस-पास बैठे लोग उनके माता-पिता और भाई-बहन हैं।
इस पाठ से स्पष्ट होने वाले बिंदु
महत्त्वपूर्ण शब्दावलियाँ और प्रतीक
“जो उसके आस-पास बैठे थे” से भाव-व्यंजक संकेत मिलता है कि यीशु के समीप उपस्थित लोग उसकी शिक्षाओं के लिये पूर्ण समर्पण दिखाते हैं। यह दृश्य समुदाय और परिवार के मानक के बारे में एक नई परिभाषा देता है—क्या धार्मिक कर्तव्य और रिश्ते एक ही पत्रिका में चल सकते हैं, और कब वे एक दूसरे से ऊपर उठते हैं।
आइडिया-जोड़ने वाले क्रॉस-रेफरेन्स (संक्षेप)
- यीशु के साथ “परिवार” की असली पहचान: लूका 8:21 में यीशु कहते हैं कि जो सुनते हैं और पालन करते हैं, वही उसका परिवार है।
- सदस्यता और आस्था का नया परिवार: मत्ती 12:50 में यीशु इस बात को स्पष्ट करते हैं कि जो परम पिता की इच्छा करते हैं वही उनके भाई-बहन हैं।
- आस्था बनाम रक्त संबंध: तथाकथित पारिवारिक बन्धनों से सर्वोपरी Spiritual kinship की विचारधारा को दिखाने के लिए अन्य सुसमाचार कथन भी देखें।
प्रचलित विद्वानों के सार-चिन्ह (संक्षेप ग्लोस)
इस पाठ पर ऐतिहासिक बाइबल टिप्पणीकारों ने एक स्वर में कहा है कि Jesus के संदेश में परिवार की नई परिभाषा—विश्वास के साझा समुदाय—इस जातीय-धार्मिक संरचना के भीतर सत्य बनाती है।
Matthew Henry से एक सार बल— “परमेश्वर के राज्य में आध्यात्मिक सम्बन्ध सबसे ऊपर हैं; जो उस मिशन के साथ हैं, वही वास्तव में मेरे परिवार हैं।”
Albert Barnes से एक टिप्पणी-तीर— परिवार के संबंध से अधिक, अनुपालन और आस्था का क्रम है; परिवार का नया स्वरूप उन लोगों में बनता है जो सत्य के अनुसार चलें।
Adam Clarke से संक्षेप विचार— यीशु का उद्देश्य यह स्थापित करना है कि पिता की इच्छा के अनुसार आचरण करने वाले लोग ही ईश्वर के परिवार का अंश बनते हैं; यह नया समुदाय रक्त-रिश्तों से परे है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
- कठिन परिस्थितियों में भी विश्वास की साधना को प्राथमिकता दें: यदि आप यीशु के शिष्य बनना चाहते हैं, तो उसका संदेश और उसकी आज्ञाओं के अनुरूप अपने जीवन को ढालें।
- नया पारिवारिक संबंध बनाएं: चर्च आदि समुदायों के साथ गहरे रिश्ते बनाकर एक दूसरे की सहायता करें—यह Gospel की वास्तविक परिवार-रचना है।
- प्राकृतिक रिश्तों की परवाह बने, पर प्राथमिकता आध्यात्मिक कर्तव्य की हो: माता-पिता और भाइयों के साथ प्रेम कायम रखें, परंतु प्रभु के Kingdom की ओर उनकी देखभाल सबसे पहले हो।
समाप्ति में, यह पाठ यह सिखाता है कि ईश्वर के राज्य में परिवार की सच्ची परिभाषा उस समुदाय से है जो यीशु के प्रेम और आज्ञाओं को अपनाकर एक espiritual kinship बनाता है।