Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 3:1 मरकुस 3:2 मरकुस 3:3 मरकुस 3:4 मरकुस 3:5 मरकुस 3:6 मरकुस 3:7 मरकुस 3:8 मरकुस 3:9 मरकुस 3:10 मरकुस 3:11 मरकुस 3:12 मरकुस 3:13 मरकुस 3:14 मरकुस 3:15 मरकुस 3:16 मरकुस 3:17 मरकुस 3:18 मरकुस 3:19 मरकुस 3:20 मरकुस 3:21 मरकुस 3:22 मरकुस 3:23 मरकुस 3:24 मरकुस 3:25 मरकुस 3:26 मरकुस 3:27 मरकुस 3:28 मरकुस 3:29 मरकुस 3:30 मरकुस 3:31 मरकुस 3:32 मरकुस 3:33 मरकुस 3:34 मरकुस 3:35


मरकुस 3:31 पर सन्दर्भज्ञान
यह पद मरकुस के ग्यारहवें अध्याय के प्रारम्भिक घटनाचक्र का भाग है, जहाँ यीशु के परिवारजन—माता और भाई—येशु को ढूँढ़कर बाहर खड़े होकर उसे बुलाने के लिए आते हैं। कहानी को पहले संदर्भ में समझना आवश्यक है: यीशु अपनी शिक्षाओं और चमत्कारों से लोगों के बीच खड़े हैं; उसी समय उसका पारिवारिक समूह उसे देखने आता है, परन्तु जनता में खड़ी महिलाओं और भाइयों के प्रश्न से यह स्पष्ट होता है कि यह घटना सामाजिक और धार्मिक संदर्भों के बीच चलती है।
मुख्य अर्थ
इस verse में काफ़ी स्पष्ट संकेत मिलता है कि यीशु के आध्यात्मिक परिवार वास्तव में उनकी रक्षा, उनकी पहचान और उनकी सेवकाई के भागीदार हैं—परंपरागत परिवारिक भूमिका के साथ-साथ, वे उनके संदेश के प्रति आम जनता के साथ जुड़ाव को भी समर्पित हैं। बाहर खड़े होकर बुलाने का भाव यह बताता है कि कभी-कभी सामाजिक रिश्ते और पारिवारिक संरचना भी प्रभु के आह्वानों के सामने दूसरे स्थान पर आ जाते हैं, जब वे परम उद्देश्य की पुनर्रचना कर रहे हों।
2–3 प्रमुख विषय
संबंधित पाठ
कम तीव्रता के cross-reference विचार: मत्ती 12:46-50 में यीशु का परिवार उससे मिलने की कोशिश करता है और वह उनसे कहता है कि परमात्मा के परिवार वाले वही हैं जो ईश्वर की इच्छा रखते हैं; लूका 8:19-21 में भी यीशु यही विचार दोहराते हैं—कि जो लोग पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा के परिवार में हैं, वे वही हैं जो उसकी शिक्षाओं को मानते हैं।
व्यावहारिक विचार
हमारे जीवन में अक्सर काम, परिवार और समुदाय के दायित्व एक साथ आते हैं। यहाँ एक संतुलन मिलता है: प्रभु के उद्देश्य के सामने व्यक्तिगत संबंधों का स्थान सीमित हो सकता है, लेकिन आस्था-वृत्ति भी परिवार और समुदाय के लिए प्रेरणा बनती है। यदि हम तीमारदारी और सम्मान दे कर यीशु की बुलाहट का साथ दें, तो यह सामाजिक रिश्तों को भी नया अर्थ देता है।
कथनात्मक निष्कर्ष
मरकुस 3:31 हमें सिखाता है कि यीशु के जीवन-कार्य के प्रति प्राथमिकता क्या हो: परमेश्वर के राज्य के कार्य में आस्था और कर्तव्य प्रधान होते हैं। परिवार और समुदाय, सही समय पर, समर्थक बनते हैं—पर उनकी वास्तविक भूमिका तब है जब वे प्रभु के उद्देश्य के अनुरूप चलते हैं।
संशोधित टिप्पणी सार
प्राचीन टिप्पणीकारों के विचार मिलते हैं कि यीशु के संदेश के प्रकाश में पारिवारिक रिश्तों की भूमिका एक संतुलन है—कभी-कभी यह व्यक्ति-परिवार को भी ईश्वर के कार्यक्रम के अनुरूप ढालता है। (Matthew Henry, Adam Clarke, Albert Barnes—उद्धरण उद्धृत परिचय आवश्यक हो तो स्पष्ट किया जा सकता है।)
क्रॉस-रेफ़रेंस संक्षेप
1) मत्ती 12:46-50 — पिता-भाई-बहन के साथ सम्बन्ध और प्रभु की नई पारिवारिक परिभाषा; 2) लूका 8:19-21 — प्रभु के शब्दों को मानना ही परिवारजन का वास्तविक परिचय है; 3) म Mark 3:20-21 — परिवार की चिंता से प्रभु की सेवकाई का संघर्ष।