Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 3:1 मरकुस 3:2 मरकुस 3:3 मरकुस 3:4 मरकुस 3:5 मरकुस 3:6 मरकुस 3:7 मरकुस 3:8 मरकुस 3:9 मरकुस 3:10 मरकुस 3:11 मरकुस 3:12 मरकुस 3:13 मरकुस 3:14 मरकुस 3:15 मरकुस 3:16 मरकुस 3:17 मरकुस 3:18 मरकुस 3:19 मरकुस 3:20 मरकुस 3:21 मरकुस 3:22 मरकुस 3:23 मरकुस 3:24 मरकुस 3:25 मरकुस 3:26 मरकुस 3:27 मरकुस 3:28 मरकुस 3:29 मरकुस 3:30 मरकुस 3:31 मरकुस 3:32 मरकुस 3:33 मरकुस 3:34 मरकुस 3:35
मरकुस 3:26 काImmediate Setting
यूहन्ना और शास्त्रज्ञों के बीच येसु से भिडंत के क्रम में यह वाक्य आता है जब उन्हें शैतानी गतिविधियों के बारे में संदेह और असमंजस का सामना करना पड़ता है। यहाँ शैतान के विरुद्ध अलौकिक अधिकार की स्पष्ट स्थिति बताई जा रही है: यदि शैतान अपने ही विरोधी होकर भीतर-भीतर टकराहट मचाता है, फिर वह कैसे शासन कर सकता है? इसका तात्पर्य है कि भ्रमित ताकतें जब स्वयं टूट-फूट जायें—तो उनका प्रभाव समाप्त हो जाता है।
ईश्वर या विश्वास के बारे में यह पाठ क्या बताता है
यह पाठ स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के राज्य के विरुद्ध शैतानी शक्तियों का अस्तित्व तब तक टिके नहीं रह सकता जब तक वे एकता में निधारित रहे। उलटा, शैतान का असंगत व्यवहार—अपने अंदर की फूट—विश्वास और सत्ता के प्रताप को क्षीण कर देता है। यीशु यहाँ स्पष्ट करते हैं कि स्वर्गीय राज्य के विरुद्ध विरोध एक साथ रहने पर भी अंततः ध्वस्त हो जाता है; परमेश्वर का राज्य धर्म और सत्य के साथ आगे बढ़ता है, ना कि आंतरिक तनाव से जूझता हुआ।
重要 शब्द और चिह्न (क्लारिफिकेशन)
सीधे संबद्ध प्रकरण
1) मरकुस 3:22-27 में शैतान के विरुद्ध विभेदक तर्क और शिक्षा मिलती है—जब धर्मी शक्तियाँ भीड़ में एकता में रहती हैं, तब राज्य बढ़ता है; लेकिन आपसी फूट से नुकसान होता है।
2) मत्ता 12:25-29 और लूका 11:17-20 में यीशु बताते हैं कि “एकता में न signin”—स्वर्गीय राज्य की कृपा एकता पर निर्भर है।
पुनः मिलान और अन्य टिप्पणीकारों से संकलन
इस वाक्य पर Matthew Henry और Adam Clarke ने सम्यक रूप से यह दिखाया है कि परमेश्वर की सेना में विखंडन का स्थान नहीं, और शैतान की भीतर की फूट उसकी विजय को रोक देती है।
Matthew Henry से संक्षेप: “यदि शैतान अपना विरोधी होकर फूट डाले, तो वह कैसे शासन कर सकता है? अन्त उसकी हो जाता है।”
Adam Clarke से संक्षेप: यह वाक्य शैतानी सत्ता की असंगतता और परमेश्वर के राज्य की एकता को स्थापित करता है।
Albert Barnes से संक्षेप: यह कथन देखने देता है कि सूझ-बूझ से भरा विरोध भी अंततः परास्त होता है क्योंकि ईश्वर का राज्य एकत्व में चलता है।
आज के समय में उपयोगी अनुप्रयोग
- आस्था के क्षेत्र में एकता बनाए रखें: चर्च, परिवार और साथी विश्वासियों के बीच फूट से शांति और शक्ति घटती है; एकता से ही ईश्वर의 राज्य प्रभाव डाल सकता है।
- पहचानें कि असमानता और विरोध तब तक अस्थिर होते हैं जब तक वे परमेश्वर के अधिकार के विरुद्ध एकजुट रहते हैं; यदि अंदर भीतर फूट हो, तो बाहरी प्रभाव क्षीण होते हैं।
- पवित्रता का लक्ष्य: जीवन में वैर-भाव नहीं, बल्कि प्रेम, क्षमा और एकता।
संक्षेप सार
मरकुस 3:26 में यीशु यह स्पष्ट करते हैं कि अगर शैतानी सत्ता भी अपने भीतर फूट डाले, तो उसका अंत निश्चित है। परमेश्वर के राज्य की एकता और सत्ता शुद्ध प्रेम, सत्य और सामंजस्य पर आधारित है, जिसमें भीतर की फूट उसकी विजय को रोक नहीं सकती।