Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 7:1 मरकुस 7:2 मरकुस 7:3 मरकुस 7:4 मरकुस 7:5 मरकुस 7:6 मरकुस 7:7 मरकुस 7:8 मरकुस 7:9 मरकुस 7:10 मरकुस 7:11 मरकुस 7:12 मरकुस 7:13 मरकुस 7:14 मरकुस 7:15 मरकुस 7:16 मरकुस 7:17 मरकुस 7:18 मरकुस 7:19 मरकुस 7:20 मरकुस 7:21 मरकुस 7:22 मरकुस 7:23 मरकुस 7:24 मरकुस 7:25 मरकुस 7:26 मरकुस 7:27 मरकुस 7:28 मरकुस 7:29 मरकुस 7:30 मरकुस 7:31 मरकुस 7:32 मरकुस 7:33 मरकुस 7:34 मरकुस 7:35 मरकुस 7:36 मरकुस 7:37



मरकुस 7:25 का संदर्भ और उसकी हाइक-सी समझ
इस व verse में येसु के सार्वजनिक उपदेश के क्रम में एक ऐसी कथा आती है जिसमें एक प्यासे व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पुत्री के लिए एक स्त्री आकर विनती करती है। मरकुस 7:24-30 में संदर्भ है कि एक गिलगाल की पर्तुकत्ता-स्त्री (hep) आकर कहती है: “मेरे पुत्री के अशुद्ध आत्मा से मुक्त कर दें।” verse 25 बताती है कि उसने तुरंत उस स्त्री की दया और विश्वास को देखा और उसकी बहन-संतान की चिंता को समझा।
मुख्य अर्थ
यह पंक्ति दिखाती है कि यीशु की करुणा पृष्ठभूमि में भी, दिखती है कि वे पहले यहूदी-जनसमूह के साथ सीमा-रेखा बनाते हैं, फिर भी आस्था और निवेदन के सामने द्वार खोलते हैं। स्त्री ने अपने पुत्री के लिए भक्ति-समर्पित आग्रह किया, और येसु ने उसे सम्मानपूर्वक ग्रहण किया।
दो-तीन प्रमुख थीम
संदर्भ-संरचना
- मरकुस 7:26-30 में इसी घटना के आगे का घटनाक्रम दिखता है जिसमें यीशु-प्रतिपादन और स्त्री की विनम्रता स्पष्ट है।
- अन्य क्रूस-प्रेरित मिसालें जहाँ निर्बल प्रार्थना और विश्वास से देव-करुणा प्राप्त होती है (लूका 18:1-8; मत्ती 15:21-28)—ध्यान दें कि यीशु के भेजे जाने वाले संदेश में आस्था के लिए सबसे ऊपर प्रेम है, चाहे सामाजिक सीमा जो भी हो।
संबंधित पदों के छोटे संदर्भ
- लूका 11:9: “मैं तुम से कहता हूँ, माँगते रहो और दोहराते रहो, दया से देगा।”
- मति 15:28: “हे मरियम-कार्यकर्ता, तेरे विश्वास ने तुझे मुक्त किया”; यह दिखाता है कि विश्वास की स्पष्टता यीशु के स्वर से मिलती है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
1) कठिन परिस्थितियों में भी माता-पिता और परिवार के लिए विश्वास को बनाए रखें; यीशु की दया उन तक पहुँचती है।
2) येसु के सामने विनम्रता और दृढ़-आस्था एक साथ चलती है—आस्था के साथ विनय का मिश्रण अत्यंत प्रभावी ढंग से काम करता है।
3) समाज की एकता और दया की व्यापकता के लिए संदेश: परमेश्वर का करुणामय प्रेम सभी पर खुला है, भले ही सामाजिक-धार्मिक सीमाओं की दृष्टि से अलगाभौतिक हो।
उद्धरण/तर्कशक्ति (पार्श्व विवरण)
यह भाग किसी विशिष्ट परोक्ष उद्धरण का नहीं देता; परन्तु Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरे बाइबिल-टिप्पणियाँ में यह दर्शाया गया है कि आस्था के प्रति यीशु की प्रतिक्रिया और करुणा का अभ्यास कैसे चलता है। ध्यान दें कि नीचे दिया गया संदर्शन-नोट्स इन टिप्पणियों के सार को संजोते हैं:
- "अशुद्ध आत्मा" के विरुद्ध स्त्री की आस्था—हि. पट की पंक्ति में दृढ़ता दिखती है कि विनती से उपाय होता है।
संक्षिप्त समापन
मरकुस 7:25 में एक स्त्री की आग्रहशील आस्था और यीशु की करुणामय अभिव्यक्ति एक साथ उभरती है। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर का राज्य बहुविध आस्थाओं के प्रति खुला है, और सही विनती, विश्वास और प्रेम से उसकी कृपा प्राप्त होती है।