Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 7:1 मरकुस 7:2 मरकुस 7:3 मरकुस 7:4 मरकुस 7:5 मरकुस 7:6 मरकुस 7:7 मरकुस 7:8 मरकुस 7:9 मरकुस 7:10 मरकुस 7:11 मरकुस 7:12 मरकुस 7:13 मरकुस 7:14 मरकुस 7:15 मरकुस 7:16 मरकुस 7:17 मरकुस 7:18 मरकुस 7:19 मरकुस 7:20 मरकुस 7:21 मरकुस 7:22 मरकुस 7:23 मरकुस 7:24 मरकुस 7:25 मरकुस 7:26 मरकुस 7:27 मरकुस 7:28 मरकुस 7:29 मरकुस 7:30 मरकुस 7:31 मरकुस 7:32 मरकुस 7:33 मरकुस 7:34 मरकुस 7:35 मरकुस 7:36 मरकुस 7:37
मरकुस 7:16 का दृश्यावलोकन
यह संकेतिक वाक्य—“यदि किसी के सुनने के कान हों तो सुन ले”—मरकुस के ईसाई समुदाय के भीतर विश्वास और व्यवहार की एक सरल, पर गहरी चाबी प्रस्तुत करता है। यीशु की शिक्षाओं को सुनना केवल कानों का कार्य नहीं बनता, बल्कि हृदय की सुने जाने की इच्छा का प्रमाण है। यदि कोई सचमुच सुनना चाहता है, तो वह शिक्षा के अनुरूप जीवन में परिवर्तन खोज लेता है।
पंक्ति-वार ब्योरा (यह पाठ चaptर 7 के संदर्भ में)
यह वक्तव्य दास्य-परंपरा के अंतर्गत नहीं, बल्कि भीतर के आचरण से जुड़ता है। यीशु के पहले चरण के कई विरोधियों ने उसे कान पर नहीं सुना, परन्तु जो सुनना चाहते हैं, उनके लिए यह वाक्य मार्गदर्शक बनता है—ईश्वर की बातों को मानना और उनके अनुसार जीवन बिताना।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
अनुशीलन के लिए संबंधित बाइबल अंश
1) मरकुस 4:24—“जो कुछ सुनें, उसे उसी माप से मापिए।” छोटे संकेत स्पष्ट करते हैं कि सुनना कैसे सम्मानित किया जाए।
2) मत्ती 13:9—“जो सुने, उनके लिए यह समझना होगा।” यह बताता है कि सुनना कौन किस तरह समझ पाएगा।
3) याकूब 1:22—“परन्तु word को सिर्फ सुनना न बनाएं, बल्कि उसे पालन करना भी करें।” यह पाठ “सुनना” और “पालन” के संयोजन पर बल देता है।
पाठ का व्यवहारिक अनुप्रयोग
- अपने विचारों और मान्यताओं के प्रति तटस्थ सुनवाई बनाए रखें; जरूरी है कि आप ईश्वर की बातों को अपने जीवन के निर्देशन में अपनाने का अवसर दें।
- यदि आप समाज-संस्कृति के दबावों के भीतर भी सत्य को पहचान लेते हैं, तो उसे अपने कर्मों में ढालना परमेश्वर की अपेक्षा है।
सम-सार
यह छोटा सा वाक्य एक बड़े अभ्यास की मांग करता है: ईश्वर के शब्दों को सम्मान और संकल्प के साथ सुनना, फिर उसी अनुरूप अपने जीवन को ढालना। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलनों के साथ जहाँ उपयुक्त उद्धरण उपलब्ध हों, वहाँ वे सटीक शब्दों के बजाय संक्षिप्त सार के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं, ताकि पाठक मूल भावना के साथ आगे बढ़ सके।
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त व्याख्या
• मरकुस 4:23–24 संदर्भ में स्पष्ट किया गया है कि सुनना एक सक्रिय क्रिया है जो समझ और परिणाम में बदल जाती है; यह पाठ ने कहा है कि जो सुन सके, उसे सुनना चाहिए।
• मत्ती 11:15—जो सुनना चाहता है, उसे सुनना चाहिए; आध्यात्मिक चेतना हेतु आह्वान।
• याकूब 1:22—शब्द का पालन जरूरी है; अतः सुनना और पालन एक साथ चलते हैं।