Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 7:1 मरकुस 7:2 मरकुस 7:3 मरकुस 7:4 मरकुस 7:5 मरकुस 7:6 मरकुस 7:7 मरकुस 7:8 मरकुस 7:9 मरकुस 7:10 मरकुस 7:11 मरकुस 7:12 मरकुस 7:13 मरकुस 7:14 मरकुस 7:15 मरकुस 7:16 मरकुस 7:17 मरकुस 7:18 मरकुस 7:19 मरकुस 7:20 मरकुस 7:21 मरकुस 7:22 मरकुस 7:23 मरकुस 7:24 मरकुस 7:25 मरकुस 7:26 मरकुस 7:27 मरकुस 7:28 मरकुस 7:29 मरकुस 7:30 मरकुस 7:31 मरकुस 7:32 मरकुस 7:33 मरकुस 7:34 मरकुस 7:35 मरकुस 7:36 मरकुस 7:37



मुख्य बिंदु
मरकुस 7:29 में यीशु ने एक क्षमा करने योग्य विश्वास के साथ एक हिन्दू-आस्थावानों को दिखाते हुए दुष्टात्मा को बेटी से निष्कासित कर दिया। इस वार्ता में विश्वास, नम्रता, और यीशु की दया स्पष्ट रूप से उभरती है: भले ही वह बाहरी सीमाओं के भीतर आया हो, परन्तु आस्था के अनुरोध से प्रभु ने सक्षम प्रभाव दिखाया।
पाठ-संदर्भ का साहित्यिक संदर्भ
यह वाक्य मरकुस के दृश्य-आधारित वर्णन का हिस्सा है जिसमें यीशु दूसरे समुदाय के लोगों के साथ संवाद करते हैं। यहाँ एक महिला जिसका पुत्र नहीं, बल्कि बेटी दुष्टात्मा से पीड़ित है, यीशु के पास आती है। वह विनम्र भाषा में कहती है, और यीशु का उत्तर उसके शर्तों के तहत भी रूपांतरित होता है: “इस बात के कारण चली जा; दुष्टात्मा तेरी बेटी में से निकल गई है।” यह उद्गम दर्शाता है कि यीशु के राज्य की शक्ति विक्षेपित नहीं, बल्कि विश्वासयोग्य और प्रेमपूर्ण पहुंच से प्रवाहित होती है।
धार्मिक और थियोलाजिकल signifikan
इस कथा में दिखता है कि यीशु की कृपा कहीं-न-कहीं विश्वास के मानदंड पर निर्भर है—यहाँ हिंद-जाति की सीमा नहीं, बल्कि आस्था की निश्छलता प्रमुख है। यह पंक्ति दिखाती है कि परमेश्वर के राज्य के लिए व्यक्ति की जाति या नस्ल बाधा नहीं बनती; जरूरत होती है—विश्वास की तन्मयता और विनम्रता की प्रवृत्ति की। साथ ही यह मानवीय पीड़ा के प्रति ईश्वर की सहानुभूति को भी उभारता है—मेरा विश्वास है कि दुष्टात्मा के प्रभाव से मरी हुई स्थिति में भी यीशु की दया तुरंत प्रतिक्रिया करती है।
शब्दार्थ और विचारशील दृष्टिकोण
घटना का केंद्र है—वह महिला जिसने विनयपूर्वक निवेदन किया और अपनी बेटी के लिए सहायता माँगी। यीशु के उत्तर में एक संकेत है कि बहिर्मुखी स्वागत के साथ अंतर्निहित आस्था भीतर से परिवर्तन ला सकती है। कुछ पुराने टिप्पणीकारों ने इसे यहूदी-आघात के भीतर भी विश्व-व्यापी दयाभाव की संभावनाओं के संकेत के रूप में पढ़ा है।
Cross references (संदर्भ-सम्बन्ध)
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि आस्था की पूर्णता और विनम्रता जो यीशु के आगमन को स्वीकारती है, वह दयालु सत्ता के लिए मार्ग बनाती है।
Reflection के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
मरकुस 7:29 इस बात का प्रमाण है कि यीशु की दया और राज्य की शक्ति आस्था के संगत आह्वान पर ही प्रकाशित होती है। वह दुष्टात्मा को देख कर भी, शास्त्रीय सीमाओं को नहीं टालते—बल्कि विनम्र विश्वास के सामने निष्कासन देता है। यह संदेश आज भी विश्वास के साथी हैं: परमेश्वर के राज्य के लिए आस्था, नम्रता, और करुणा—तीनों एक साथ काम करते हैं।