Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 7:1 मरकुस 7:2 मरकुस 7:3 मरकुस 7:4 मरकुस 7:5 मरकुस 7:6 मरकुस 7:7 मरकुस 7:8 मरकुस 7:9 मरकुस 7:10 मरकुस 7:11 मरकुस 7:12 मरकुस 7:13 मरकुस 7:14 मरकुस 7:15 मरकुस 7:16 मरकुस 7:17 मरकुस 7:18 मरकुस 7:19 मरकुस 7:20 मरकुस 7:21 मरकुस 7:22 मरकुस 7:23 मरकुस 7:24 मरकुस 7:25 मरकुस 7:26 मरकुस 7:27 मरकुस 7:28 मरकुस 7:29 मरकुस 7:30 मरकुस 7:31 मरकुस 7:32 मरकुस 7:33 मरकुस 7:34 मरकुस 7:35 मरकुस 7:36 मरकुस 7:37



मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु
मरकुस 7:19 का मूल विचार है—क्या व्यक्ति के मन के भीतर से निकलने वाला अशुद्धि-कोई कर्म है या भोजन में से जो शरीर को शुद्ध करता है? यीशु ने यह स्पष्ट किया कि भोजन से जुड़ी अशुद्धि का मामला मन के भीतर की प्रेरणा नहीं बल्कि भोजन के पचने के साथ जुड़ा हुआ है, और इसलिए विभाजन का नियम इस दृश्य में परोसा गया कि सारी अशुद्धियाँ बाह्य क्रियाओं के कारण नहीं, बल्कि आंतरिक मनोभावों से उत्पन्न होती हैं।
पाठ-विवेचना: साहित्यिक संदर्भ
यह घटना मरकुस के Gospel में पारंपरिक तौर पर पवित्रता के नियमों के बारे में यीशु की शिक्षा का हिस्सा है। पार्श्व-स्थितियों में यीशु ने धारणाओं पर प्रश्न उठाते हुए स्पष्ट किया कि बाह्य भोजन की अशुद्धि नहीं, बल्कि नीयत और मनोभाव का परिवर्तन आवश्यक है। यह मोड़ यह दिखाता है कि ईश्वर के राज्य में पवित्रता की परिभाषा भीतर से निकलती है, बाहर से नहीं।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व
यहां प्राथमिक बात यह है कि Jesus ने पेट को अशुद्ध मानकर बाह्य क्रिया-प्रधान व्यवस्था के दायरे को थोड़ा ढीला किया ताकि आंतरिक परिवर्तन की मांग प्रमुख बने। कुछ पुरातन प्रचारक-टिप्पणियों में इसे असंगत नियमों के विरुद्ध एक मार्गदर्शक संकेत माना गया है: जब हृदय बदलता है, तब नियम-पालन स्वतः प्रवाह बन जाता है।
पवित्रशास्त्र से सम्बन्ध (Cross-references)
इन संदर्भों में एक बार फिर यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की दृष्टि में पवित्रता आंतरिक परिवर्तन से आती है, न कि केवल बाहरी आचार-व्यवस्था से।
विचारणीय प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
मरकुस 7:19 से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ईश्वर की दृष्टि में शुद्धता का मूल स्रोत मन-प्रेरणा है। भोजन-निकासी के साथ जुड़ी अशुद्धि का विधान दर्शाता है कि परमेश्वर के राज्य में बदलाव भीतर से आता है और बाहर के नियमों पर निर्भर रहना कम होता है। यह संदेश क्रिस्ट की कृपा के साथ आंतरिक परिवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करता है—यही वास्तविक पवित्रता है।
पुनरावलोकन उद्धृत विचार
मैथ्यू हेनरी, अलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की परंपरागत टिप्पणियों से उद्धरणों का संक्षिप्त संकेत: यह भाग बाह्य अशुद्धियों के मिथक के विरुद्ध आंतरिक परिवर्तन की जोरदारपेशक है। (उद्धरण संक्षेप के रूप में: "बाह्य क्रियाओं से नहीं, भीतर की प्रवृत्ति से अशुद्धि होती है", आदि।)