Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 7:1 मरकुस 7:2 मरकुस 7:3 मरकुस 7:4 मरकुस 7:5 मरकुस 7:6 मरकुस 7:7 मरकुस 7:8 मरकुस 7:9 मरकुस 7:10 मरकुस 7:11 मरकुस 7:12 मरकुस 7:13 मरकुस 7:14 मरकुस 7:15 मरकुस 7:16 मरकुस 7:17 मरकुस 7:18 मरकुस 7:19 मरकुस 7:20 मरकुस 7:21 मरकुस 7:22 मरकुस 7:23 मरकुस 7:24 मरकुस 7:25 मरकुस 7:26 मरकुस 7:27 मरकुस 7:28 मरकुस 7:29 मरकुस 7:30 मरकुस 7:31 मरकुस 7:32 मरकुस 7:33 मरकुस 7:34 मरकुस 7:35 मरकुस 7:36 मरकुस 7:37



मत-7:35 का अर्थ—कई बोलियाँ खुलती हैं
इस पद का प्रायः अर्थ सरल है: यीशु ने एक व्यक्ति के कान खोले और जुबान की गाँठ दी तो वह साफ-साफ बोलने लगा। यह दिखाता है कि ईश्वर की दया क्यों के कारण शारीरिक वरदान के साथ मनुष्य की आंतरिक बोलचाल और समझ भी सुधारती है।
संदर्भ‑पृष्ठभूमि
मारकुस 7 में यीशु वर्तमान में धार्मिक परंपराओं के निर्गम क्षेत्र में पथभ्रष्ट ढंग से पूजा-उत्सव और नियमों के अति-पालन के विरुद्ध शिक्षित कर रहे हैं। यहाँ एक व्यक्ति – संभवतः गले में बोलने की गाँठ या सुनने-समझने की कठिनाई से पीड़ित – चिन्हित किया गया है ताकि यीशु की चमत्कारी शक्ति का वास्तविक उद्देश्य स्पष्ट हो: लोग शारीरिक बीमारियों के अलावा आत्मिक कठिनाइयों से भी मुक्त हों।
व्याख्यात्मक बिंदु
कथनात्मक निष्कर्ष (Themes)
अनुचित तुलना और क्रॉस‑रेफरेंसेस
इसे अन्य चमत्कारों के साथ जोड़कर पढ़ना उपयोगी होता है:
आध्यात्मिक उपदेश — संक्षिप्त निष्कर्ष
यीशु के इस चमत्कार से एक केंद्रीय संदेश उभरता है: परमेश्वर की कृपा उन बाधाओं को दूर करती है जो बोलने या समझने में बाधक बनती हैं। जैसे कान खुलते हैं और जुबान से साफ-साफ बोलना शुरू होता है, वैसे ही ईश्वर का राज्य हमारे भीतर की दोषपूर्ण प्रवृत्ति और बहिर्मुखी मान्यताओं को खोलकर सत्य बोलने के लिए उन्नत करता है।
संक्षिप्त उपयोगी संदर्भ (Cross-References) और उनका अर्थ
1) मरकुस 5:41–42 – दिलचस्प पुनरावृत्ति: प्रभु के शब्द से बहाल जीवन, सामाजिक पुनःस्थापना दिखती है।
2) मत्ती 15:18–19 – वाणी से बाहर आने वाली बुराइयाँ आंतरिक स्रोतों से निकलती हैं; इस चमत्कार का प्रेरक सन्देश भावनात्मक और नैतिक सुधार की ओर इशारा करता है।
3) प्रकाशितवाणी 3:20 – सुनना और प्रतिक्रिया देना, प्रभु के साथ मेल-जोल की उपलब्धि का प्रतीक है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
1) जीवन के कठिन समय में भी भगवान की मदद से बोलचाल और समझ स्पष्ट हो सकती है।
2) शब्दों के चयन और संवाद की शुद्धता पर ध्यान दें—यही आंतरिक परिवर्तन का प्रत्यक्ष संकेत है।
उद्धरण संकेत: इस लेख में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मौलिक विचारों से प्रेरित संकेती बिंदु समाहित हैं; आवश्यक जगहों पर उनके प्रकाशित विचारों के छोटे-छोटे उधृत अंशों के संकेत दिए गए हैं जब उपलब्ध हों।